सरकार के रूप - एकात्मक और संघात्मक शासन व्यवस्था
इस लेख मे एकात्मक शासन के बारे मे बताया गया है |
सरकार
सरकार कुछ निश्चित व्यक्तियों का समूह होती है जो राष्ट्र तथा राज्य में निश्चितकाल के लिए निश्चित पद्धति द्वारा शासन करती है ।
सरकार के रूपों में राजतंत्र , कुलीन तंत्र , अधिनायक तंत्र और लोकतंत्र प्रमुख है ।
लोकतंत्र शासन के कई रूप हैं - एकात्मक व संघात्मक शासन संसदात्मक व अध्यक्षात्मक शासन।
एकात्मक शासन
वह शासन प्रणाली जिसमें शासन की संपूर्ण शक्तियों संविधान द्वारा एक केंद्रीय सरकार में से केंद्रित होती है उसे एकात्मक शासन कहते हैं ।
एकात्मक शासन अर्थ परिभाषा
एकात्मक शासन में संविधान द्वारा राज्य की संपूर्ण शक्ति केंद्र सरकार में निहित होती है । सारे राज्य में शासन की एक ही इकाई होती है । समस्त शासन का सूत्र केंद्र के अधीन रहता है ।
प्रादेशिक व स्थानीय सरकारें भी केंद्र सरकार की इच्छा पर ही निर्भर रहती है ।
ब्रिटेन , इटली , जापान , बेल्जियम आदि देशों में एकात्मक शासन प्रणाली विद्यमान है ।
एकात्मक शासन की परिभाषाएं
विभिन्न विद्वानों ने एकात्मक शासन की परिभाषाएं इस प्रकार से दी है -
* डॉक्टर गार्नर के अनुसार -
" एकात्मक सरकार वह प्रणाली है जिसमें संविधान द्वारा शासन की संपूर्ण शक्ति एक अथवा एक से अधिक अंगों को प्रदान की जाती है और स्थानीय सरकारी अपनी सत्ता , स्वायत्तता तथा अपना अस्तित्व भी उसी से प्राप्त करती है । "
" एक केंद्रीय शक्ति के द्वारा सर्वोच्च विधायी शक्ति का प्रयोग किया जाना एकात्मक सरकार है " ।
" एकात्मक राज्यों में शासन के सब अधिकार मौलिक रूप से एक केंद्रीय सरकार के हाथ में रहते हैं । यह सरकार की इच्छा अनुसार जैसे वे उचित समझती है उन शक्तियों का वितरण क्षेत्रीय इकाइयों में करती है "।
" एकात्मक राज वह राज्य है जिसमें समस्त सत्ता एवं शक्ति का एक केंद्र में निहित है और जिसकी इच्छा एवं जिसके अधिकार समस्त क्षेत्र पर कानूनन सर्वशक्तिमान होते हैं " ।
एकात्मक शासन के लक्षण
एकात्मक शासन के लक्षण निम्नलिखित है -
* एकात्मक शासन से पूरी राज्य में एक ही सरकार होती है । सत्ता का स्वरूप केंद्रीय सरकार होती है ।
* इस शासन व्यवस्था में प्रशासनिक सुविधा के लिए राज्य को अन्य इकाइयों में बांट दिया जाता है । जैसे राज्य , प्रान्त, प्रदेश, कम्यून व विभाग ।
* केंद्रीय सरकार तथा स्थानीय सरकारों के बीच शासन की शक्तियों का संविधान द्वारा विभाजन एवं वितरण नहीं किया जाता है ।
* स्थानीय अधिकारी केंद्रीय शासन के अंग होते हैं । वे केंद्रीय शासन के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं । प्रादेशिक व स्थानीय सरकारी केंद्रीय सरकार की प्रतिनिधि सरकारें होती है ।
* एकात्मक शासन वाले देशों का संविधान लिखित, अलिखित , लचीला या कठोर कैसा भी हो सकता है ।
एकात्मक शासन के गुण
* प्रशासन में एकरूपता
एकात्मक शासन का सबसे बड़ा गुण यह है कि समस्त देश में एक ही सरकार होती है । समान कानून से शासित होने के फलस्वरुप संपूर्ण देश में प्रशासन की एकरूपता बनी रहती है
* सरल शासन व्यवस्था
यह शासन प्रणाली अत्यंत सरल है । शासन की समस्त शक्तियां केंद्रीय सरकार में निहित रहने से सारे प्रशासनिक निर्णय आसानी से हो जाते हैं । केंद्रीय सरकार आवश्यकताअनुसार शासन में किसी भी प्रकार का परिवर्तन कर सकती है ।
* संघर्ष रहित शासन व्यवस्था
एकात्मक शासन संघर्ष रहित ढंग से सुगमता के साथ चलता रहता है । केंद्र और उसकी इकाइयों के मध्य उत्तरदायित्वों को लेकर झगड़े की स्थिति उत्पन्न नहीं होती है क्योंकि सभी इकाइयां केंद्र सरकार के अधीन होती है उन्हें केंद्र का निर्णय मानना पड़ता है इसलिए संघर्ष की संभावना नहीं रहती है ।
* कुशल व दृढ़ शासन
इस शासन व्यवस्था में शक्ति का केंद्रीकरण होने के कारण प्रशासन का संपूर्ण उत्तरदायित्व केंद्रीय सरकार का होता है । नीतियों का निर्धारण तथा शासन का संचालन एक ही स्थान से होता है । इसलिए केंद्र सरकार निर्णय लेने तथा इसके क्रियान्वयन में पूर्ण स्वतंत्रता के साथ कार्य करती है । केंद्र सरकार के सबल और सशक्त होने के कारण शासन में दृढ़ता एवं कुशलता आ जाती है ।
