प्लेटो का Theory Of Communism || साम्यवाद का सिद्धांत

साम्यवाद का सिद्धान्त (Theory of Communism )

प्लेटो ने अपने आदर्श में न्याय की प्राप्ति के लिए जो दो तरीके अपनाए हैं, उनमें से साम्यवाद का निषेधात्मक व भौतिक तरीका भी शामिल है। प्लेटो का मानना है कि आदर्श राज्य की स्थापना में तीन बाधाएँ अज्ञान, निजी सम्पत्ति व निजी परिवार है। इन बाधाओं को दूर करने के लिए प्लेटो शिक्षा का सिद्धान्त व साम्यवादी व्यवस्था का प्रावधान करता है। अज्ञान को तो शिक्षा द्वारा दूर किया जा सकता है लेकिन निजी सम्पति परिवार की संस्था का लोप करने के लिए वह जिस व्यवस्था का समर्थन करता है, वह साम्यवाद के नाम से जानी जाती है। प्लेटो का साम्यवाद राजनीतिक सत्ता तथा आर्थिक लोलुपता के सम्मिश्रण से उत्पन्न बुराई को दूर करता है। प्लेटो साम्यवाद के द्वारा अभिभावक या संरक्षक वर्ग को सम्पत्ति तथा पारिवारिक जीवन की चिन्ताओं से मुक्त रखना चाहता है। इस सिद्धान्त को प्रतिपादित करने के पीछे प्लेटो का उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से निःस्वार्थी शासकों को तैयार करने के बाद भी सांसारिक आकर्षणों और चारित्रिक दुर्बलताओं के शिकार होकर अपने कर्तव्य पथ से भटकने को रोकना है। प्लेटो साम्यवाद को समाज का आध्यात्मिक उत्थान करने का नकारात्मक मार्ग कहता है वह इसे व्यक्ति के उत्थान का भौतिक साधन मानता है। प्लेटो का मानना है कि कांचन और कामिनी का मोह संरक्षक वर्ग को धनलोलुप, स्वार्थी और आरक्त बना देता है। अतः संरक्षक वर्ग को अपने कर्तव्य पथ से विचलित होने से रोकना अति आवश्यक है। इसके लिए वह सम्पत्ति और पत्नियों का साम्यवाद का सिद्धान्त पेश करता है। इसके बारे में बार्कर ने कहा है- “साम्यवाद आत्मिक सुधार का केवल एक भौतिक व आर्थिक अनुपूरक साधन है, जिसे सर्वप्रथम तथा सर्वाधिक महत्त्व देते हुए प्लेटो लागू करना चाहता है ।

साम्यवाद का अर्थ (Meaning of Communism)

 
 प्लेटो का मानना है कि सैनिक और शासकों के लिए आदर्श राज्य में न तो अपना परिवार या घर होना चाहिए न ही निजी सम्पत्ति अपने इस उद्देश्य या विचार को सकारात्मक रूप देने के लिए प्लेटो ने जिस विस्त त योजना का निर्माण किया है, उसे ही प्लेटो का साम्यवाद या प्लेटो का साम्यवादी सिद्धान्त  कहा जाता है। प्लेटो का कहना है कि संरक्षक या अभिभावक वर्ग के सदस्य विवाह करने और निजी परिवार बसाने के अधिकार से वंचित रहेंगे पतियों, पत्नियों तथा बच्चों पर एक व्यक्ति या परिवार का अधिकार न होकर, सम्पूर्ण समाज या राज्य का अधिकार रहेगा। सभी को उसमें साँझा अधिकार प्राप्त होगा । अच्छी संतान या योग्य सन्तान पैदा करने के लिए योग्य पुरुष व स्त्री का संयोग कराया जाएगा, संरक्षक वर्ग के सदस्य निजी सम्पत्ति से भी वंचित रखे गए हैं। प्लेटो के अनुसार समस्त सम्पत्ति (चल व अचल) राज्य के नियन्त्रण में ही रहेगी। प्लेटो की योजना के अनुसार सभी सैनिकों व शासकों को (अभिभावक या संरक्षक वर्ग) बैरकों में रखना होगा और उन्हें साथ-साथ भोजन करना होगा। उत्पादक वर्ग अपनी पैदावार का कुछ हिस्सा उन्हें दे देगा ताकि उनकी अनिवार्य आवश्यकताएँ पूरी हो सकें। सामूहिकता की जीवन-व्यवस्था को प्लेटो ने पत्नियों व सम्पत्ति को साम्यवाद का नाम दिया है।

प्रेरणा खोत (Sources of Inspiration)


प्लेटो की साम्यवादी विचारधारा कोई नवीन तथा मौलिक विचारधारा नहीं है। प्लेटो से पहले भी यूनान में साम्यवाद के बीज विद्यमान थे एथेन्स में 5 वीं शताब्दी ई. पूर्व में ही साम्यवाद के दर्शन होते हैं एथेन्स में राज्य का व्यक्तिगत सम्पत्ति पर नियन्त्रण था। स्पार्टा में स्त्रियों को राज्य हित की द ष्टि से शासन संचालन का भार सौंप दिया जाता था, बालकों को 7 वर्ष की आयु के बाद राज्य को सौंप दिया जाता था। स्पार्टा में सार्वजनिक जलपान ग ह तथा भोजनालयों की व्यवस्था थी। स्पार्टा के नागरिक अपनी उपज का एक भाग सामूहिक भोजनालयों में भेजते थे क्रीट नामक नगर में सामूहिक खेती की जाती थी। एथेन्स के नगर में भी राज्य की अपनी जंगलात व खानें थीं। एथेन्स में पाइथागोरस का मत था "मित्रों की सम्पत्ति पर समान रूप से सबका अधिकार है।" यह साम्यवादी विचार था यूरीपाइडीज नामक विचारक ने भी प्लेटो से पहले ही स्त्रियों के साम्यवाद के सिद्धान्त का प्रतिपादन कर दिया था, हिरोडोटस ने अगथीसियन्ज की चर्चा में नारियों की साम्यवादी प्रथा का वर्णन किया है।

प्लेटो के साम्यवादी विचारों पर तत्कालीन परिस्थितियों का गहरा प्रभाव पड़ा है। प्लेटो के काल में सम्पतिशालियों के हित में शासन का संचालन होता था, शोषण प्रथा प्रचलित थी एवं आर्थिक तत्त्व राजनीतिक वातावरण पर प्रभावी थे प्लेटो के युग में महिलाओं की दशा काफी दयनीय थी। सामाजिक क्षेत्र में उनकी भूमिका नगण्य थी। उन्हें चारदीवारी तक ही सीमित कर दिया गया था। उनका कर्त्तव्य पति की कामवासना की तप्ति, संतानोत्पत्ति व उनके पालन पोषण तक ही सीमित था । प्लेटो नारियों की दुर्दशा से चिन्तित था इसलिए उसने नारी उत्थान के लिए पत्नियों के साम्यवाद का सिद्धान्त पेश किया।

प्लेटो के साम्यवाद की विशेषताएँ(Features of Plato's Communism )

प्लेटो की सम्पत्ति व पत्नियों से सम्बन्धित साम्यवाद की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं :

1. अर्ध-साम्यवाद (Half Communism) प्लेटो की साम्यवादी व्यवस्था समाज के केवल एक वर्ग (शासक वर्ग) पर लागू होती है; उत्पादक वर्ग पर नहीं। इसमें संरक्षक वर्ग सम्पत्ति और कुटुम्ब से अछूता रहेगा, उत्पादक वर्ग को अपनी सम्पत्ति व परिवार रहेंगे इसलिए इसे अर्ध-साम्यवाद की संज्ञा दी जाती है।

2. न्याय की पूरक व्यवस्था (Supplementary to Justice) प्लेटो के न्याय सिद्धान्त का प्रमुख उद्देश्य आदर्श राज्य की स्थापना करना है। प्लेटो ने न्याय सिद्धान्त की व्यावहारिकता के लिए दो साधनों शिक्षा एवं साम्यवाद को अपनाया है। शिक्षा योजना न्याय की प्राप्ति का आध्यात्मिक व सकारात्मक साधन है यही साम्यवादी योजना न्याय की प्राप्ति का भौतिक व नकारात्मक तरीका है।

3. अभिजातवादी (Aristocratic) प्लेटो केवल उच्च वर्ग को ही साम्यवादी व्यवस्था के अन्तर्गत रखता है। यह व्यवस्था केवल शासक वर्ग के लिए है. साम्यवाद का प्रयोजन केवल थोड़े शासकों के जीवन को नियन्त्रित करना है ताकि वे सामाजिक हित के कार्य निर्वाध रूप से पूरे कर सकें। अतः प्लेटो का साम्यवाद 'बौद्धिक अल्पतन्त्र' के शासन की स्थापना करता है।

