योगी आदित्यनाथ को कम्युनिस्ट बनाना चाहते थे उनके जीजा , लेकिन उसके बाद योगी कैसे बनें वामपंथी से हिंदुत्व के फायरब्रांड
जन्म और परवरिश
जन्म की तारीख - 5 जून 1972
जगह - पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड
पिता - आनंद सिंह बिष्ट
माता - सावित्री देवी
आनंद सिंह बिष्ट नाम के एक शख्स के घर पांचवीं बार बच्चे की किलकारी गूंजी। घरवालों ने इस बच्चे का नाम अजय सिंह बिष्ट रखा।
अजय सिंह बिष्ट आगे चलकर योगी आदित्यनाथ के नाम से जाने गए । आदित्यनाथ कुल सात भाई-बहन हैं।
आदित्यनाथ के पिता चाहते थे कि बैचलर्स करने के बाद वो उनके ट्रांसपोर्ट के बिजनेस में मदद करें, लेकिन बिजनेस में उनकी जा भी दिलचस्पी नहीं थी ।
10वीं पास होते ही उनका दाखिला भरत मंदिर इंटर कॉलेज में कराया गया। इसके बाद उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी से गणित में बैचलर्स की डिग्री हासिल की।
आदित्यनाथ को कम्युनिस्ट बनाना चाहते थे उनके जीजा
गढ़वाल यूनिवर्सिटी में पढ़ने के दौरान ही योगी अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा के लोगों के संपर्क में आ गए थे।
उनके एक जीजा जय प्रकाश लेफ्ट छात्र संगठन SFI के एक्टिव सदस्य थे। वह चाहते थे कि योगी आदित्यनाथ उनके वामपंथी छात्र संगठन में शामिल हो जाएं।
इसी समय योगी आदित्यनाथ की मुलाकात उनके एक सीनियर और ABVP कार्यकर्ता प्रमोद रावत से हुई। उन्होंने योगी आदित्यनाथ को ABVP से जुड़ने के लिए मना लिया।
यह 1990 का वह दौर था
जब देश में राम मंदिर आंदोलन चल रहा था। लालकृष्ण आडवाणी देशभर में रथ यात्रा कर रहे थे। इस आंदोलन से योगी आदित्यनाथ भी जुड़ गए।
नौकरी के बहाने घर छोड़कर गोरखपुर पहुंचे
राम मंदिर आंदोलन में हिस्सा लेने के दौरान योगी एक कार्यक्रम में महंत अवैद्यनाथ से मिले थे। आंदोलन के बाद से ही उनका मन घर में नहीं लग रहा था।
योगी आदित्यनाथ पहली मुलाकात में ही अपने गुरु अवैद्यनाथ से काफी प्रभावित हुए थे। 1993 में एक दिन अजय घर छोड़कर गोरखपुर पहुंच गए थे।
घर से निकलते समय उन्होंने नौकरी के लिए बाहर जाने की बात कही थी, लेकिन वह महंत अवैद्यनाथ के पास गोरखपुर आश्रम पहुंच गए।
एक साल तक उनके घरवालों को उनकी कोई खबर नहीं थी । कई बार आदित्यनाथ ने पिता को पत्र लिखा, लेकिन एक बार भी घर नहीं भेजा ।
15 फरवरी 1994 को महंत अवैद्यनाथ ने अजय सिंह बिष्ट को दीक्षा दी थी। तभी उनका नाम बदलकर योगी आदित्यनाथ रखा गया।
महंत अवैद्यनाथ ने आदित्यनाथ को क्यों बनाया उत्तराधिकारी?
