कुलीन तंत्र शासन क्या है इसकी प्रमुख विशेषताए
कुलीन तंत्र
कुलीन तंत्र अंग्रेजी भाषा के Aristocracy या ग्रीक भाषा के अरिस्टक्रेटिया से लिया गया है । यूनानी भाषा का अरिस्टक्रेटिया ग्रीक भाषा के दो शब्दों अरिस्तोस तथा क्रेतोस के योग से बना है । अरिस्तोस अर्थात श्रेष्ठ या सबसे अच्छा व क्रेतोस अर्थात शासक । इस तरह से शब्द व्युत्पत्ति के आधार पर कुलीन तंत्र का अर्थ - श्रेष्ठ व्यक्तियों का शासन।
यूनानी दार्शनिक प्लेटो बुद्धिमानव के वर्ग को उच्च वर्ग कहता था और उन्ही बुद्धिमानों का शासन चाहता था | शासन के स्वरूप में राजनितिक सता समाज के अल्पवर्ग के हाथों में आ जाती है | अत: जब शासन संचालन की शक्ति कुछ लोगों के हाथ में होती है तो उस शासन को कुलीन तंत्र कहते है |
थॉमस हॉब्स ने अपनी पुस्तक लेवियाथन (1651) में कुलीन तंत्र का वर्णन करते हुवे कहा कि “ उस समय कुलीन तंत्र का पर्याय: जन सामान्य के एक छोटे से समुदाय का प्रतिनिधित्व तत्कालीन विधानसभा में होता था जनता का एक छोटा – सा भाग ही सरकार में प्रतिनिधित्व करता था ”|
अरस्तु के अनुसार –
" कुलीन तंत्र एक ऐसा शासन विद्यमान है जिसमे अच्छे नागरिक एंव अच्छे व्यक्तियों के गुणों में पूर्ण रूप से समानता होती है " |
कुलीन तंत्र की विशेषताए :-
- अरस्तु के अनुसार – कुलीन तंत्र में कानून की सर्वव्यापकता होती है |
- कुलीन तंत्र निर्माण के लिए तीन तत्व जन , सम्पति एंव योग्यता की अनिवार्यता एंव समन्वय अनिवार्य है |
- इसमें बुद्धि गुण व् संस्कृति के आधार पर राज्य व् संस्कार का संचालन किया जाता है |
- इसमें प्रौढ़ और अनुभव व्यक्तियों को ही राज्य और शासन संचालन का अधिकार दिया जाता है |
- प्लेटो के अनुसार यह बुद्धिमान व्यक्तियों का शासन है |
- कुलीन तंत्र का सबसे प्रबल तत्व धनिक तंत्र है |
- इसमें गणना की अपेक्षा गुणों पर अधिक बल दिया जाता है |
अरस्तु के अनुसार कुलीन तंत्र में क्रांति होने के कारण :-
निम्नलिखित कारण बताएं है जो इस प्रकार से है –
- इसमें शासकों की सता अत्यंत सीमित होती है |
- जन साधारण शासन और शासकों में ईर्ष्या करता है |
- ये अपने और शासक के बीच गुण व् चरित्र के आधार के आधार पर कोई अंतर नही कर पाते है |
- सामान्य जनता के साथ असमानता का व्यवहार किया जाता है लेकिन सामान्य जन प्रशासकीय वर्ग के व्यकित से अधिक योग्य व् प्रतिभा सम्पन्न होता है |
- शासक वर्ग का एक अंग युद्ध अथवा किसी अन्य कारण से अत्यधिक उग्र हो जाता है और वह सम्पति के विभाजन की मांग करता है |
कुलीन तंत्र के सकारात्मक एंव नकारात्मक पक्ष –
सकारात्मक पक्ष –
कुलीन तंत्र में गणना की अपेक्षा गुणों पर अधिक बल दिया जाता है | इसमें बुद्धि गुण एंव संस्कृति के आधार पर राज्य और सरकार का संचालन किया जाता है | इसमें यह मान लिया जाता है की राजनीतिक दायित्व का भार व्यय करने के लिए सभी व्यक्ति समान रूप से योग्य नही होते है | शासन करने की क्षमता केवल कुछ ही लोगों के पास होती है | यह राजतंत्र एंव लोकतंत्र के मध्य की शासन व्यवस्था है | इसमें स्थायित्व एंव संयम के तत्व पर्याप्त मात्रा में विद्यमान होते है | इस प्रकार के शासन में कानूनों की सर्वव्यापकता होती है |
नकारात्मक पक्ष :-
कुलीन तन्त्र का सर्वाधिक नकारात्मक पक्ष यह है कि यह आवश्यक नही है कि उच्च कुल अथवा अभिजात वर्ग में जन्मा प्रत्येक व्यक्ति शासन की योग्यता रखता हों | और यदि जन्म की बात छोड़कर केवल योग्यता के आधार पर ही सर्वश्रेष्ठ व्यक्तियों का शासन स्थापित करने का निर्णय किया जाए तो प्रश्न यह होगा कि श्रेष्ठ का चुनाव कौन करें | मानव समाज सर्वश्रेष्ठ कला चुनने से अनभिज्ञ है | अत: व्यवहार में कुलीन तंत्र परम्परागत अभिजात वर्ग का धनिकों का अथवा शक्तिशालीयों का शासन हो जाता है | जनता राजनीतिक शिक्षा से वंचित रह जाती है | यह शासन आधुनिक लोकतान्त्रिक विचारधारा के प्रतिकूल है |