4. राजनीतिक (Political) प्लेटो का साम्यवाद आर्थिक न होकर राजनीतिक है प्लेटो के साम्यवाद का उद्देश्य आर्थिक असमानता को दूर करना नहीं था अपितु तत्कालीन राजनीतिक दोषों को दूर करना था। प्लेटो चाहता था कि शासन की बागडोर दार्शनिक शासक के हाथों में हो।
तपस्यात्मक (Ascetic) प्लेटो ने शासक तथा सैनिक वर्ग को सम्पति तथा परिवार का मोह त्यागकर संन्यासी बनने को कहा है। वह व्यक्तिगत सुख की अपेक्षा समाज के सुख को महत्व देता है। प्लेटो के शासक वर्ग का जीवन त्याग का है, मौतिक सुखों का नहीं। प्लेटो का साम्यवाद साधु है जिसमें शासक वर्ग समस्त आर्थिक सुख-सुविधाओं का त्याग करता है।

5. आर्थिक ढाँचे में परिवर्तन नहीं (No change in Economic Pattern) प्लेटी का साम्यवाद उत्पादक वर्ग को इस व्यवस्था से बाहर रखता है उत्पादक वर्ग अपनी सम्पत्ति का स्वामी बना रहता है। प्लेटो अपने साम्यवाद में आर्थिक ढाँचे को यथावत बनाए रखना चाहता है।

6. राज्य की एकता की रक्षक व्यवस्था (System of Preserving Unity of State प्लेटो राज्य में एकता स्थापित करने के लिए संरक्षक वर्ग के लिए साम्यवादी व्यवस्था की योजना प्रस्तुत करता है। प्लेटो की साम्यवादी योजना अभिभावक वर्ग को कंचन और कामिनी के मोह से दूर रखकर सार्वजनिक हित में शासन करने के लिए प्रेरित करेगी स्त्रियों को भी राज्य की सेवा का सक्रिय अवसर मिलेगा, इस राज्य की एकता में वद्धि होगी।

साम्यवाद के प्रकार (Types of Communism)


प्लेटो का साम्यवाद दो तरह का है -
 (क) सम्पत्ति का साम्यवाद Communism of Property)
(ख) पत्नियों का साम्यवाद (Communism of Wives (क) सम्पति का साम्यवाद (Communism of Property)

(क) सम्पत्ति का साम्यवाद :- 

 प्लेटो ने सम्पत्ति के साम्यवाद के अन्तर्गत यह व्यवस्था की है कि अभिभावक वर्ग के लिए अर्थात शासक एवं सैनिक वर्ग के लिए निजी सम्पति निषिद्ध होगी उनकी कोई निजी भूमि या निजी सम्पत्ति नहीं होगी। उनका निजी घर भी नहीं होगा अपितु ये राज्य द्वारा निर्मित बैरकों में रहेंगे, उनका आवास सभी के लिए खुला रहेगा जिसमें कोई भी कमी आ सके। राज्य के उत्पादकों द्वारा उनको इतनी जीवन वति दी जाएगी कि यह उनके लिए कम न पड़े और न ही निजी संग्रह के लिए बचे के सामूहिक रूप से मेजों पर भोजन करेंगे। उन्हें सोने चाँदी के सामान का स्पर्श करना निषिद्ध होगा। चल अचल सम्पत्ति सेवित होकर देश की सेवा और रक्षा करेंगे इसी में उनकी मुक्ति है और ऐसा करने से वे राज्य के रक्षक बन सकेंगे किन्तु जब वे कभी भी भूमि, घर और धन का उपार्जन करेंगे तब वे अन्य नगरवासियों से घणा करने लग जाएंगे। वे प्रपंच करेंगे द्वेष करेंगे तथा राज्य के रक्षक बनने की बजाय उसके शत्रु और निरंकुश व्यक्ति बन जाएंगे। लोग उनसे या करेंगे और ये लोगों से ये अपने सार्वजनिक हिल के धर्म से पदव्युत हो जाएंगे। इस प्रकार के राष्ट्र के सर्वनाश का ही मार्ग प्रशस्त करेंगे। 

प्लेटो के सम्पत्ति विषयक साम्यवाद की कुछ विशेषताएं निम्नलिखित है


1. यह साम्यवाद सभी नागरिकों के लिए नहीं, बल्कि केवल शासक और सैनिक वर्ग के लिए है उसका उद्देश्य यद्यपि सम्पूर्ण समाज का कल्याण है किन्तु सम्पूर्ण समाज द्वारा व्यवहार में नहीं लिया जाता है। 
2. प्लेटो का सम्पति सम्बन्धी साम्यवाद मांग का नहीं बल्कि त्याग का मार्ग है यह समाज के शासक वर्ग की कंचन और
कामिनी का मोह छोड़कर जन-कल्याण में लगे रहने के लिए प्रेरित करता है। फोस्टर के शब्दों में प्लेटो के संरक्षक वर्ग को सामूहिक रूप से सम्पति का स्वामित्व ग्रहण करना नहीं, वरन इसका ल्याय करना है।" 
3. इसका उद्देश्य राजनीतिक है. आर्थिक नहीं वर्तमान साम्यवाद की तरह यह आर्थिक विषमता को दूर न करके राजनीतिक दोषों को ही दूर करता है।

सम्पत्ति के साम्यवाद के पक्ष में तर्क (Arguments in favour of the ommunism of Property)


प्लेटो ने निम्न आधारों पर सम्पति को साम्यवाद का समर्थन किया है -

1. मनोवैज्ञानिक आधार (Psychological Basis):

प्लेटो के अनुसार शासक और सैनिक आत्मा के विवेक और साहस तत्व का क्रमशः प्रतिनिधित्व करते हैं। इन तत्वों से प्रेरित होकर वे अपने निश्चित प्रतिनिधित्व करते हैं। इन तत्वों से प्रेरित होकर अपने निश्चित उत्तरदायियों को निमाना चाहते है तो उन्हें नष्ट नहीं पना चाहिए। निजी सम्पति की व्यवस्था मनुष्य की उदार प्रति पर विपरीत प्रभाव डालती है और व्यक्तिको स्वार्थी बनाती है। यदि दार्शनिक शासक सैनिक वर्ग के लिए निजी सम्पत्ति की व्यवस्था स्वीकार की जाएगी तो उनमे भी स्वार्थ की वद्धि होगी और क्रमशः उनका विवेक और साहस कुण्ठित हो जाएगा। सेबाइन के अनुसार शासकों को लालच से मुक्ति दिलाने का एक ही उपाय है कि उन्हें किसी चीज को अपना या निजी कहने के अधिकार से वंचित कर दिया जाए और यह उपाय प्लेटो की सम्पति की व्यवस्था में ही सम्मय है। अत: प्लेटो का सम्पति का साम्यवाद आदर्श राज्य के लिए मनोवैज्ञानिक आवश्यक शर्त है।
 

2.राजनीतिक और व्यावहारिक आधार (Pulitical and Practical Basis

 प्लेटो का सम्पति का सिद्धान्त दो आधारों पर राजनीतिक है। एक तो वह सिर्फ शासक व सैनिक वर्ग पर लागू होता है, उत्पादक वर्ग पर नहीं शासक वर्ग तक सीमित होने के कारण यह राजनीतिक है। दूसरा यह है कि शासन के ऊपर धन का बहुत बुरा प्रभाव पडता है। इस बुराई को दूर करने के लिए प्लेटो अभिभावक वर्ग को सम्पत्ति के अधिकार से मुक्त करता है। प्लेटो के अनुसार जब राजसत्ता तथा निजी सम्पति का संयोग हो जाता है तो राज्य का पतन हो जाता है शासक वर्ग धन की लालसा के लिए सका दुरुपयोग करता है। अता प्लेटो राजनीतिक अर्थ शक्ति के केन्द्रीयकरण को समाप्त करके शासक वर्ग को केवल राजनीतिक शक्ति देने के पक्ष में है। प्लेटो की यही व्यावहारिक मान्यता भी है और राजनीतिक अनिवार्यता यदि शासकों को व्यक्तिगत सम्पत्ति की छूट दी जाए तो शासक वर्ग भ्रष्ट होकर आदर्श राज्य को धनिकतन्त्र (Plutocracy) में बदल [देगा इस सम्बन्ध में सेवाइन ने लिखा है जहाँ तक सैनिकों व शासकों का सम्बन्ध है, प्लेटो को शासन के ऊपर धन के गुरे प्रभावों के बारे में इतना व विश्वास था कि इस दोष को मिटाने के लिए उसे स्वयं सम्पत्ति के नाश के अतिरिक्त कोई रास्ता दिखाई नहीं दिया।"

3. नैतिक आधार (Maral] Basis) 

प्लेटो इस बात में विश्वास नहीं करता कि व्यक्ति का अस्तित्व मात्र स्वार्थसिद्धि के लिए है उसके अनुसार कर्तव्यों का पूर्ण निष्ठा के साथ सम्पादन कर अपने योग्य कार्यक्षेत्र की सीमा में रहकर एवं समष्टि के एक अभिन्न अंग के रूप में अपने अस्तित्व को स्वीकार करके ही व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। प्लेटो का सिद्धान्त व्यक्ति को विवेकी व निस्वार्थी बनाकर कतव्यों का सम्पादन करने पर जोर देता है। 