योगी आदित्यनाथ ने 1992 के राम मंदिर आंदोलन में भाग लेकर हिंदू नेता के रूप में पहचान बना ली थी।
1998 में महंत अवैद्यनाथ ने योगी आदित्यनाथ की बढ़ती लोकप्रियता और क्षमता को देखकर उन्हें मठ और राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया।
वो कांड जिसने योगी को हीरो बना दिया
1999 में महराजगंज के पंचरूखिया में हुए गोलीकांड में सपा नेता तलत अजीज के गनर सत्यप्रकाश यादव की इस मामले में आरोप योगी आदित्यनाथ पर लगे थे।
कल्याण सिंह के नेतृत्व वाली BJP सरकार ने मामला CBCID को सौंपा। हालांकि, जांच के बाद योगी को क्लीन चिट दे दी गई।
2002 में मोहन मुंडेरा कांड हुआ, जिसमें एक लड़की के कथित रेप को मुद्दा बनाकर गांव के 47 अल्पसंख्यकों के घर में आग लगा दी गई। आरोप आदित्यनाथ पर लगे।
हिंदू युवा वाहिनी की सभा में 'एक विकेट के बदले दस विकेट गिराने' और 'हिंदुओं से घरों पर केसरिया झंडा लगाने' की बात कही गई तो योगी की आलोचना हुई।
ऐसी कई घटनाओं के बाद योगी गोरखपुर के हीरो हो गए । समर्थक नारे लगाने लगे |

2002 में बनाई हिंदू युवा वाहिनी, सियासी हैसियत बढ़ी
अप्रैल 2002 में योगी आदित्यनाथ ने सामाजिक और राजनीतिक हैसियत बढ़ाने के लिए 'हिंदू युवा वाहिनी' के नाम से एक संगठन बनाया।
गोरखपुर से शुरू होने वाला यह संगठन धीरे-धीरे पूर्वांचल के सभी जिलों में फैलने लगा। बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ने लगे।
योगी आदित्यनाथ ने 'हिंदू युवा वाहिनी' को बनाने का मुख्य उद्धेश्य हिंदू विरोधी, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों पर नियंत्रण करना बताया।
BJP से टिकट नहीं मिलने पर 2002 में राधामोहन दास अग्रवाल हिंदू महासभा की टिकट पर गोरखपुर शहरी सीट से चुनाव लड़े थे। उन्हें योगी आदित्यनाथ का समर्थन मिला और वो BJP कैंडिडेट को हटाकर जीत गए थे।
पहले चुनाव में आदित्यनाथ को मिली थी हार
योगी आदित्यनाथ अपने कॉलेज के समय से ही छात्र राजनीति में सक्रिय थे। ABVP से जुड़े होने के बाद भी उन्हें यूनिवर्सिटी चुनाव में टिकट नहीं मिला।
इसके बाद उन्होंने गढ़वाल यूनिवर्सिटी से निर्दलीय पर्चा दाखिल किया, लेकिन अपनी जिंदगी के पहले ही चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
1998 में महज 26 साल की उम्र में योगी आदित्यनाथ पहला संसदीय चुनाव गोरखपुर से लड़े, जिसमें 26 हजार वोटों से उनकी जीत हुई।
1999 में एक बार फिर से लोकसभा चुनाव में की जीत हुई। तब से योगी आदित्यनाथ 2014 तक लगातार पांच बार गोरखपुर से सांसद बने ।
2017 के UP चुनाव के बाद कई बड़े चेहरों की मुख्यमंत्री बनने की होड़ लगी, लेकिन बाजी योगी आदित्यनाथ जीते और UP को नया मुख्यमंत्री मिला।

योगी आदित्यनाथ से जुड़े केस और संपत्ति की जानकारी
फरवरी 2022 में आदित्यनाथ के पास घोषित संपत्ति 1.54 करोड़ रुपए की है। इसमें कैश इन हैंड, बैंक बैलेंस और फिक्स डिपॉजिट शामिल हैं।
इसके अलावा आदित्यनाथ के पास 1 लाख रुपए का रिवॉल्वर और 80 हजार की राइफल है। साथ ही उनके पास 75 हजार रुपए का ईयर रिंग और सोने की चेन है।
2017 में योगी आदित्यनाथ ने अपने पास 95.98 लाख रुपए की संपत्ति होने की घोषणा की थी। साफ है कि 5 साल में 59 लाख रुपए उनकी संपत्ति बढ़ी है।
2014 के लोकसभा चुनाव तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास तीन लग्जरी गाड़ियां थी और अब एक भी नहीं है। उनके पास कोई अचल संपत्ति नहीं है।
