अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष
वैश्विक शासन विशेष रूप से आर्थिक नीति निर्माण के क्षेत्र में बहुत स्पष्ट रहा है | ऐसा इसलिए है क्योंकि अर्थशास्त्र राज्यों के बीच अन्योन्याश्रिम्ता का स्पष्ट क्षेत्र है | 1945 के बाद से , वैश्विक आर्थिक अभिशासन की एक प्रणाली बहुपक्षीय समझौतों , औपचारिक संस्थानों और अनौपचारिक संस्थानों एवं नेटवर्क की एक धनी वेव के माध्यम से उभरी है | जिनमें सबसे महत्वपूर्ण संस्थान ब्रेटन वुड्स संस्थान या समझौते के द्वारा स्थापित हुए |
ब्रेटन वुड्स प्रणाली
1. 1945 से पहले तक अधिकांश वैश्विक लेनदेन द्विपक्षीय होते थे और उनके कोई स्थायी नियम नहीं थे इस कारण वैश्विक लेनदेन में शामिल देशों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था | अतः विभिन्न देशों के मध्य सीमा - पार के लेनदेन के लिए वैश्विक प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता हुई जो निश्चित नियम बद्धता प्रदान कर सके |
2. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी
|अतः पूरे विश्व को ऐसी आर्थिक प्रणाली की जरूरत थी जो युद्ध की बर्बादी दूर कर सकें आर्थिक विकास एवं संपन्नता की ओर ले जाए |
अतः इसी समस्या को लेकर जुलाई 1944 में संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यू हेम्पशायर स्थित ब्रेटन वुड्स नामक जगह पर 44 देशों के प्रतिनिधियों की एक बैठक आयोजित हुई जिसका उद्देश्य एक नई अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली की स्थापना पर विचार करना था |इसे ही ब्रेटन वुड्स कॉन्फ्रेंस के नाम से जाना जाता है |
> इस सम्मेलन में हैरी डेसटर वाइट ( अमेरिका )और जॉन मिनार्ड किंग्स के मार्गदर्शन में इस प्रणाली को बाकायदा तैयार किया गया |
> इस बैठक के परिणाम स्वरुप अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक ( IBRD ) ( जिसे विश्व बैंक के नाम से जाना जाता है )जैसी संस्थाएं की स्थापना हुई | अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष एवं विश्व बैंक दोनों को ब्रेटन वुड्स जुड़वा कहा जाता है | दोनों का मुख्यालय वाशिंगटन डीसी में है |
> इस ब्रेटन वुड्स प्रणाली का एक सिरा सोने के साथ जुड़ता था और दूसरा डॉलर के साथ | इस प्रकार कोई देश सोना या डॉलर के लियाज से अपनी मुद्रा को स्थिर रख सकते थे | इस प्रणाली में IMF के सदस्य देश अपनी मुद्रा को एक निश्चित दर पर डॉलर में परिवर्तन कर सकते थे |
> इस व्यवस्था में सभी देशों की मुद्राओं को डॉलर के साथ जोड़ दिया गया और नियम बनाया गया कि अमेरिकन फेडरल रिजर्व बैंक ( जैसे भारत में RBI ) डॉलर तभी छाप सकती है जब उसके पास 0.88 ग्राम सोना है |
> इस प्रकार जिस देश के पास जितना सोना होगा ,वह उस अनुपात में डॉलर या फिर अपनी मुद्रा छाप सकती है |
नोट:- इस प्रकार शुरुआत में भारतीय रिजर्व बैंक एक रुपए छाप सकती थी यदि उसके पास 0.30 डॉलर हो या 0.26 ग्राम सोना पड़ा हो |
> इससे फायदा हुआ कि मुद्रा स्थिति अर्थात महंगाई नियंत्रण में आ गई | क्योंकि कोई भी देश अपने मन मुताबिक नोट नहीं छाप सकता था तथा इससे विनिमय दर( Exchange Rate ) में स्थिरता आ गई |
> और नियम यह बनाया गया कि सभी देशों के केंद्रीय बैंक अपने विनिमय दर को इसी के आसपास रखेगी |
> अगर किसी देश के अंदर कोई वित्तीय संकट आ जाए तो और इस दर के आसपास अपनी विनय में दर नहीं रख पाए तो इस स्थिति में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष उसकी सहायता करेगा |
> यह प्रणाली 70 के दशक तक चली और उसके बाद यह 1969 के पास ध्वस्त या समाप्त हो गई |
> अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष वैश्विक वित्तीय संरचना का एक प्रमुख एवं महत्वपूर्ण निकाय है | जिसकी स्थापना या उद्घाटन दिसंबर 1945 में हुई | और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपना कार्य सुचारू रूप से 1 मार्च 1947 को शुरू किया | संयुक्त राष्ट्र संघ के अभिकरण के रूप में नवंबर 1947 को शामिल किया गया | इसका मुख्यालय वाशिंगटन डीसी में है |
> अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में वर्तमान में 190 सदस्य देश है | और 190 वां देश अन्डोरा है जो 2020 में शामिल हुआ | और 189 वां देश नौरु था |
> इसके वर्तमान में प्रबंध निदेशक बुल्गारिया से क्रिस्टालिना जोर्जिया है |
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के उद्देश्य
> देशों के प्रतिकूल भुगतान संतुलन को ठीक रखना |
> अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का संतुलित विकास करना |> विनय में अदर में स्थायित्व लाना |
> सदस्य देशों के बीच बहुपक्षीय भुगतान प्रणाली को सुगम बनाना |
> विदेशी मुद्रा प्रतिबंधों को दूर करके वित्तीय क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करना |
> अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रमुख कार्य
> अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग को प्रोत्साहन देना |
> अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का संतुलित विकास को बढ़ावा देना |