(4) दार्शनिक आधार (Philosophical Hasis) 

प्लेटो का सम्पत्ति का साम्यवादी सिद्धान्त दार्शनिक आधार पर भी उचित है प्लेटो ने इसे कार्य विशिष्टीकरण के आधार पर सही ठहराया है। प्लेटो का कहना है कि जिन लोगों के ऊपर शासन
का भार है. उनकी जीवन शैली विशिष्ट होनी चाहिए। यह शैली कार्य विशेष के आधार पर होनी चाहिए। शासक वर्ग को उच्चादशों को प्राप्त करने के लिए सांसारिक प्रलोभनों से मुक्त होना चाहिए। प्लेटो का कहना है कि जिन व्यक्तियाँ पर शासन का गार है, उन्हें अपने कार्य में बाँधा या विघ्न उत्पन्न करने वाले सभी सांसारिक तत्त्व से उसी प्रकार वचना चाहिए जिस प्रकार ईश्वर की भक्ति में लगे एक साधक या संन्यासी को पर पानी, बच्चे सम्पत्ति या सांसारिक मोह माया से दूर रहना चाहिए।

सम्पत्ति के साम्यवाद के उद्देश्य


(Aims of Communism of Property)

प्लेटो की सम्पत्ति की योजना के प्रमुख उद्देश्य निम्न प्रकार से है


1. सार्वजनिक हित के लिए (For Public Interest) 
प्लेटों का दार्शनिक राजा सार्वजनिक हित में शासन करता है। यह सैनिक वर्ग उत्पादक वर्ग पर सार्वजनिक हित के ही सन्दर्भ में कठोर नियन्त्रण रखता है। 
2. अभिभावक वर्ग के लिए कार्यकुशलता (For efficiency of Guardian Class) सम्पत्ति के साम्यवाद की योजना सैनिक वर्ग तथा शासक वर्ग को आर्थिक चिन्ताओं से गुफा करती है और वह अपना समस्त समय व ध्यान अपनी कार्यकुशल की वद्धि में लगा सकते हैं।

3. राज्य की एकता के लिए (For the Unity of State): जब शासक वर्ग के पास निजी सम्पत्ति होती है तो शासक वर्ग में सम्मति को लेकर आपसी प्रतियोगिता व ईर्ष्या भी होती है और इससे राज्य को एकता को भय उत्पन्न हो जाता है।
किन्तु सम्पत्ति को साम्यवादी योजना शासक वर्ग में इस प्रकार का भय उत्पन्न नहीं होने देती और यह राज्य की एकता की रक्षक सिद्ध होती है।

4. सामाजिक भ्रान्त - भाव  के लिए (For Social Harmony प्लेटो का सम्पत्ति का साम्यवाद संरक्षक वर्ग को साधुवादी प्रति अपनाने की सलाह देता है। सम्पत्ति पर किसी एक का अधिकार न होकर सम्पूर्ण समाज का अधिकार होगा। इससे किसी के पास कम या अधिक सम्पत्ति संचय करने की भावना पैदा नहीं होगी सम्पत्ति का साम्यवाद लोगों में की भावना को जन्म देगा।

सम्पत्ति के साम्यवाद की आलोचनाएँ (Criticians of Communism of Property) 1


प्लेटो के सम्पत्ति समन्धी साम्यवाद की सेबाइन मार्कर, पोपर व अरस्तू द्वारा अनेक आलोचनाएँ की गई है

(क) अरस्तू द्वारा की गई आलोचनाएँ (Aristotle's Criticisms)


1. यह धारणा मानवीय प्रकृति की मूलभूत प्रतियों की अवहेलना करती है। प्रत्येक मानव में निजी सम्माति प्राप्त करना उसकी स्वाभाविक प्रति है और अगर उसे इस अधिकार से वंचित रखने की कोशिश की जाती है तो वह उसकी प्रकृति
के प्रतिकूल बात होगी।

2. अरस्तू साम्यवाद को जीवन के सामान्य अनुभव के विरुद्ध मानता है।

3. अरस्तू का यह भी कहना है कि सम्पत्ति की सीधी व्यवस्था कभी भी सामाजिक कल्याण में वद्धि नहीं कर सकती। 
4. अरस्तू का यह भी कहना है कि वैयक्तिक सम्पति की प्रथा का विकास हमारी सभ्यता के विकास का प्रतीक है। सम्पत्ति का अभाव प्रगति के मार्ग को रोकता है।

5. इससे परोपकार और उदारता की श्रेष्ठ मानवीय सम्भावनाएँ नष्ट हो जाएँगी क्योंकि व्यक्ति परोपकार सम्बन्धी कार्य निजी
सम्पत्ति के आधार पर ही करता है।
6. अरस्तू ने यह विचार प्रस्तुत किया है कि यह अधिक अच्छा होगा कि सम्पत्ति निजी हो परन्तु उसका प्रयोग सामूहिक हो
इससे राज्य तथा व्यक्ति दोनों का भला हो सकता है।

7 व्यक्तिगत समाप्ति के लिए उत्साह और लगन के कारण ही मनुष्य दूसरों के साथ प्रतियोगिता करता है तथा अपने सर्वोत्तम गुणों का विकास करता है परन्तु निजी सम्पत्ति के न होने पर ऐसा नहीं होगा।

8 प्लेटो की यह योजना बहुमत को शामिल नहीं करती है और इसलिए यह असफल होकर रहेगी तथा इससे राजा में विभाजन होगा तथा फूट ईर्ष्या व कलह की सम्भावना प्रबल होगी।

9. अरस्तु का मानना है कि बिना सम्पत्ति के अभिभावक वर्ग सुखी नहीं होगा और जिस राज्य में शासक वर्ग ही सुखी नहीं
रहेगा उसमें भला पता कैसे सुखी रह सकती है।

10. अतः प्लेटो का साम्यवादी राज्य एक दुःखपूर्ण राज्य होगा। राज्य में एकता को उचित शिक्षा द्वारा ही बढ़ाया जाना चाहिए. साम्यवाद से नहीं प्लेटो स्वयं आत्मिक उपाय को भौतिक उपाय से अधिक महत्व देते हैं अतः साम्यवाद एक गीण उपाय है। 

11. प्लेटो आवश्यकता से अधिक एकता लाने की प्रवति पर कायम है। वह राज्य की बेदी पर व्यक्तियों की इच्छाओं का
बलिदान कर देता है।

(ख) अन्य विद्वानों द्वारा की गई आलोचनाएँ (Criticismes Advocated by others)


1. सद्गुणों के विकास में बाधक (Obstacle in the development of the Virtue)
 निजी सम्पत्ति की व्यवस्था अनेक सद्गुणों के विकास में सहायक होती है, जैसे दान, दगा, परोपकार, अविशन आदि के सद्गुण किन्तु प्लेटो ने निजी सम्पत्ति के अवगुणों की ओर ध्यान न देकर संरक्षक वर्ग को इससे वंचित कर दिया है, जो अनुचित है।

2 मानव स्वभाव के प्रतिकूल (Against Haiman Nature)
 प्लेटो ने निजी सम्पत्ति का अन्त करके मानव स्वभाव के विपरीत कार्य किया है। सम्पति अर्जित करना मानव की स्वाभाविक प्रति है। इससे व्यक्ति के अनेक उदार गुण विकसित होते है अतः फोटो ने मानव स्वभाव के विपरीत कार्य किया है।
 3. न्यायपूर्ण वितरण की समस्या (Problem of Just Distribution) 
निजी सम्पत्ति के अभाव में यह बताना कठिन होगा कि किस व्यक्ति का समाज में कितना योगदान है। इससे पूर्ण करण की अनेक समस्याएँ खड़ी होगी जो समाज की एकता को नष्ट कर देंगी।

4.व्यक्ति की प्रेरणा शक्ति का हास (Effect Incentive to Wark) 
निजी सम्पति के समर्थकों का मानना है कि सम्पत्ति
का आकर्षण व्यक्ति को अधिक से अधिक कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करता है। इसी प्रेरणा से व्यक्ति अनेक नए-नए आविष्कार करता है, परिश्रम करता है। इसके अभाव में प्रेरणादायक शक्ति का हास हो जाएगा। 
5. अमनोवैज्ञानिकpaychological 
निजी सम्पत्ति की संख्या मानव स्वभाव के अनुकूल है। व्यक्ति सम्पत्ति अर्जन करने के लिए ही सारे क्रियाकलाप करता है। प्लेटो अभिभावक वर्ग को इससे वंचित करके मानव प्रकृति के विरुद्ध चला जाता है। अत: प्लेटो का सम्पति का सिद्धान्त अमनोवैज्ञानिक है।