* मितव्ययता
यह शासन प्रणाली मितव्ययी है । एकात्मक शासन में समस्त देश के लिए एक ही कार्यपालिका एवं व्यवस्थापिका होती है । केंद्रीय और प्रांतीय सरकारों के लिए दोहरे कर्मचारियों को नियुक्त करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है । अतः यह शासन प्रणाली अन्य शासन प्रणाली की तुलना में कम खर्चीली होती है ।
* लचीलापन
लचीलेपन का सम्बंध इस शासन व्यवस्था में सविंधान संसोधन से है । इस शासन प्रणाली में शक्तियों का विभाजन नहीं होने के कारण समय और परिस्थिति के अनुसार संविधान में सरलता से संशोधन किया जा सकता है ।
* राष्ट्रीय एकता
एकात्मक शासन व्यवस्था राष्ट्रीय एकता की वृद्धि में सहायक होती है । शासन की एकात्मकता के कारण संपूर्ण देश के लिए एक से कानून होते हैं , एक ही सरकार से क्रियान्वित भी होती है , और एक ही सरकार की न्याय व्यवस्था होती है , संपूर्ण राज्य में प्रशासन का एक सा ढांचा रहता है । समान व्यवस्था के कारण नागरिकों में देश के प्रति प्रेम , भक्ति , श्रद्धा और निष्ठा की भावना बलवती रहती है ।
* संकटकाल में अधिक उपयुक्त
क्योंकि युद्ध , सशस्त्र विद्रोह , संकटकालीन स्थिति या कुछ अन्य प्रकार की असाधारण परिस्थितियों में दृढ़तापूर्वक शीघ्र निर्णय करने और उन्हें कार्य रूप में परिणत करने की आवश्यकता होती है । ऐसा एकात्मक शासन में ही संभव है क्योंकि इसमें शासन की समस्त शक्तियां केंद्र सरकार के अधीन रहती है ।
भारत के संदर्भ में इसी बात को दृष्टि में रखकर भारतीय संविधान के अंतर्गत संकटकाल के समय संघात्मक शासन को एकात्मक शासन में परिवर्तन करने की व्यवस्था की गई है ।
* सुदृढ़ विदेश नीति
एकात्मक शासन में केंद्रीय सरकार की नीतियां एवं उनके क्रियान्वयन में एकरूपता रहने से अंतरराष्ट्रीय मामलों में शीघ्र निर्णय किये जा सकते हैं ।
एकात्मक शासन के दोष
एकात्मक शासन के दोष निम्नलिखित है -
* केंद्रीय सरकार के निरंकुश होने का भय -
शक्तियों का केंद्रीकरण निरंकुशता की प्रवृत्ति को बढ़ावा देता है । इस शासन व्यवस्था में सरकार के निरंकुश व तानाशाह होने का भय बना रहता है तथा शासकों के भ्रष्ट होने की संभावना रहती है ।
*प्रशासनिक दक्षता का अभाव
शक्तियों का केंद्रीकरण से केंद्रीय सरकार का कार्यभार अत्यधिक बढ़ जाता है । इस कारण राज्य के दूरस्थ निवास करने वाले नागरिकों की समस्याओं तथा आवश्यकताओं को भलीभांति समझ कर कुशलतापूर्वक उन का निदान कर पाना संभव नहीं होता है ।
* नौकरशाही का शासन
इस शासन व्यवस्था में केंद्रीय सरकार का कार्य भार बढ़ने से उसे सरकारी कर्मचारियों पर निर्भर रहना पड़ता है । शासन की शक्ति सरकारी कर्मचारियों के हाथों में केंद्रित हो जाती है और नौकरशाही का आधिपत्य हो जाता है । इस शासन व्यवस्था में जनता को शासन के कार्यों में भाग लेने के अवसर कम मिलने के कारण प्रशासन पर नौकरशाही हावी रहती है ।
* लोकतंत्र विरोधी
लोकतंत्र की सफलता के लिए शक्तियों का विकेंद्रीकरण होना आवश्यक है , जिसमें स्थानीय स्वशासन की इकाइयों को पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान की जाती है । एकात्मक शासन में स्थानीय स्वशासन की इकाइयों को केंद्र पर निर्भर रहना पड़ता है जिससे उनकी स्वतंत्रता का अपहरण हो जाता है ।
* विशाल राज्यों के लिए अनुपयुक्त
जो देश जनसंख्या तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से विशाल है तथा भाषा , नस्ल , धर्म और संस्कृति की विविधता लिए हुए हैं , वहां पर एकात्मक शासन का सफल संचालन संभव नहीं है । विविधताओं वाले विशाल राज्यों के लिए संघात्मक शासन व्यवस्था उपयुक्त होती है ।
*जनता की उदासीनता
एकात्मक शासन व्यवस्था में जनता को शासन संबंधी कार्यों में सहभागिता निभाने का अवसर नहीं मिलता है । जनता की राजनीतिक मामलों में सक्रिय भूमिका नहीं होने से उसकी राजकीय कार्यों के प्रति रुचि कम हो जाती है और वह उदासीन हो जाती है ।
* स्थानीय स्वशासन की उपेक्षा
शक्तियों का केंद्रीकरण से स्थानीय संस्थाओं पर्याप्त शक्ति के अभाव में कार्य सही रूप में नहीं कर पाती । उन्हें विकास के समुचित अवसर प्राप्त नहीं होते हैं ।
धन्यवाद ।