लोकमत क्या है ,परिभाषाए , विशेषताएँ ,लोकमत निर्माण के साधन, स्वस्थ लोकमत के निर्माण हेतु आवश्यक परिस्थितिया ,लोकमत का महत्व ,बाधाएं
लोकमत या जनमत
अर्थ -
समाज को प्रभावित करने वाले विषयो के सम्बंध में व्यक्तियों के विचारों के समूह को साधारण भाषा मे जनमत या लोकमत कहते है ।
वर्तमान समाज को
लोकतांत्रिक प्रणाली की कुशलता पूर्वक संचालन के लिए जनमत अति आवश्यक है ।
सरकार का स्वरूप चाहे कोई भी रूप हो ,स्वतंत्र हो या राजतंत्र या तानाशाही
हो ,सभी शासन प्रणालियों में जनमत की अवधारणा होती है । लोगो के मत या
विचार सरकार की नीतियों में बदलाव के लिए भी हो सकता है ।
साधारण शब्दों में लोगो की सामाजिक विषयों के सम्बंध में राय जनमत कहलाती
है । जनमत दो शब्दों से मिल कर बना है । जन + मत । जिसमे जन का अर्थ - लोग
तथा मत का अर्थ - विचार ।
अंत जनमत का अर्थ है - लोगो के ऐसे विचार जो
सम्पूर्ण समाज की भलाई के लिए हो ,उसे जनमत कहा जाता है । यह विचार सामाजिक
विषयों से प्रभावित तथा अभिव्यक्त होता है ।
जनमत या लोकमत की परिभाषाए -
लॉर्ड ब्राइस के अनुसार - "समाज को प्रभावित करने वाले विषयो के सम्बंध में व्यक्तियों के विचारों के समूह को जनमत कहा जाता है । "
केरोल - " प्रायः जनसाधारण की सयुक्त प्रतिक्रियाओ को जनमत कहा जाता है ।"
सॉल्टाउ
- " जनमत का प्रयोग उन इच्छाओ तथा विचारों के लिए किया जाता है , जो जनता
अपने विचारों , सामान्य जीवन के संबंध में रखती है।"
रूसो के अनुसार - " लोकमत किसी विशेष समय एवं स्थान में प्रचलित प्रभावपूर्ण विचारधाराओं के आधारों पर निर्मित सार्वजनिक मत है ।"
लोकमत की विशेषताएं -
- लोकमत सर्वसाधारण का मत है , किसी वर्ग विशेष अथवा कुछ व्यक्तियों का नहीं ।
- यह मत आवेश पर आधारित न होकर स्थायी मत होता है । इस मत में लोक कल्याण की भावना निहित होती है ।
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लोकमत न तो बहुसंख्यक मत है और न ही एकमत इसे बहुसंख्यकों का मत केवल इस
अर्थ में कहा जा सकता है कि इससे अल्पमत द्वारा बहुमत के निर्माण के औचित्य
की स्वीकृति निहित होती है ।
लोकमत निर्माण के साधन -
1. समाचार पत्र - पत्रिकाएं -
वर्तमान समय में समाचार पत्र और पत्रिकाएं लोकमत निर्माण का महत्वपूर्ण साधन है ।
लिपमैन
के अनुसार - "समाचार - पत्रों को लोकतंत्र का धर्मग्रंथ कहा है ।" समाचार
पत्र खराब सरकार की आलोचना करते हैं और निर्भिकतापूर्ण लोकमत का निर्माण
करते हैं और लोकमत को ध्यान में रखकर सरकार अपनी नीतियों में परिवर्तन करती
है ।
2. रेडियो और टेलीविजन -
रेडियो
और टेलीविजन अब केवल मनोरंजन के साधन मात्र नही रह गए । ये जनता को शिक्षा
देकर लोकमत का निर्माण करने में सहायक होते है । समाचार पत्र - पत्रिकाओं
का लाभ केवल शिक्षित लोग ही ले सकते है , किन्तु रेडियो ,टीवी से शिक्षित -
अशिक्षित दोनों लाभ ले सकते है और जनमत का निर्माण कर पाते है ।
3. राजनैतिक दल -
लोकमत
निर्माण में राजनीतिक दलों का बड़ा महत्व है । प्रत्येक दल के कुछ निश्चित
सिद्धांत , उद्देश्य , विचार व आदर्श होते है । वे जनता को अपनी विचारधारा