6. अर्थ साम्यवाद (Half-Communism)
प्लेटो सम्पूर्ण सामाजिक इकाई की बजाय एक वर्ग विशेष को ही इस व्यवस्था में शामिल करता है। प्लेटो का साम्यबाद केवल शासक और मिक संरक्षक वर्ग के लिए ही है। अगर व्यक्तिगत सम्पत्ति मतभेद, अनेकता, लोभ मोह को जन्म देती है तो उत्पादक वर्ग को इसका अधिकार देना विवेकपूर्ण नहीं है।

7 मानव स्वतन्त्रता की बलि चढ़ाना:
 प्लेटो ने साम्यवाद के नाम पर मानव स्वतन्त्रता का दमन किया है। प्लेटो की साम्यवाद व्यवस्था में केवल वही कार्य करने का अधिकार होगा जो राज्य चाहेगा। प्लेटो ने व्यक्ति को एक साधनमात्र मानकर व्यक्ति के अधिकार स्वतन्त्रताओं पर कुठाराघात किया है। 
8. सम्पत्ति से पंचित शासकों की कठिनाइयाँ प्लेटो के संरक्षक वर्ग के सदस्य व्यक्तिगत सम्पत्ति से सम्बन्धित समस्याओं और प्रेरणाओं के ज्ञान से भी बंचित रहेंगे जिसके कारण उन्हें साधारण लोगों की सम्पति से जुड़ी समस्याओं का निपटारा करने में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। शासक उत्पादक वर्ग की व्यक्तिगत सम्पत्ति को भी नियन्त्रित कर सकता है, जबकि वह स्वयं निजी सम्पत्ति के गुण-दोषों के बारे में ज्ञान रखता हो। आध्यात्मिक रोग के लिए भौतिक उपचार अनुचित प्लेटों ने आध्यात्मिक रोगों को रोकने के लिए कोई आध्यात्मिक मौतिक साधनों का सहारा लिया है। संसार की मौतिक वस्तुएँ आध्यात्मिक वस्तुओं के साथ लगी हुई हैं, जिनके निराकरण से यदि बुराई दूर होती है तो उनके द्वारा जो हित होता है, वह भी दूर हो जाएगा। भौतिकतर आध्यात्मिकता का आधार है और उसके लिए साधन मी भौतिकता को दूर करने का तात्पर्य होगा इन साधनों का अन्त। 
10.तपस्याक Ascetic)
 सम्पत्ति के साम्यवाद की योजना सार्वजनिक हित के नाम पर अभिभावक वर्ग को सम्पत्तिहीन रखती है और सम्पत्ति सम्बन्ध स्वतन्त्रता का अन्त करती है तथा तपस्वी का जीवन व्यतीत करने पर बाध्य करती है। प्लेटो के साम्यवाद में व्यक्ति का जीवन लाग का जीवन है, भौतिक सुखों का भोग नहीं प्लेटो का साम्यवाद साधुवादी है जिसमें राज्य के श्रेष्ठ व्यक्ति आर्थिक सुख-सुविधाओं का त्याग करते हैं। अतः साम्यवाद तपस्यात्मक है। 
11. दास प्रथा का जिक्र नहीं (Silent on Slavery System) प्लेटो ने अपने व्यक्तिगत सम्पत्ति के सिद्धान्त में दास प्रथा जैसे महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त की चर्चा नहीं की है। प्लेटो ने किसी ऐसे कार्य का उल्लेख नहीं किया है जो दासों द्वारा किया जाए। प्लेटो का दास प्रथा को महत्वहीन समझना उसे स्वयं को ही महत्त्वहीन बना देता है। 
12 सम्पत्ति पर एक पक्षीय विचार (Chne sided Views on Property) प्लेटो सम्पत्ति के अवगुण के आधार पर ही अपने सम्पत्ति के साम्यवादी सिद्धान्त को खड़ा करता है उसने सम्पत्ति के गुणों की अनदेखी करने की भारी भूल की है।

अनेक आलोचनाओं के बावजूद यह मानना ही पड़ेगा कि प्लेटो का सम्पत्ति का साम्यवादी सिद्धान्त व्यावहारिक, तर्कपूर्ण एवं उपयोगी है। यह उनके सिद्धान्त का तर्कसंगत निष्कर्म है। सम्पत्ति का लालच समाज में भ्रष्टाचार व अराजकता को जन्म देता है। आज के सामाजिक वैमनस्य के लिए सम्पत्ति की चाह ही जिम्मेदार है प्लेटो ने तत्कालीन एन्स की सामाजिक बुराइयों को बहुत करीब से देखा था और उन दोषों को दूर करने के लिए उसने अपना यह सिद्धान्त खड़ा किया। यद्यपि उसकी कुछ आलोचनाएँ तर्कपूर्ण है लेकिन आज भी यह निर्विवाद रूप से सत्य है कि प्लेटो का साम्यवादी सिद्धाना बहुत महत्वपूर्ण दैन

पत्नियों का साम्यवाद (Communism of Wives)


प्लेटो अपनी पुस्तक रिपब्लिक में संरक्षक वर्ग के लिए कंबल निजी सम्पति को ही निषिद्ध नहीं करता अपितु परिवर की संस्था को समाप्त कर अपनी पत्नियों की साम्यवादी योजना भी प्रस्तुत करता है। प्लेटो के न्याय सिद्धान्त पर आधारित एक आदर्श के निर्माण के लिए सम्पत्ति के साम्यवाद के साथ ही परिवार का साम्यवाद भी जरूरी है। प्लेटो परिवार व सम्पत्ति में घनिष्ठ सम्बन्ध मानता है। वस्तुतः परिवार का साम्यवाद की योजना उसके सम्पत्ति के ही साम्यवाद का तार्किक विस्तार है। प्लेटो का मानना है कि यदि पारिवारिक संस्था का अन्त किए बिना ही व्यक्तिगत सम्पत्ति के उन्मूलन का प्रयास निरर्थक होगा। विवाह और परिवार भी निजी सम्पत्ति के ही रूप है और इससे लालच और ईर्ष्या को बढ़ावा मिलता है। अतः उद्देश्य की दष्टि से साम्यवाद के ये दोनों प्रकार एक-दूसरे के सहायक व पूरक हैं। प्लेटो के परिवार या पत्नियों के साम्यवाद के महत्व पर बार लिखता है- "परिवार की समाप्ति का दिन राज्य के लिए एकता वक्त के लिए स्वतन्त्रता तथा इन दोनों के लिए न्याय की शुरुआत का दिन होगा।"

पत्नियों के साम्यवाद के पक्ष में तर्क (Arguments for Communism of Wives)


प्लेटो के साम्यवाद का प्लेटो ने निम्न आधारों पर पक्ष लिया है 1 राजनीतिक आधार (Political Basis) प्लेटो पाहता था कि स्त्रियों पर की चारदीवारी की कैद से मुक्त होकर राज्य के शासन सम्बन्धी कार्यों में भाग ले नारियों के योगदान के बिना राज्य अपने आधे भावी संरक्षकों से वंचित रह जाता है वह स्त्री-पुरुष में कोई भेद स्वीकार नहीं करता। उसका मानना है कि ऐसा कोई भी प्रशासनिक कार्य नहीं है जो स्त्री न कर सके। वह केवल लिंगभेद को ही स्वीकार करता है, परन्तु इसे शासन क्रियाओं में बाधक नहीं मानता है।

प्लेटो का मानना है कि स्त्रीयों राजनीतिक, प्रशासनिक और सैनिक कार्यों में भाग ले सकती है और अपना कर्तव्य उचित प्रकार से निभा सकती है। इस लिए प्लेटो परिवार की कंन्द से उन्हें मुक्ति दिलाना चाहता है।

2 नैतिक आधार (Ethical Basis) प्लेटो का मानना है कि परिवार व सम्पत्ति का मोह शासक वर्ग को भ्रष्ट बना देता है। पारिवारिक स्नेह बंधन का कारण होता है संतान की चिन्ता व्यक्ति को स्वार्थी बनाकर पथभ्रष्ट करती है। परिवारों के मोह के कारण शासक अनुचित नीतियों का पालन करते हैं। इससे शासक वर्ग के विभिन्न परिवारों में भी संघर्ष उत्पन्न होता है। यह राज्य की एकता के लिए मय को पैदा करता है परिवार राज्य की एकता में महान वाचक होता है शासक व सैनिक वर्ग परिवार के प्रति अनुरक्त होकर राज्य के प्रति अपने कर्तव्यों की अवहेलना कर सकते हैं। अतः प्लेटो नैतिक आधार पर इस साम्यवाद का समर्थन करता है।