> विनिमय दर का स्थिरीकरण |
> विनिमय प्रतिबंधों को समाप्त करना तथा बहुपक्षीय भुगतान की व्यवस्था करना |
> भुगतान संतुलन की समस्या की स्थिति में सदस्य देशों को आर्थिक मदद उपलब्ध करवाना|
> अंतरराष्ट्रीय भुगतान में आने वाली समस्याओं का निपटारा करना तथा उसकी समयावधि को कम करना |
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की संरचना एवं प्रबंध व्यवस्था
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की बैठक वार्षिक होती है |
IMF की बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में 190 सदस्य शामिल होते हैं | यह नीतिगत निर्णय लेते हैं | IMF की कार्यकारी बोर्ड में 24 कार्यकारी निर्देशक 5 रिजर्व ( 5 सबसे ज्यादा कोटा धारक देश ) शामिल होते हैं | और ये लोग दैनिक कार्यों को देखते है |
प्रबंधक निदेशक IMF का प्रबंधक निदेशक के वर्तमान में क्रिस्टालिना जोर्जिया है , जिनका कार्यकाल 5 वर्ष होता है | IMF का मुख्यालय वाशिंगटन डीसी में है |
आम कर्मचारी (स्टाफ)
नोट:- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रत्येक सदस्य देश को 2 पद प्राप्त होते हैं एक गवर्नर का तथा दूसरा वैकल्पिक गवर्नर का |
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में कोटा
बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में शामिल प्रत्येक गवर्नर को मतदान की शक्ति उस देश के कोटा अधिकार पर निर्भर करता है | प्रत्येक राज्य को उसकी सदस्यता के लिए 250 मत उसके गवर्नर को प्राप्त होते हैं , जो कि सभी देशों के लिए एक समान होता है |
परंतु गवर्नर के मतों में समानता सदस्य देशों को मिले विशेष आहरण अधिकार (Special Drawing Rights- SDR ) के कारण आता है | प्रत्येक एक लाख SDR पर गवर्नर को एक अतिरिक्त मत प्राप्त होता है |
इस प्रकार जिन राष्ट्रो के पास जितनी ज्यादा मात्रा में SDR कोटा होगा उसकी मत शक्ति उतनी ही अधिक होगी |
विशेष आहरण अधिकारी (Special Drawing Rights)
इस प्रकार जो भी पैसे आते हैं उससे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष एक नई परिसंपत्ति या करेंसी का निर्माण किया , जिसे विशेष आहरण अधिकार SDR कहा जाता है | अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की पूंजी सदस्य देशों की SDR में निर्मित होती है ,जो सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में जमा करानी पड़ती है |
IMF का सारा लेन-देन एसडीआर में ही होता है |
IMF का सारा लेन-देन SDR में ही होता है ,इसलिए इसे कागजी स्वर्ण (पेपर गोल्ड) भी कहा जाता है | 1971 तक IMF के सदस्य देशों का कोटा अमेरिकी डॉलर में हुआ करते थे | लेकिन बाद में कुछ समस्याओं के कारण इसे SDR में बदल दिया | 70 के दशक तक एक SDR , एक यूएस डॉलर , 0.88 ग्राम सोना के बराबर कर दिया गया |
1973 में ब्रिटेन वुड्स प्रणाली के पतन के बाद , SDR को मुद्राओं की टोकरी के रूप में दोबारा परिभाषित किया गया था | SDR टोकरी में वर्तमान में 5 मुद्राये शामिल है | जो निम्न है - यूएस डॉलर , यूरो ,चीनी (Renminbi ), जापानी (येन ) , ब्रिटिश ( पाउंड स्टर्लिंग ) इनको 2016 में शामिल किया गया |
नोट :- सभी मुद्राओं का मूल्य उसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार , जीडीपी इत्यादि की भूमिका के आधार पर होता है | इस प्रकार डॉलर का मूल्य ज्यादा है |
भारत तथा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष
भारत अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का संस्थापक सदस्य है | वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत का कोटा 2.4 4% है ,तथा 13 वां स्थान है | अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष प्रत्येक 5 वर्षों में अपने सदस्य देशों के कोटा की समीक्षा करता है |
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में कुल मिलाकर 24 अंशभूत है तथा भारत के 3 अंशभूत में भूटान, बांग्लादेश एवं श्रीलंका शामिल है |
भारत के वित्त मंत्री ( वर्तमान निर्मला सीतारमण ) IMF के बोर्ड ऑफ गवर्नर के पदेन गवर्नर होता है तथा भारतीय रिजर्व बैंक के (वर्तमान गवर्नर शक्तिकांत दास )इसके वैकल्पिक गवर्नर होते हैं |
वर्तमान में भारत के कार्यकारी निदेशक राकेश मोहन है जो भारत समेत श्रीलंका , बांग्लादेश भूटान का भी प्रतिनिधित्व करते हैं |
अंतरराष्ट्रीय निगरानी के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष आर्टिकल ऑफ एग्रीमेंट के तहत सदस्य देशों की आर्थिक स्थिति की समीक्षा वर्ष में एक बार करता है |जिसे सामान्यतः दो चरणों में बांटा जाता है |
इस प्रक्रिया के दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष मिशन , आरबीआई और केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों / विभागों के साथ विचार-विमर्श करता है ताकि देश की आर्थिक एवं मौद्रिक विकास की स्थिति के बारे में मूल्यांकन किया जा सके |
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जय हिंद ,जय भारत