आतंकवाद का अर्थ , आतंकवाद का स्वरूप , कारण , भारत मे आतंकवाद का इतिहास
आतंकवाद
आतंकवाद अंग्रेजी भाषा के शब्द Terrorism का हिंदी रूपांतरण है । Terrorism शब्द की उत्पत्ति लेटिन भाषा के शब्द Terror से हुई है जिसका अर्थ होता है - भय या डर ।
इस प्रकार आतंकवाद भय पर आधारित एक गैर कानूनी गतिविधि है जिसमें हिंसक साधनों का प्रयोग कर दबाव पूर्ण तरीके से अपने संकीर्ण उद्देश्यों को पूरा करने का प्रयत्न किया जाता है ।
भय + शस्त्र + विचारधारा = आतंकवाद
आतंकवाद एक ऐसी नकारात्मक विचारधारा है जो अपने संकीर्ण हितों को पूरा करने के लिए हिंसात्मक गतिविधियों में विश्वास करती है ।
आतंकवाद के प्रमुख लक्षण
आतंकवाद के कारण
आतंकवाद के परिणाम
भारत में आतंकवाद का इतिहास
आगामी जापू फिजो नागा नेशनल काउंसिल को भारत का प्रथम आतंकवादी संगठन माना जाता है ।
इस संगठन के माध्यम से नागा विद्रोहियों ने नागालैंड को भारत से अलग करने के लिए आतंकी गतिविधियों का सहारा लिया था । पंजाब में खालिस्तानी नामक अलग देश की मांग करना , इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या करना, संसद भवन पर आतंकी हमला , मुंबई में ताज होटल पर हमला इत्यादि भारतीय इतिहास की प्रमुख घटनाएं हैं ।
1990 के दशक में असम में " उल्फा व बोडो " प्रमुख आतंकी संगठन के रूप में उभरे ।
मणिपुर में " पीपुल्स रिवॉल्यूशनरी पार्टी " त्रिपुरा में "त्रिपुरा उपजाति युवा समिति " और "नेशनल वालंटियर " मेघालय में खांसी तथा " जयन्तिया लिबरेशन आर्मी " अन्य प्रमुख आतंकी संगठन हैं ।
इसी प्रकार तमिलनाडु में " लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम " एक प्रभावकारी आतंकी संगठन रहा है। इसका प्रभाव श्रीलंका तक रहा है ।
वस्तुतः भारत में आतंकी घटनाओं में बीसवीं सदी के अंतिम दशक से तीव्र वृद्धि देखने को मिली , जब भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर द्वारा गुटनिरपेक्षता की नीति मैं झुकाव प्रदर्शित किया ।
इस घटना के बाद तालिबान जैसे मध्य एशियाई देशों की आतंकी संगठनों ने भारत में आतंकी हमलों की बारंबारता को बढ़ा दिया ।
समय-समय पर भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस तथ्य को लक्ष्यों के साथ उठाया है किंतु वैश्विक पटल पर गुटबंदी के कारण भारत इस संबंध में अधिक सफल नहीं हो पाया है । इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि भारत ने 1970 के दशक में संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद की वैश्विक परिभाषा तय करने का प्रस्ताव रखा था जो अभी तक लंबित है ।
आतंकवाद को समाप्त है करने हेतु सुझाव
आतंकवाद और धर्म
कई बार आतंकवाद को एक धर्म विशेष से जोड़कर देखा जाता है , किंतु आतंकवाद और धर्म परस्पर अलग-अलग है । आतंकवादियों द्वारा अपनी-अपनी गैरकानूनी गतिविधियों को तर्कसंगत सिद्ध करने के लिए धर्म का अनुचित सहारा लिया जाता है ।
इसके पीछे प्रमुख कारण आतंकवादियों द्वारा एक वर्ग विशेष का समर्थन प्राप्त करना होता है । साथ ही दूसरे वर्ग के प्रति द्वेष भाव उत्पन्न करना होता है ।
कई बार राजनीतिक दलों द्वारा वोट बैंक की राजनीति के लिए समाज में इस प्रकार की संकीर्ण गतिविधियों को प्रश्रय दिया जाता है ।
किंतु एक जिम्मेदार और सुशिक्षित नागरिक होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि धर्म और आतंकवाद को अलग-अलग देखा जाए ।
वस्तुत आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है और कोई धर्म आतंकवाद का समर्थन नहीं लगता है ।