3. सुप्रजनन का आधार (Eugenic Basis) प्लेटो तत्कालीन वैवाहिक प्रथा और पारिवारिक व्यवस्था पर कुठाराघात करता है। उस समय मनुष्य लापरवाही से संभोग करके पशु-पक्षियों की तरह अवैध सन्तानों को जन्म देते थे जो राज्य के हित में किसी भी दष्टि से उपयोगी नहीं होती थी राज्य में कुरूप व अयोग्य सन्तानों का अम्बार लगा हुआ था। प्लेटो ने इस समस्या से निजात दिलाने के लिए महसूस किया कि आदर्श राज्य के लिए श्रेष्ठ नागरिक जरूरी है। इसके लिए योग्य पुरुष व स्त्रियों का ही सहवास होना आवश्यक है ताकि श्रेष्ठ सन्तान ही जन्म से प्लेटो संरक्षक या अभिभावक वर्ग को ही इसके योग्य समझकर इस वर्ग के स्त्री पुरुषों में अस्थायी विवाह सम्बन्ध द्वारा सन्तानोत्पत्ति आवश्यक मानता है। परन्तु यह इसमें यह सावधानी रखता है कि स्त्रियों व पुरुषों के जोड़े उनकी आयु व गुण को ध्यान में रखकर ही बनाए जाएं ताकि श्रेष्ठ सन्तान का जन्म हो |

पत्नियों के साम्यवाद का स्वरूप औरा उसकी व्याख्या


(The form of Communism of Wives and its Exposition)

1. राज्य-परिवार का स्वरूप (Nature of State Family) प्लेटो ने संरक्षक वर्ग के निजी परिवार का उन्मूलन कर राज्य-परिवार (State Family का समर्थन किया है। उसके समक्ष नारी सुधार की समस्या थी और साथ ही राज्य के लिए अच्छी से अच्छी सन्तान उत्पन्न करना चाहता था इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने संरक्षक के निजी परिवार
का उन्मूलन किया और एक राज्य-परिवार का रूप चित्रित किया।

2. यौन-सम्बन्ध (Sexual] Relation) प्लेटो ने उस समय की वैवाहिक प्रथा के दोषों को दूर करने के लिए अपने आदर्श के निर्माण के लिए यौन-सम्बन्धों में पत्नियों के साम्यवाद के माध्यम से सुधार करने का प्रयास किया है। संरक्षक वर्ग भी अपनी निजी पत्नी नहीं रख सकेगा। सभी का समाजीकरण कर दिया जाएगा। ये एक साथ बैरकों में रहेंगे और एक साथ खाना खाएँगे। प्लेटो को विश्वास है कि परिषद व श्रेष्ठ नर-नारी ही श्रेष्ठ संतान को जन्म दे सकते हैं जिन स्त्री-पुरुषों ने सार्वजनिक सेवा के कार्य या युद्ध में श्रेष्ठता दिखाई है, उसे अधिक सन्तान पैदा करने की छूट प्राप्त होगी। स्त्री व बच्चे सामाजिक होंगे न कि किसी एक व्यक्ति के राज्य बच्चों के पालन-पोषण का पूरा ध्यान रखेगा (State Will Take Care of Upbringing) प्लेटो के अनुसार बच्चों के जन्म के बाद उनके पालन-पोषण का उत्तरदायित्व राज्य अपने ऊपर लेगा। बच्चों को शिशु-गहों में रखा जाएगा। माताएँ बच्चों को राज्य की देख-रेख में दूध पिलाएँगी, परन्तु उन्हें अपने बच्चों का कोई भी निजी ज्ञान नहीं होगा, बच्चों को भी अपनी माँ का कोई ज्ञान नहीं होगा।

3.बच्चा पैदा करने की आयु (Age of Conception): प्लेटो के अनुसार स्त्रियों को 20 से 30 वर्ष तक तथा पुरुषों को
25 से 55 वर्ष तक सन्तान पैदा करने की छूट होगी। इस समय स्त्री व पुरुष परिपक्व होते हैं। उनके इस आयु में सहवारा से योगय सन्तान ही पैदा होंगी। राज्य केवल श्रेष्ठ स्त्री-पुरुष के सहवास से उत्पन्न सन्तान का ही लालन-पालन करेगा, निकृष्ट स्त्री-पुरुषों के संयोग से उत्पन्न सन्तान का पालन-पोषण राज्य नहीं करेगा राज्य के नियमों के विरुद्ध जो सन्तान पैदा होगी, उसे या तो राज्य नहीं पालेगा या उसे किसी अज्ञात एवं अंधकारमय जगह में गाड़ दिया जाएगा या जन्म लेने से पूर्व ही गर्भपात द्वारा नष्ट कर दिया जाएगा।
सम्बन्ध का ज्ञान प्लेटो कहता है कि संरक्षक वर्ग के अन्तर्गत आने वाले बच्चे सामुदायिक जीवन के भागीदार होंगे और इस सामुदायिक जीवन में उनके सम्बन्ध भी सामुदायिक होंगे पुरुष उन सभी बच्चों को अपना पुत्र या पुत्री समझेगा जो उनके वर बनने के मास से लेकर 10 वें मास तक पैदा होते हैं और ये स्त्री बच्चे उस पुरुष को पिता समझेंगे। यह इन बच्चों की सन्तानों को पौत्र कहेगा और ये समुदाय के पुरुषों व स्त्रियों को दादा-दादी कहेंगे तथा वे सब जो कि एक माता-पिताओं के समुदाय के प्रजनन काल में उत्पन्न हुए हैं एक दूसरे को भाई-बहिन मानेंगे।

पत्नियों के साम्यवाद के उद्देश्य (Aims of Communism of Wives)


प्लेटो के अनुसार पत्नियों के साम्यवाद को प्रतिपादित करने के पीछे निम्नलिखित उद्देश्य है

E नारियों की मुक्ति (Emancipation of Women) प्लेटो के समय में एथेन्स में राजनीतिक व सामाजिक कार्यों में स्त्रियों को भाग लेने का अधिकार प्राप्त नहीं था। उन्हें केवल घर की चारदीवारी में रहकर बच्चों का लालन-पालन करना होता था राज्य की सेवा के लिए बच्चों को उत्पन्न करने में विवाह एक साधन और पत्नी एक उपकरण मानी जाती थी। परिवार की सीमित परिधि में बंधी होने के कारण उनका व्यक्तित्व कुंठित होता है। इससे समाज को भी हानि होती है, क्योंकि स्त्री समाज की आधी सुप्त शक्ति होती है। प्लेटो ने यह स्वीकार किया है कि स्त्रियों की संभाव्य शक्ति को ध्यान में रखते हुए उन्हें चारदीवारी से बाहर निकालना आवश्यक है। प्लेटो ने कहा है परिवार एक ऐसा साधन है जहाँ मनुष्य की प्रतिभा का हनन होता है तथा पत्नी की मानसिक शक्ति चौके-चूल में ही बर्बाद हो जाती है।" प्लेटो स्त्रियों के इस हीन जीवन का अन्त करके उन्हें सक्रिय राजनीति में देखना चाहता था।

2. अभिभावक वर्ग की क्षमता में वद्धि (Increase in Potentiality of Guardian Class) परिवार के साम्यवाद की
योजना उन्हें परिवार के कुप्रभावों से बचाती हुई अपने परिवार की दैनिक आवश्यकताओं की चिन्ता से मुक्त रखती है। ऐसी स्थिति में अभिभावक वर्ग अपने कर्तव्य की पूर्ति करने में भी अधिक सक्षम होगा।

1 जनसंख्याका सन्तुलन (Equilibrium in Population) परिवार के साम्यवाद की योजना का एक प्रमुख उद्देश्य आदर्श नगर राज्य की जनसंख्या को आदर्श सीमा में ही बनाए रखना है। प्लेटो के अनुसार "विवाहों की संख्या को हम शासकों के स्वविवेक पर छोड़ देंगे। वे इस लक्ष्य को सदेव ध्यान में रखेंगे कि युद्ध, महामारियों आदि से जनसंख्या की होने वाली हानि के बाद भी नागरिकों की जनसंख्या यथासम्भव स्थिर रहे और ये ऐसे सभी सम्म प्रयत्न करेंगे कि हमारा राज्य न तो जनसंख्या की दष्टि से बढ़ा हो पाए और न छोटा रह जाए...।" एण्टोनी फलु के अनुसार "प्लेटो सामाजिक दष्टि से जनसंख्या की विस्फोटक स्थिति के बारे में जागरूक है।"

14. नस्ल-सुधार (Improvement in Race) प्लेटो के इस साम्यवाद का उद्देश्य नस्ल सुधार करना भी है। प्लेटो ने स्पष्ट कहा है कि केवल योग्य पुरुषों व स्त्रियों का ही संभोग कराया जाएगा। कुरूप बच्चों को मार दिया जाएगा या राज्य उनका पालन-पोषण नहीं करेगा। प्लेटो का नस्ल सुधार का उद्देश्य एक स्वस्थ हष्ट-पुष्ट, बलवान, वीर तथा
प्रतिभाशाली सन्तान को पैदा करके पूरा हो सकता था। अतः प्लेटो ने नस्ल सुधार के लिए परिवार के साम्यवाद का
सिद्धान्त प्रतिपादित किया।