तथा लक्ष्यों से परिचित करवाते है ।
4. सिनेमा -
वर्तमान
समय में सिनेमा ने भी लोकमत निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है ।
सिनेमा का जनसाधारण के मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ता है और दर्शकों की
भावनाओं उद्देलित होती है । सिनेमा , शिक्षित तथा अशिक्षित लोगो दोनों को
ही प्रभावित करते है ।
उदाहरण - भारत मे सिनेमन विधवा पुनर्विवाह ,
स्त्रियों की स्वतंत्रता और शिक्षा के पक्ष में , तथा दहेज ,जातिवाद के
विपक्ष में स्वतंत्र लोकमत का निर्माण करने में अहम योगदान दिया है ।
5. शिक्षण - संस्थाएं -
स्कूल
और कॉलेज विद्यार्थियों में नागरिक चेतना उत्पन्न करते है । विद्यार्थियों
के चरित्र निर्माण में अहम भूमिका है । इन संस्थाओं के द्वारा
विद्यार्थियों में विवेक से कार्य करने व निर्णय लेने में सहायता मिलती है ।
शिक्षित व्यक्ति लोकमत निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है ।
6 . सार्वजनिक सभाएं -
इनका
भी अहम योगदान है । मंत्री शासनाध्यक्ष जनता में सरकार की नीतियों का
प्रचार करते है तथा विरोधी दल जनता को सरकार की त्रुटियाँ बताते है । इससे
लोगों के वही विचार बन जाते है जो सार्वजनिक सभाओ में नेताओ द्वारा
प्रस्तुत किया जाता है ।
7. धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थाएं -
धार्मिक
संस्थाए ( मंदिर , मस्जिद , गुरद्वारे गिरजाघर आदि )लोगों के मिलन के
केंद्र होते है , जहाँ उन्हें धार्मिक शिक्षा प्रदान की जाती है । धार्मिक
संस्थाए विचारों का प्रचार - प्रसार करके लोकमत निर्माण करने में योगदान
देती है ।
8.चुनाव -
लोकमत प्रकट करने का एक महत्वपूर्ण साधन चुनाव भी है | प्रत्येक राजनीतिक दल चुनावों के दौरान अपनी विचारधारा तथा कार्यक्रम जनता के समक्ष रखता है इससे लोगों के राजनीतिक विचार बनते है |
स्वस्थ लोकमत के निर्माण हेतु आवश्यक परिस्थतियाँ -
1.सुशिक्षित जनता -
स्वस्थ लोकमत निर्माण हेतु जनता का शिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है | शिक्षा के अभाव में व्यक्ति का मानसिक और बौद्धिक विकास संभव नहीं है ऐसी स्थिति में उनका अपना कोई सुनिश्चित मत नहीं होता है अपितु वह दूसरों के विचारों से प्रभावित होता है |
2. स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रेस -
समाचार
पत्रों ,प्रेस , मीडिया पर सरकारी अथवा गैर सरकारी किसी भी प्रकार का
दबाव नहीं होना चाहिए और उन्हें सार्वजनिक प्रश्नों पर स्वतंत्रता पूर्वक
अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
3.विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
स्वस्थ
लोकतंत्र के विकास और निर्माण की एक अन्य आवश्यकता यह भी है कि सभी
व्यक्तियों को अपने विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता प्राप्त होनी चाहिए ।
अल्पसंख्यक वर्गों और दलों को यह अधिकार होना चाहिए कि वह स्वतंत्रता
पूर्वक अपना मत व्यक्त कर सके और सभी वैद्य उपायों से दूसरों को अपने
विचारों का समर्थन बना सके ।
Ex. संविधान के अनुच्छेद 19(1) के अनुसार विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है।
