भारत में बजट निर्माण की प्रक्रिया को समझाइए budget making process in india

 

भारत में बजट संबंधी प्रक्रिया
आधुनिक युग में हमारे देश में बजट की पद्धति का श्रीगणेश भारत के पहले वायसराय लॉर्ड केनिंग के कार्यकाल में हुआ
18 फरवरी 1860 को वायसराय की परिषद  में पहली बार बजट प्रस्तुत किया गया । ब्रिटिश वित्त मंत्री की परंपरा का अनुसरण करते हुए विल्सन ने अपने भाषण में भारत की वित्तीय स्थिति का बड़ा सुंदर विश्लेषण और सर्वेक्षण प्रस्तुत किया । अतः जेम्स विल्सन को भारत में बजट पद्धति का संस्थापक और जन्मदाता कहा जा सकता है ।

यहीं से प्रतिवर्ष देश की वित्तीय स्थिति का विवरण प्रस्तुत करने वाले बजट वायसराय की परिषद में उपस्थित किए जाने लगी किंतु इंग्लैंड का उपनिवेश होने के कारण इस बजट पर भारतीय जनप्रतिनिधियों को बहस करने का कोई अधिकार नहीं था ।
भारत की बजट संबंधी प्रक्रिया का विवेचन करते समय यह उल्लेखनीय है कि भारत में संपूर्ण देश के लिए केवल एक ही बजट नहीं होता है अनेक बजट होते हैं पूरे देश के लिए केंद्र सरकार एक बजट बनाती है इसके अतिरिक्त प्रत्येक राज्य अपने अलग - अलग बजट बनाते हैं ।
संघीय स्तर पर दो बजट होते हैं-  सामान्य बजट तथा रेलवे
: रेलवे बजट को 1921 से सामान्य बजट से अलग कर दिया गया । रेलवे के लिए अलग बजट पेश करने के पीछे मूल विचार यह है कि रेलवे द्वारा निश्चित अंशदान की व्यवस्था होने से सिविल अनुमानों में स्थिरता आए और रेलवे वित्त के प्रशासन में लचीलापन आए ।
: भारत में बजट निर्माण करने का जो उत्तरदायित्व है वित्त मंत्रालय को सौंपा गया है ।  वित्त मंत्री  जो कि मंत्री परिषद में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है , राष्ट्र के कोष का सरंक्षक  तथा देश की वित्तीय  नीति का कर्णधार माना जाता है ।

भारत में बजट प्रक्रिया की विभिन्न अवस्थाएं
बजट एक दिन का परिणाम नहीं होता है अपितु  इसकी प्रक्रिया वर्ष भर चलती रहती है । भारतीय बजट को मुख्य तक 5 चरणों से होकर गुजरना पड़ता है -
i)बजट की तैयारी
ii)संसद की स्वीकृति
iii) भारत में बजट की क्रियान्विति
iv)वित्तीय कोषों  का लेखांकन
v)लेखा परीक्षा
                 1.बजट की तैयारी
: भारत में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल को प्रारंभ होता है और 31 मार्च को समाप्त होता है । बजट अनुमान तैयार करने का कार्य आगामी वित्तीय वर्ष के आरंभ होने के साथ 8 माह पूर्व प्रारंभ होता है । बजट की रूपरेखा तैयार करने का सारा उत्तरदायित्व वित्त मंत्रालय का होता है किंतु इस कार्य में प्रशासनिक मंत्रालय , योजना आयोग , नियंत्रक महालेखा परीक्षक का भी हाथ रहता है । प्रशासनिक मंत्रालय उसके अधीनस्थ कार्यालय वित्त मंत्रालय को प्रशासनिक आवश्यकताओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है । योजना आयोग योजनाओं की प्राथमिकता के संबंध में मंत्रणा देता है और नियंत्रण महालेखा परीक्षक प्राक्कलन तैयार करने हेतु लेखा कौशल उपलब्ध कराता है ।