5. शासकों के शुद्ध विवेक की रक्षा प्लेटो के आदर्श राज्य में निर्लिप्त, निष्काम, प्रज्ञावान, दार्शनिक शासकों का शासन होगा, किन्तु सब जानते है कि ऐसे शासक पारिवारिक मोह के कारण शुद्ध कर्म व ज्ञान के मार्ग से भटक सकते हैं। प्लेटो ने माना है कि कंचन और कामिनी शासक वर्ग को अपने मार्ग से विचलित कर सकते हैं। इसलिए वह शासक वर्ग के शुद्ध विवेक की रक्षा करने के लिए परिवार को साम्यवाद की व्यवस्था करता है।

6 राज्य में एकता (Unity In State) परिवार व्यक्तितयों में तेरे-मेरे की भावना उत्पन्न करता है और इस भावना के कारण वर्ग में सत्ता प्राप्ति के लिए संघर्ष उत्पन्न होता है प्लेटो ने राज्य के हित में पारस्परिक संघर्ष की इस प्रति
का अन्त आवश्यक माना है अत: प्लेटो अभिभावक वर्ग के समस्त स्त्री-पुरुषों को एक ही परिवार (राज्य परिवार) के रूप में बाँधकर राजनीतिक एकता की स्थापना करना चाहता है ताकि समाज के सभी व्यक्ति आपस में आल भाव से रहे।

पत्नियों के साम्यवाद की आलोचना (Criticisms of Communism of Wives)


प्लेटो के साम्यवाद की निम्न आधारों पर आलोचना की गई है

1. परिवार एक ऐतिहासिक अनुभव (Family A Historical Experience) प्लेटो ने परिवार नामक संस्था का लोप करके भारी गलती की है। परिवार से ही राज्य व समाज का जन्म हुआ है। परिवार राज्य की छोटी इकाई है। 
परिवार का अन्त करना मानव समाज के लिए अहितकर होगा क्योंकि :
(क) परिवार एक ऐतिहासिक संस्था है। इसके पीछे युगों का अनुभव है। इसे समाप्त करने का अर्थ है पुनः असभ्यता के युग में लोटना 
(ख) राज्य की तरह परिवार भी मानव श्वमाय से उत्पन्न संस्था है। राज्य के नाम पर परिवार का अन्त करना सर्वथा अनुचित है।
(ग) परिवार नागरिकता की प्रथम पाठशाला है। परिवार ही बच्चे को सद्गुणी बनाता है। परिवार में सहयोग, सहानुभूति दया, परोपकार व अनुशासन जैसे पुणों को सीखा जाता है।

2. पत्नी और परिवार के प्रति प्लेटो के विचार सही तथ्यों पर आधारित नहीं है (Plate's Idean on Wives and Family are not Based on Correct Fact) आलोचकों का कहना है कि स्त्री का बच्चों के प्रति स्नेह और उनके पालन-पोषण की जो स्वाभाविक प्रवति होती है, उसे न तो शिशु पालनम हो को स्थानान्तरित किया जा सकता है और न ही उन गाँ मैं वही प्यार ही प्राप्त हो सकता है। वैसे भी मातत्व को समाप्त करना कभी भी एक आदर्श राज्य की नीति नहीं हो सकती बल्कि मानव को राज्य में उचित स्थान को प्राप्त करने का प्रोत्साहन ही प्लेटो के न्याय का सही रूप हो सकता था। मात व एक ऐसी चीज है जिसे माँ के सिवाय कोई दूसरा कृत्रिम तरीके से प्रदान नहीं कर सकता। स्त्री और पुरुष का सम्बन्ध भी पशुओं जैसा सम्बन्ध नहीं है जो सन्तान की उत्पत्ति के लिए ही जुड़ता हो उसमें एक पवित्रता है और यह सम्बन्ध जीवनभर के लिए होता है अतः प्लेटो ने पारिवारिक सम्बन्धों के पीछे की वास्तविकता को नहीं समझा। इसलिए अरस्तू ने इसे एक व्यभिचारी योजना कहा है जिसे कोई भी सभ्य मानव जाति स्वीकार नहीं करेगी। माता के स्नेह को प्लेटो राज्य की एकता के नाम पर कुर्बान नहीं कर देता है।

3. जो वस्तु सभी की होती है, वह किसी की भी नहीं होती (The Thing That Belongs to All Bedings to Noue):
अरस्तू का आरोप है कि प्लेटो के साम्यवाद में अभिभावक वर्ग की सारी पत्नियाँ और सभी बच्चे यदि सभी के है तो वास्तव मेवे किसी के नहीं है और इसलिए कोई भी उनकी व्यवस्था व परवाह उतने प्रेम से नहीं कर सकता जितना परिवार में उन्हें मिलता है। अपराध अधिक होंगे (Crimes will Increase) आलोचकों का कहना है कि यदि परिवार व व्यक्तिगत सम्पति न रहेंगे तो पिता पुत्र, माँ-बेटे भाई भाई का रिश्ता समाप्त हो जाएगा और तब समाज में स्वाभाविक होने वाली समस्याओं, झगड़ों या अपराध को पारिवारिक ढंग से नहीं सुलझाया जा सकेगा ऐसी स्थिति में अपराध बढ़ेंगे समाज में नैतिक मूल्यों का पतन हो जाएगा और नागरिक अधिक अपराधों की ओर प्रव होंगे

5. अमनोवैज्ञानिक तथा अव्यावहारिक (Unpsychological and Impracticable) प्लेटो के परिवार के साम्यवाद की योजना अपनी प्रकृति से अमनोवैज्ञानिक और अहारिक है। यही कारण है कि यह योजना प्लेटो के समय में ही अमान्य हो गई थी और न ही इसे आज तक कहीं लागू किया गया। प्लेटो ने स्वयं भी अपनी ग्रन्थ 'लॉज' में अस्थायी विवाह की जगह स्थायी विवाह व निजी परिवार की व्यवस्था को मान्यता दी है।

6. अनावश्यक योजना necessary Planning) अरस्तू का विचार है कि प्लेटो ने न्याय की स्थापना के लिए साधन के रूप में परिवार का साम्यवाद गलत अपनाया क्योंकि प्लेटो जिन दोषों जैसे लोभ, पक्षपात आदि को दूर करने की बात करता है उसके लिए तो शिक्षा व्यवस्था का सहारा लेना उचित होता ये रोग नैतिक रोग के समान है और इनका इलाज मौतिक साधन द्वारा नहीं हो सकता।

7. परिवार रहित शासक की व्यावहारिक कठिनाइयाँ (Practical Difficulties for the Ruler) पारिवारिक सम्बन्धों से अनभिज्ञ अनजान शासकों को उत्पादक वर्ग के पारिवारिक विवादों को हल करने का अधिकार है, किन्तु वे इस दष्टि से अयोग्य ही सिद्ध होंगे, क्योंकि उन्हें स्वयं पारिवारिक जीवन का कोई अनुभव नहीं होता है। 8. अपवित्र चीन- सम्बन्ध की सम्भावना (Possibility of Immoral Sexual-Relation) प्लेटो को परिवार के साम्यवाद में ऐसी यौन सम्भावना भी है जिससे रक्त का सम्बन्ध भी हो इस व्यवस्था में पिता-पुत्री को और भाई-बहिन को नहीं पहचानता अतः इससे अपवित्र यौन-सम्बन्ध की अधिक सम्भावना है जो सामाजिक मापदण्डों के विरुद्ध है। नैतिकता इसका कभी समर्थन नहीं कर सकती। 
9. दासों के लिए स्थान नहीं (No Place for Slaves प्लेटो ने दास-वर्ग को इस व्यवस्था से पूर्णतः बाहर रखा है। दास प्रथा उस समय की सबसे महत्त्वपूर्ण प्रथा थी द्वारा एक उपयोगी सामाजिक वर्ग का रूप ले चुका था। उनकी अवहेलना करना सर्वथा गलत है।

10 न्याय सिद्धांत के विरुद्ध (Against the Theory of Justice) प्लेटो के न्याय सिद्धान्त के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वाभाविक गुण के अनुसार आचरण करना चाहिए किन्तु प्लेटो का परिवार का साम्यवाद के सिद्धान्त का उल्लंघन करता है। स्त्रियों के लिए स्वाभाविक गुण बच्चों का लालन-पालन है, किन्तु प्लेटो अभिभावक वर्ग की स्त्रियों को इस स्वाभाविक कर्म से वंचित करता है।

11. व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास में बाधक प्लेटो राज्य की एकता को साध्य मानकर व्यक्ति को उसका साधनमात्र मान लेता है। वह अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए परिवार की संस्था को राज्य के अधीन कर देता है। अतः यह क्ति के व्यक्तित्व के विकास में बाधक है।

12. जीवशास्त्र के नियमों के विरुद्ध प्लेटों की परिवार की साम्यवादी व्यवस्था जीवशास्त्र के नियमों के विरुद्ध है। इसमें कोई गारण्टी नहीं है कि गुणवान माता-पिता की सन्तान भी गुणवान हो यह पद्धति पशु-विज्ञान में तो लागू हो सकती है. जीवशास्त्र में नहीं