लोकतंत्र में लोकमत / जनमत का महत्व
1.शासन की निरंकुशता पर नियंत्रण
लोकतंत्र
में जब यह देखा जाता है कि सरकार मनमानी करने का प्रयत्न कर रही है तो
लोकमत के द्वारा शासन की निरंकुशता पर रोक लगा दी जाती है क्योंकि लोकमत के
बल पर ही सरकार बनती है और बिगड़ती है ।
2.नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा
जब
कभी सरकार जनता की स्वतंत्रता के विरुद्ध कार्य करने का प्रयत्न करती है
तो लोकमत उन्हें इस प्रकार का अनुचित कार्य करने से रोक कर नागरिकों की
स्वतंत्रता की रक्षा करता है ।
3.विभिन्न संस्थाओं को कर्तव्य पालन की चेतावनी
लोकमत
विभिन्न सामाजिक संस्थाओं को उनके वास्तविक कर्तव्य पालन को चेतावनी देता
रहता है। इससे उनमें स्वार्थपरता एवं संकीर्णता नहीं आने वाली । लोकमत इन
संस्थाओं को जनता के प्रति उनके कर्तव्य बताता है ।
4.स्वार्थी राजनीतिज्ञों पर नियंत्रण
लोकमत
स्वार्थी तथा बेईमान राजनीतिज्ञ और नेताओं पर नियंत्रण रखता है जिससे वह
सरकार को अपने मित्रों एवं संबंधियों की स्वार्थ सिद्धि का साधन ने बना ले ।
5.सरकार का पथ प्रदर्शक
लोकतंत्रीय
सरकार में लोकमत सरकार का पथ प्रदर्शन करता है। लोकमत से सरकार को इस बात
की जानकारी मिलती है कि जनता क्या चाहती है और क्या नहीं चाहती है । लोकमत
से ही सरकार यह जान सकती है कि उसके द्वारा किन कानूनों का निर्माण किया
जाए और किन का नहीं ।
लोकमत निर्माण में बाधाएं
1.अशिक्षा
अशिक्षा
स्वस्थ लोकमत निर्माण में सबसे बड़ी और प्रमुख बाधा है | अशिक्षित नागरिक
जटिल राजनीतिक एवं आर्थिक मामलों के संबंध में अपना कोई नीजि मत नहीं
रखते हैं | क्योंकि उनमें सोचने - विचारने की बौद्धिक क्षमता नहीं होती है
| वे बहकावे में आकर उनके मत को अपना मत बना लेते हैं |
2.दोषपूर्ण राजनीतिक दल
यदि
राजनीतिक दल सुनिश्चित राजनीतिक और आर्थिक कार्यक्रमों पर आधारित हो तो ,
वे लोकमत के निर्माण में बहुत सहायक हो सकते हैं | किंतु यदि इनका निर्माण
जाति ,धर्म ,भाषा या वर्ग के आधार पर हुआ हो तो , वह संकुचित दृष्टिकोण का
प्रतिपादन करते हैं | वे दूषित प्रचार से जनता को गुमराह एवं देश की एकता
को हानि पहुंचाते हैं |
3. संप्रदायिकता
सांप्रदायिकता
की संकीर्ण भावना निश्चित रूप से लोकमत के लिए अभिशाप है | सांप्रदायिक
लोग अपने वर्गीय हितों पर अधिक ध्यान देते हैं और सार्वजनिक हितों की
उपेक्षा करते हैं |
4. प्रचार साधनों पर सरकारी नियंत्रण -
प्रेस,
टीवी ,रेडियो ,सोशल मीडिया आदि पर प्रचार साधनों पर सरकार का नियंत्रण
होने से जनता सही तथ्यों से अवगत नहीं हो पाती और सरकार द्वारा झूठे
प्रचार की शिकार हो जाती है | फलस्वरुप स्वस्थ लोकमत निर्माण नहीं हो पाता |
5. आर्थिक विकास की विषमता
समाज
में व्याप्त आर्थिक विषमता भी एक प्रमुख प्रमुख बाधा है | इस स्थिति में
अत्यधिक गरीब लोग , अमीर लोगों के पिछलग्गू बनकर रह जाते हैं | मतदान के
समय अमीर लोग गरीब लोगों को पैसों के बल पर खरीद लेते हैं | आर्थिक विषमता
समाज को संपन्न व् निर्धन दो वर्गों में बांट देती है |
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