बजट अनुमान तैयार करने की शुरुआत वित्त मंत्रालय द्वारा जुलाई अथवा अगस्त माह में शुरू कर दी जाती है जब विभिन्न प्रशासनिक के मंत्रालयों विभागों को खर्च करने के लिए अनुमान लगाने के लिए एक प्रपत्र फॉर्म भेजता है जिसमें विभागाध्यक्ष इन छपे हुए निर्धारित प्रपत्र में स्थानीय कार्यालय को भेज देता है ।
                 2 संसद की स्वीकृति
अ) प्रस्तुतीकरण
सभी लोकतांत्रिक देशों में कार्यपालिका द्वारा तैयार किए जाने के बाद बजट संसद में विचार स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाता है । संसद में बजट प्रस्तुत करने का उत्तरदायित्व कार्यपालिका और मंत्रिमंडल का होता है । भारत में सामान्य बजट वित्त मंत्री द्वारा रेल बजट रेल मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया जाता है । बजट पेश करते हुए बजट भाषण दिया जाता है जो वास्तव में संसद में सबसे महत्वपूर्ण भाषणों में से एक होता है ।  लोकसभा में वित्त मंत्री का भाषण समाप्त होने पर बजट की एक प्रति राज्यसभा के पटल पर रखी जाती है उसके तुरंत पश्चात वित्त मंत्री वित्त विधेयक पेश करता है जिसमें सरकार के कराधान प्रस्ताव होते हैं उसके बाद सदन स्थगित हो जाता है और जिस दिन बजट पेश किया जाता है उस दिन बजट पर चर्चा नहीं की जाती यहां यह स्पष्ट करना उचित होगा कि सामान्य विधेयक तथा धन विधेयक में आधारभूत अंतर होता है । आम विधेयक में सरकार के लिए कुछ कार्यक्रम प्रस्तावित होते हैं जबकि धन विधेयक में ऐसे कार्यक्रमों को पूरा करने के लिए सरकार को धनराशि खर्च करने का अधिकार दिया जाता है । इस कारण भारतीय संविधान के अनुच्छेद 109 से 117 तक धन विधेयक के सम्बंध में  प्रावधान दिए गए ।
ब)बजट पर सामान्य चर्चा
लोकसभा के कार्य संचालन नियम संख्या 207 (1)(2) में बजट प्रस्तुतीकरण के कुछ दिन पश्चात सामान्य चर्चा का दिशानिर्देश करते हुए कहा गया कि सदन को इस बात की अनुमति होगी कि वह संपूर्ण बजट अथवा उसमें स्थापित सिद्धांत के किसी प्रश्न के बारे में विचार विमर्श कर सकें , परंतु इस समय कोई प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया जाएगा,  नहीं सदन में बजट पर मतदान किया जाएगा ।
स) विभागों से संबंधित स्थाई समितियों द्वारा बजट की समीक्षा करवाई जाती है ।
द) अनुदान मांगों पर ब्यौरे- वार चर्चा तथा मतदान किया जाता है ।  अलग-अलग मंत्रालयों के लिए क्रमवार अनुदान मांगे एवं प्रस्ताव के रूप में लोकसभा के समक्ष प्रस्तुत की जाती है ।

य)  मतदान प्रक्रिया
भारतीय संसद में कुल 26 दिनों के भीतर अनुदान मांगों को पास करने की परंपरा है।
      3 . भारत में बजट की क्रियान्विति