13. स्त्री-पुरुष में भेद होता है प्लेटो स्त्री-पुरुष में लिंग-भेद को छोड़कर अन्य कोई अन्तर नहीं मानता स्त्री कोमल हृदय होती है, जबकि पुरुष कठोर हृदयी होते है। इस तरह के कई अन्तर दोनों में होते हैं। प्लेटो का पत्नियों का साम्यवाद न ही वांछनीय है और न ही सम्मय प्लेटो परिवार जैसी महत्त्वपूर्ण संस्था का लोप करता है, जो असम्भव है। परिवार जैसी संस्था के समाप्त होते ही बच्चे सद्गुणी न होकर आपराधिक प्रति की ओर प्रयत होंगे।

यह सिद्धान्त तर्क की दष्टि से तो ठीक हो सकता है लेकिन नैतिकता, संस्कृति तथा मनोविज्ञान की दष्टि से यह कभी मान्य नहीं हो सकता। प्लेटों की सबसे बड़ी उपलब्धि तो यह है कि उसने महिलाओं और पुरुषों की समानता पर जोर दिया है। उसके सारे प्रयास नारी उत्थान के लिए ही हैं। इस कार्य में परिवार की भूमिका काफी महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है, जिसकी प्लेटो ने उपेक्षा की है। यह निर्विवाद सत्य है कि सामावादी व्यवस्था का प्रयास प्लेटो की नारी उत्थान के लिए एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण देन है।

प्लेटो प्रथम साम्यवादी के रूप में (Plato As the First Communist)


मैक्स ने अपने ग्रन्थ पॉलिटिकल फिलारफी (Political Philosophy) में लिखा है कि प्लेटो साम्यवादी विचारों का मुख्य प्रेरणा-स्रोत है और रिपब्लिक (Republic) में सभी साम्यवादी और समाजवादी विचारों के बीज मिलते हैं लेकिन प्रो. नैटलशिप प्रो. कैटलिन प्रो. बार्कर, मैकरी के इस विचार से सहमत नहीं है। प्रो. केटलिन के अनुसार प्लेटो का साम्यवाद न तो स्वर्गीय है और न ही अन्तरराष्ट्रीय है। यह आधुनिक साम्यवाद से बिल्कुल मेल नहीं खाता आधुनिक साम्यवाद जिसका प्रतिपादन कार्ल मार्क्स और लेनिन जैसे विचारकों ने किया है. एक वर्ग-विहीन और राज्य विहीन समाज के विश्वास करते है। मुख्य रूप में यह विचारधारा पूंजीपति वर्ग के सर्वहारा वर्ग के शोषण को समाप्त करने पर जोर देती है। प्रो. जायजी की राय में प्लेटो और रूस के साम्यवादियों में बहुत सी समानता है। दोनों ही व्यक्तिगत सम्पति को सभी बुराइयों की जड़ मानते हैं, दोनों ही व्यक्तिगत सम्पत्ति और गरीबी को समाप्त करने के पक्षधर है। दोनों ही सामूहिक शिक्षा और बच्चों की सामूहिक देख-रेख में चाहते हैं दोनों ही कला और साहित्य को राज्य का केवल साधन मानते हैं और दोनों सभी विज्ञान और विचारधाराओं को राज्य के हित में प्रयोग करना चाहते हैं। इस आधार पर प्लेटो को प्रथम साम्यवादी मानना सर्वथा सही है लेकिन दूसरी ओर टेलर ने इसके विपरीत विचार दिए हैं टेलर के अनुसार "रिपब्लिक में न तो समाजवाद पाया जाता है और न साम्यवाद" प्लेटो को प्रथम साम्यवादी मानने के लिए साम्यवाद की आधुनिक विचारधारा को प्लेटो की विचारधारा
से तुलना करना आवश्यक हो जाता है।

 दोनों अवधारणाओं में कुछ समानताएँ व असमानताएँ है।


समानताएँ (Similarities)


प्लेटो के प्रथम साम्यवादी होने के पक्ष में कुछ विचार है, जो परस्पर दोनों विचारधाराओं की समानता पर आधारित है। दोनों में मुख्य समानताएं निम्नलिखित है:
1. व्यक्तिगत सम्पत्ति सारी बुराइयों की जड़ है (Private Property is the Root of all Evils) प्लेटो और आधुनिक साम्यवाद दोनों ही इस बात पर सहमत है कि समाज में समस्त दोषों का कारण निजी सम्पत्ति का पाया जाना है। इसलिए इसके स्थान पर सार्वजनिक सम्पत्ति की व्यवस्था करना आवश्यक है। प्लेटो ने संरक्षक वर्ग को व्यक्तिगत सम्पत्ति से वंचित करके स्वयं को आधुनिक साम्यवाद के पास लाकर रख दिया है। व्यक्तिगत सम्पत्ति के अन्त से ही समाज की सभी बुराइयों का अन्त हो सकता है।

2. अधिनायकतन्त्र मे आस्था (Faith in Dictatorship) दोनों ही साम्यवाद सम्पूर्ण समाज के हित के लिए एक सर्वाधिकावादी राज्य या शासक में विश्वास करते हैं। प्लेटो विवेकयुक्त दार्शनिक शासक के अधिनायकतन्त्र की स्थापना करता है जो कानून एवं परम्परा से ऊपर है। यह उत्पादक व सैनिक वर्ग पर समाज हित में पूर्ण नियन्त्रण रखता है। प्लेटो का दार्शनिक शासक सर्वशक्तिमान है। आधुनिक साम्यवादी सर्वहारा वर्ग की तानाशाही में विश्वास करते हैं। • अतः दोनों ही अधिनायकतन्त्र के पक्षधर है।

3. स्त्री-पुरुष की समानता में विश्वास (Faith in Equality of Women and Men) दोनों ही साम्यवादी स्त्री पुरुष की समान योग्यता व क्षमता में विश्वास करते हैं। प्लेटो के अनुसार स्त्री पुरुष में लिंग भेद को छोड़कर कोई अन्तर नहीं है। स्त्रियों भी पुरुषों की तरह प्रशासकीय पदों को अच्छी तरह संभाल सकती है। आधुनिक साम्यवादी भी नारी शक्ति में पूर्ण विश्वास करते हैं।

4. कला और साहित्य राज्य के साधन है (Art and Literature are Meam of State) दोनों ही साम्यवाद कला और साहित्य को केवल एक साधन मानते हैं जो केवल राज्य के हितों के अनुकूल होना चाहिए। इसलिए ये कला और साहिला पर नियन्त्रण की बात करते हैं। कविता की भावना संगीत के स्वर वाद्ययन्त्रों की लय तक को वे राज्य द्वारा नियन्त्रित व निर्देशित करना चाहते हैं। इसी तरह आधुनिक साम्यवादी भी कला और साहित्य पर कठोर नियन्त्रण की बात करते हैं यदि कोई कला व साहित्य राज्य हितों के विपरीत है तो उसे किसी भी अवस्था में सम्मान नहीं दिया जा सकता। अतः दोनों ही साम्यवादी कला और साहिला पर नियत्रण के पक्षधर है और ये इन्हें राज्य के कल्याण का एक साधन मानते हैं। इस साधन का पवित्र होना जरूरी है। 

5. कर्तव्य की भावना ही सामाजिक न्याय है (The Sense of Duty is Social Justice) दोनों ही साम्यवाद समाज के हित में ही व्यक्ति का हित मानते हैं ये कर्तव्यों पर अधिक जोर देते हैं ये अधिकारों के नाम पर प्रतिबन्धों की व्यवस्था के समर्थक है। प्लेटो ने अपनी योग्यतानुसार योग्य स्थान पर काम करने को सामाजिक न्याय कहा है। आधुनिक साम्यवाद
भी इस बात पर जोर देता है कि खाने का अधिकार उसी मनुष्य को है जो समाज के लिए काम करता है। अतः दोनों
ही साम्यवादी अधिकारों की तुलना में कर्त्तव्यों को महत्ता देते हैं।

6. अव्यावहारिक (Inpracticable) दोनों ही साम्यवाद मानव स्वभाव व मनोविज्ञान के अनुरूप नहीं है, इसलिए मे व्यावहारिक नहीं है। इस दोष के कारण न तो प्लेटो की साम्यवादी व्यवस्था कभी कायम हुई है और न ही होगी। इसी तरह आधुनिक साम्यवादी जिस शक्ति द्वारा साम्यवादी समाज की स्थापना की बात करते हैं. वह भी अव्यावहारिक है। आज विश्व के अनेक साम्यवादी व्यवस्था पतन की राह पर है।

7. समष्टिवाद में विश्वास दोना ही व्यवस्थाएं समष्टिवादी है। दोनों साम्यवाद समुदाय की सर्वोम्यता में विश्वास कर जिसमें व्यक्ति की वैयक्तिकता की उपेक्षा करते हैं। दोनों व्यवस्थाओं में व्यक्ति को एक साधनमात्र माना गया है। ४. आर्थिक प्रतियोगिता की समाप्ति दोनों ही साम्यबाद समाज के आर्थिक प्रतियोगिता को समाप्त करने के पक्षधर है।