मार्च 2022 में आदित्यनाथ पर कोई पेंडिंग केस नहीं है। 2014 में सद्भाव बिगाड़ने, हत्या के प्रयास, धमकी आदि के आरोप में उनपर 6 केस चल रहे थे।
जीत के साथ CM योगी के नाम दर्ज हुए कई रिकॉर्ड
UP में 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले BJP के पहले मुख्यमंत्री बने ।
2007 में मुलायम सिंह के बाद बतौर CM चुनाव लड़ने वाले पहले उम्मीदवार ।
34 साल से चल रहे नोएडा फैक्टर को तोड़ कर जीत हासिल करने वाले मुख्यमंत्री |
योगी लगातार दूसरी बार जीत हासिल करने वाले पांचवें CM हैं। इसके पहले 1957 में संपूर्णानंद, 1962 में चंद्रभानु गुप्ता, 1974 में हेमवती नंदन बहुगुणा और 1985 में एन. डी. तिवारी भी ऐसा कर चुके हैं।
'एंग्री यंग मैन' की छवि से राजनीति में एंट्री
मार्च 1994
गोरखपुर के गोलघर बाजार में इंटर कॉलेज के कुछ छात्र कपड़ा खरीदने गए थे।

यहां विवाद होने पर दुकानदार ने छात्रों पट रिवॉल्वर तान दी। लड़के भाग गए।
युवा संन्यासी के साथ 50 से ज्यादा लड़कों ने गोरखपुर SSP आवास के साथ पूरे जिले में प्रदर्शन किया।
इस घटना ने योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं के बीच एंग्री यंग मैन के रूप में स्थापित किया था।
लोगों को योगी आदित्यनाथ में हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे महंत दिग्विजयनाथ की छवि दिखने लगी और वो उनके साथ जुड़ते गए।
26 साल के योगी, सबसे युवा सांसद बने। पहला चुनाव वह 26 हजार वोटों से जीते थे।
साल 2016
इस कहानी के 4 किरदार हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य, गाजीपुर के सांसद मनोज सिन्हा, तब की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ |
दिसंबर 2016 में उत्तर प्रदेश सदन के एक कमरे में बैठे यूपी BJP अध्यक्ष केशव मौर्य को एक फोन आया। एक सर्वे के बारे में बताया, किसी TV चैनल का था ।

योगी ने कई बड़े नेताओं को किया साइडलाइन
मार्च 2017: भाजपा का मैनिफेस्टो आया, योगी की फोटो नहीं लगी थी।
25 फरवरी 2017 को सुषमा स्वराज ने योगी आदित्यनाथ को फोन कर पार्लियामेंट्री डेलीगेशन के साथ विदेश जाने के लिए कहा। इसके लिए 8 मार्च को वे दिल्ली पहुंच गए थे।
योगी आदित्यनाथ दिल्ली पहुंचे
10 मार्च 2017 योगी को एक शख्स ने उनका पासपोर्ट वापस करते हुए कहा- अब आपको विदेश नहीं जाना है।
11 मार्च 2017, विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 312 सीटें जीत ली। NDA 325 पर पहुंचा गया। केशव, राजनाथ, मनोज सिन्हा समेत भाजपा के बड़े मंत्री खुशियां मानाने लगे।
मनोज सिन्हा से किसी ने कहा उन्हें हरी झंडी मिल गई है। बाद में पता चला उन्हें सीएम कैंडिडेट्स की लिस्ट में शामिल नहीं किया गया।
18 मार्च की सुबह. दिल्ली एयरपोर्ट केशव के पीछे प्रदेश प्रभारी ओम माथुर और संगठन मंत्री सुनील बंसल योगी के साथ एक सहयोगी
CM पद के 2 उम्मीदवाद, दो अलग तरह से स्वागत
फैसले की वो शाम ...18 मार्च शाम 5:30 बजे। 19 मार्च 2017, योगी आदित्यनाथ ने सीएम की शपथ ली |
मुख्यमंत्री बनने के एक महीने बाद ही योगी की तुलना दिग्गज नेताओं से होने लगी। हिन्दूवादी नेता की छवि, अयोध्या-मथुरा- काशी पर ज्यादा फोकस रहा।
माफियाओं की अवैध बिल्डिंग पर बुल्डोजर चलवाकर योगी बन गए बुल्डोजर बाबा
