केंद्रीय बजट जब संसद द्वारा पारित कर दिया जाता है तब फिर से लागू करने की कार्रवाई प्रारंभ होती है । इस प्रक्रिया में मुख्यतः दो सिद्धांतों का पालन किया जाना आवश्यक है पहला -  बजट क्रियान्वयन विनियोग अधिनियम के अनुरूप होना चाहिए
दूसरा - बजट  क्रियान्वयन से  संबंधित सरकारी मशीनरी पूर्ण निष्ठा तथा कुशलता से कार्य करने को प्रेरित होनी चाहिए ।
इन सिद्धांतों के परिप्रेक्ष्य में बजट के  क्रियान्वयन में पांच  प्रक्रिया सम्मिलित की जाती है जो निम्न है -
वित्तीय स्रोतों का एकत्रीकरण
-एकत्रित साधनों का रक्षण
-वित्तीय साधनों का वितरण
-सरकारी आय व्यय का लेखा
-अंकेक्षण तथा प्रतिवेदन
बजट  क्रियान्वयन की इन  अवस्थाओं की विस्तृत रूपरेखा के संदर्भ में हमारे प्रशासनिक तंत्र की कुशलता तथा निष्ठा का मूल्यांकन किय जा सकता है ।
         4 वितीय कोषों का लेखांकन -
बजट की क्रियान्वयन में लेखांकन का अत्यधिक महत्व है । भारत में लेखांकन को कार्यपालिका से अलग करके उसके लिए लेखा तथा अंकेक्षण  विभाग की  अलग स्थापना की गई है । नियंत्रक  तथा भारत का महालेखा परीक्षक इसका मुख्या  होता है । महालेखापाल उसे लेखांकन कार्य में सहायता करते हैं । रेलवे को छोड़ प्रत्येक केंद्रीय नागरिक विभाग के लिए एक महालेखापाल होता है तथा प्रत्येक राज्य में भी इनका एक पद होता है । लेखांकन के सामान्य नियम भारत के लेखा परीक्षक द्वारा प्रदान किए जाते हैं ।
इन नियमों के अनुसार लेखाओं  की तैयारी चार स्तरों पर संपादित होती है -
i) प्रारंभिक लेखा इंद्राज  उस कोषागार  स्तर पर होती है जहां किसी प्रकार का लेनदेन होता है ।
ii) व्यय शीर्षो  के अनुसार सभी लेन- देनों का ब्यौरे-वार वर्गीकरण
iii)लेखा अधिकारियों द्वारा लेखों  का मासिक संकलन ,तथा 
iv)भारत के महालेखा परीक्षक द्वारा लेखों का वार्षिक संकलन
                    5 लेखा परीक्षा
प्रत्येक माह की पहली  तारीख तक गत माह के हिसाब किताब महालेखाकार कार्यालय में पहुंच जाते हैं जहां प्राप्तियों  तथा खर्चों का लेखा शीर्ष  के अनुसार वर्गीकरण होता है । इस प्रकार के वर्गीकरण से पूरे देश भर की लेखा पद्धति में समानता स्थापित करने तथा बजट संबंधी पूर्वानुमान लगाने में काफी सुविधा रहती है ।
महालेखाकर के कार्यालय स्तर पर भारत सरकार की ओर से निम्न चार शीर्षो में प्रमुखतया  लेखा सूचनाएं संकलित की जाती है  -
राजस्व खाता , पूंजीगत खाता , ऋण खाता , दूरस्थ प्राप्तियाँ
भारत में नियंत्रक तथा महालेखा परीक्षक द्वारा लेखों का वार्षिक आधार पर संकलन किया जाता है तथा उनके द्वारा वित्तीय लेखें , विनियोजन लेखें  तथा अपनी अंकेक्षण  रिपोर्ट  राज्य के राज्यपाल अथवा देश के राष्ट्रपति को प्रस्तुत की जाती है , जो कि प्रतिवर्ष संसद के बजट सत्र के समय संसद के समक्ष प्रस्तुत की जाती है । वित्तीय प्रशासन के क्षेत्र में कार्यपालिका द्वारा बजट का प्रस्तुतीकरण व्यवस्थापिका द्वारा उसे पास करने की प्रक्रिया तथा सरकारी आय - व्यय लेखों की सुव्यवस्थित व्यवस्था से जुड़ी प्रक्रियाओं का महत्वपूर्ण स्थान होता है  । स्वस्थ लोकतंत्रीय   व्यवस्था में यह क्रियाएं नागरिक हितों की संवर्द्धके होती है  तथा प्रशासकों को इस बात का एहसास कराती रहती है कि  लोकसत्ता ही सर्वोपरि है एंव उन्हें अपने क्रिया-कलापों के लिए  जनप्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेह होना पड़ता है ।

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