प्लेटो का विश्वास है, वही राजनीतिक कलह का कारण है। आधुनिक साम्यवाद भी आर्थिक प्रतियोगिता को समाप्त कर
समाज में एकता का भाव पैदा करना चाहता है। उपर्युक्त तकों के आधार पर कहा जा सकता है कि प्लेटो ने ही साम्यवाद के बीज बो दिए थे। प्लेटो के साम्यवादी सिद्धान्तों के आधार पर ही आधुनिक साम्यवादी दर्शन खड़ा किया है इस दष्टि से प्लेटो को प्रथम साम्यवादी कहना सर्वथा सही है। 



असमानताएँ(Dissimilarities)


प्लेटो के साम्यवाद व आधुनिक साम्यवाद में बहुत सी असमानताएं है जिनके आधार पर उसके प्रथम साम्यवादी होने के विचार का खण्डन किया गया है। ये आधार निम्नलिखित है

1. अर्ध साम्यवाद और पूर्ण साम्यवाद (Hall Versus Full Communism) प्लेटी का साम्यवाद सारे समाज पर लागू न होकर केवल संरक्षक वर्ग तक ही सीमित है। प्लेटो ने उत्पादक वर्ग को अपनी इस व्यवस्था से पूर्णतया बाहर रखकर अपने अर्ध-साम्यवादी होने का ही परिचय दिया है। आधुनिक साम्यवाद पूरे समाज के लोगों पर समान रूप से लागू होता है लेकिन इसमें परिवार का साम्यवाद शामिल नहीं है। आधुनिक साम्यवाद समाज के हर वर्ग को अपने में समेटकर चलता है। अतः दोनों में अन्तर है।

2. संन्यासवाद और भौतिकवाद (Asceticism Versus Materialism) प्लेटो का साम्यवाद वास्तव में तपस्यात्मक है। प्लेटो शासकों को भौतिक सुख साधनों से विरक्त बनाता है। बार्कर के शब्दों में यह समर्पण का मार्ग है और उस समर्पण की माँग सर्वोत्तम और केवल सर्वोत्तम व्यक्ति से ही की गई है। प्लेटो ने संरक्षक वर्ग को समस्त सम्पत्ति से कर दिया है क्योंकि वह निजी सम्पति को सार्वजनिक कल्याण के कर्तव्य पालन में एक बाधा मानता है। आधुनिक साम्यवाद की आधारशिला भौतिकता है आधुनिक साम्यवाद भौतिक सुख-साधनों में वद्धि को ही अपना लक्ष्य मानता है। आधुनिक साम्यवाद सम्पति की वांछनीयता को स्वीकार करते हुए उसके वितरण पर बल देता है। अत: प्लेटो के साम्यवाद में न्याय का तात्पर्य कार्यों का यथोचित वितरण है तो आधुनिक साम्यवाद के सन्दर्भ में राज्य के उत्पादन का न्यायोचित वितरण



3. राजनीतिक उद्देश्य और आर्थिक उद्देश्य (Political Versus Economic Aim) : प्लेटो के साम्यवाद का लक्ष्य राजनीतिक है क्योंकि वह विशेष प्रकार की आर्थिक योजना के आधार पर राज्य में कुशासन तथा भ्रष्टाचार को समाप्त कर अच्छे शासन की स्थापना करना चाहता है। प्लेटो का उद्देश्य राजनीतिक स्थिरता पैदा करता है। आधुनिक साम्यवाद का प्रमुख लक्ष्य आर्थिक है। आधुनिक साम्यवादी विशेष प्रकार की राजनीतिक व्यवस्था के आधार पर आर्थिक साधनों का न्यायपूर्ण वितरण करना चाहते हैं। अतः एक का लक्ष्य राजनीतिक है तो दूसरे का आर्थिक ।

4. सवर्ग समाज और वर्गहीन समाज (Class Based Versus Classless Society) : प्लेटो के साम्यवाद में वर्गों का अस्तित्व है जिनके कार्यों की विशिष्टता द्वारा राज्य की एकता मे व द्धि की जाती है। आधुनिक साम्यवाद में वर्गविहीन समाज की स्थापना की बात की जाती है। इसमें वर्गों का कोई महत्त्व नहीं है।

5. पारिवारिक साम्यवाद के सम्बन्ध में भेद (Difference Regarding Communism of Families) : प्लेटो की साम्यवादी व्यवस्था में सम्पत्ति के साम्यवाद के साथ-साथ पत्नियों के साम्यवाद की भी व्यवस्था की गई है। किन्तु आधुनिक साम्यवाद में इस प्रकार की किसी व्यवस्था का प्रतिपादन नहीं किया गया है।

6. नगर राज्यों और अन्तरराष्ट्रीय का भेद (Difference Regarding City - State and Internationalism) प्लेटो का साम्यवाद यूनान के छोटे-छोटे नगर राज्यों को ध्यान में रखकर प्रतिपादित किया गया है। प्लेटो ने कभी विश्व व्यवस्था की बात नहीं की। अतः उनका साम्यवाद क्षेत्रवाद पर ही आधारित है। कार्लमार्क्स सम्पूर्ण विश्व के आर्थिक व राजनीतिक घटनाचक्र को ध्यान में रखते हुए अपने साम्यवादी सिद्धान्त की रचना की है। वे समस्त विश्व की एकता में विश्वास रखते हैं। अतः आधुनिक साम्यवाद विश्वस्तरीय है।

7. साम्यवाद में दार्शनिक शासकों की भूमिका में अन्तर (Difference Regarding the Role of the Working Class): प्लेटो के साम्यवाद में शासन का संचालन दार्शनिक शासक के नेत त्व में होगा और सामान्य नागरिक उसका अनुसरण करेंगे, जबकि आधुनिक साम्यवाद में दार्शनिक राजा का कोई स्थान नहीं मजदूरों का साम्यवादी दल तानाशाही से सम्पूर्ण शासन व्यवस्था पर नियन्त्रण रखता है।

8. साधन सम्बन्धी अन्तर (Difference Regarding Means) : प्लेटो ने अपने साम्यवाद की स्थापना के लिए किसी साधन का वर्णन नहीं किया है। आधुनिक साम्यवादी क्रान्ति या दूसरे हिंसात्मक साधनों के प्रयोग द्वारा साम्यवाद की स्थापना करने की बात कहते हैं।

9. वर्गों की संख्या में अन्तर (Difference in Number of Classes) प्लेटो ने समाज में तीन वर्ग दार्शनिक सैनिक तथा उत्पादक का वर्णन किया है, जबकि मार्क्स ने पूंजीपति व सर्वहारा वर्ग की ही व्याख्या की है। अतः प्लेटो के अनुसार समाज में तीन तथा आधुनिक साम्यवादी दो वर्गों की बात करते हैं।

10. श्रमिक वर्ग की महत्ता के सम्बन्ध में अन्तर (Difference Regarding the Importance of the Working Class) : प्लेटो के साम्यवाद में श्रमिक वर्ग को कोई महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त नहीं है, जबकि आधुनिक साम्यवाद में श्रमिक वर्ग को ही क्रान्ति का आधार माना गया है। आधुनिक साम्यवादी दर्शन तो श्रमिक वर्ग के इर्द-गिर्द ही घूमता है।

11. व्यावहारिक एवं अव्यावहारिक प्लेटो का साम्यवाद पूर्णतः अव्यावहारिक है और इसे व्यवहार में कभी भी लागू नहीं किया : जा सकता। आधुनिक साम्यवाद के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता, क्योंकि आधुनिक साम्यवाद अनेक देशों में व्यावहारिक रूप में लागू हुआ है। यद्यपि यह रूस में तो असफल रहा लेकिन चीन में इसका अब भी अस्तित्व है। अतः प्लेटो के साम्यवाद की तुलना में आधुनिक साम्यवाद अधिक व्यावहारिक है।

12. परिस्थितियों सम्बन्धी अन्तर (Difference Ragarding Circumstances) प्लेटो का साम्यवाद 5 वीं शताब्दी को एथेन्स की परिस्थितियों की उपज है, जबकि आधुनिक साम्यवाद 19 वीं सदी में ब्रिटेन में उत्पन्न औद्योगिक क्रान्ति का परिणाम है।

इस प्रकार अनेक असमानताओं के आधार पर टेलर का कथन उचित है- "रिपब्लिक में समाजवाद तथा साम्यवाद के बरे में बहुत कुछ कहे जाने के बावजूद वास्तव में इस ग्रन्थ में न तो समाजवाद है और न ही साम्यवाद।" इसलिए प्लेटो को प्रथम साम्यवादी मानना सर्वथा गलत है। प्लेटो में ऐसा कोई विशेष तत्त्व नहीं है, जो आधुनिक साम्यवाद से मेल खाता हो।




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