राजनीतिक समाजीकरण
राजनीतिक समाजीकरण , राजनीति व सामाजिकरण नामक दो शब्दों से मिलकर बनी एक अवधारणा है ।
समाजीकरण :-
सामाजिकरण समाज में निरंतर चलने वाली एक प्रक्रिया है । जिसके माध्यम से व्यक्ति समाज के रीति-रिवाजों , परंपराओं मूल्यों एवं मान्यताओं अर्थात समाज की संस्कृति को अंगीकार कर उसका क्रियाशील सदस्य बनता है । प्रत्येक समाज अपनी संस्कृति के अनुरूप बालक को बोलना , अभिवादन करना , पूजा पद्धति , पहनावा एवं खानपान की आदतें सिखाता है । जब वह इनके अनुकूल आचरण करने लगता है तो इसी प्रक्रिया को सामाजिकरण कहते हैं । जिसके द्वारा बालक मानव समाज से उस विशेष समाज का सदस्य बनता है ।
सामाजिकरण का तात्पर्य - मूल्यों को सीखने और अंगीकार करने की प्रक्रिया से है ।
राजनीतिक समाजीकरण :-
राजनीतिक समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति में राजनीतिक समझ विकसित होती है । साथ ही राजनीतिक जीवन और पद्धति के प्रति उसके दृष्टिकोण का विकास होता है ।
दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि राजनीतिक समाजीकरण , राजनीतिक संस्कृति को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरित करने का एक साधन है । वास्तव में राजनीतिक व्यवस्था के सुचारू संचालन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है ।
प्रत्येक राजनीतिक व्यवस्था में कुछ आदर्श होते हैं । जैसे :- भारत का आदर्श लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं स्वतंत्र समाज है । अतः भारत में राजनीतिक समाजीकरण द्वारा नागरिकों को और लोकतंत्र एवं स्वतंत्र समाज के प्रति निष्ठावान बनाने का प्रयास किया जाएगा । वहीं साम्यवादी चीन का आदर्श साम्यवादी व्यवस्था एवं बंद समाज से है । इसलिए चीन के नागरिकों को राजनीतिक समाजीकरण के माध्यम से इसी के अनुरूप बनाने का प्रयास किया जाएगा ।
राजनीतिक समाजीकरण की अवधारणा की सर्वप्रथम व्याख्या हरर्बट साइमन ने की थी । इसके अतिरिक्त इस अवधारणा की व्याख्या आमण्ड व पावेल , कावनाद्य एंव ईस्टन ने की थी ।
हरर्बट साइमन ने अपनी पुस्तक पॉलीटिकल सोशलाइजेशन में इस अवधारणा के अनेक पक्षों पर प्रकाश डाला है ।
हरर्बट साइमन :-
राजनीतिक सामाजिकरण जो संपूर्ण ज्ञान की प्रक्रिया का अंग है । उससे उस प्रक्रिया का बोध होता है , जिसके माध्यम से राजनीतिक व्यवस्था के संबंध में ज्ञान की प्राप्ति होती है । इस ज्ञान के अंतर्गत व्यक्तियों , घटनाओं , नीतियों और आवश्यकताओं से जुड़ा हुआ ज्ञान शामिल है ।
आमण्ड एंव पावेल :-
" राजनीतिक समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से राजनीतिक संस्कृति में प्रवेश करवाया जाता है तथा उनकी राजनीतिक उद्देश्यों के प्रति अभिप्रेरणाओं को बनाया जाता है ।
कावनाद्य के अनुसार :-
" राजनीतिक सामाजिक वह शब्द है जो इस प्रक्रिया का वर्णन करता है जिस प्रक्रिया के माध्यम से व्यक्ति राजनीति से संबंधित अपना ज्ञान प्राप्त करता है " ।
राजनीतिक समाजीकरण का उद्देश्य :-
राजनीतिक समाजीकरण का उद्देश्य व्यक्तियों को अपनी राजनीतिक व्यवस्था की शिक्षा प्रदान करना एवं विकसित करना । जिससे वे राजनीतिक व्यवस्था के सुचारू संचालन में सहयोग कर सकें ।
राजनीतिक समाजीकरण के साधन या अभिकरण :-
राजनीतिक समाजीकरण के कुछ साधन औपचारिक और कुछ साधन अनौपचारिक होते हैं ।
1.परिवार :-
परिवार बालक की प्रथम पाठशाला मानी जाती है । जिसमें बालक पारिवारिक , रीति - रिवाजों एवं परंपराओं के साथ सहयोग पारस्परिक निर्भरता , राजनीतिक क्रियाओं का भी पाठ सीखता है । सामान्यतः चुनावी अनुभव यह बताते हैं कि परिवार का मुखिया जिस राजनीतिक दल का समर्थक होता है , परिवार के अन्य सदस्य भी उसका अनुसरण करते हैं । इस प्रकार राजनीति के प्रति प्रारंभिक समझ का विकास परिवार के माध्यम से होता है ।
2.शिक्षण संस्थाएं :-
शिक्षण संस्थाएं राजनीतिक समाजीकरण का एक प्रमुख साधन है । इसमें बालक अन्य साथियों के साथ अनुकूलन करने की आवश्यकता से बालक राजनीतिक व्यवस्थाओं की विविधताओं और विरोधाभाषों के साथ समायोजन करना सीखता है । राजनीतिक समाजीकरण में विद्यार्थियों पर शिक्षण संस्थाओं के पर्यावरण , वातावरण , पाठ्यक्रम या शिक्षकों का प्रभाव पड़ता है ।
3. राजनीतिक दल :-
राजनीतिक दल अपनी नीतियों , विचारधाराओं और कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिकरण का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं । यद्यपि लोकतांत्रिक देशों एंव साम्यवादी , सर्वाधिकारवादी राज्यों में राजनीतिक दलों की भूमिका अलग - अलग होती है । जैसे सर्वाधिकारवादी राज्यों में समाजीकरण के साधनों पर राज्य का कठोर नियंत्रण रहता है , जबकि लोकतांत्रिक राज्य में राजनीतिक दलों की बहुलता होती है ।एवं वे स्वतंत्रता पूर्वक अपने - अपने विचारों के अनुरूप समाजीकरण के लिए स्वतंत्र होते हैं ।
4. राष्ट्रीय प्रतीक :-
विभिन्न राजकीय प्रतीक जैसे राष्ट्रीय ध्वज , राष्ट्रीय गीत , राष्ट्रीय दिवस , समारोह , सेना परेड आदि के माध्यम से राजनीतिक व्यवस्था तथा राजनीतिक आदर्शों के प्रति नागरिकों में आस्था का भाव पैदा किया जाता है ।
5. जनसंचार के साधन :-
राजनीति ज्ञान तथा विचारों को बढ़ाने में जनसंचार के साधनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है । वर्तमान समय में समाचार-पत्र , टेलीविजन , रेडियो , सोशल मीडिया आदि जनसंचार के प्रमुख साधन है । जो चुनाव के दौरान जनमत को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ।