कश्मीर फाइल्स के बाद क्यों उठा जनसंहार का मुद्दा || जानिए विश्व के सबसे बड़े जनसंहार के बारे में
' जनसंहार ' अंग्रेजी में इसे ' जेनोसाइड ' कहते है | हाल ही में आपने इस शब्द को मीडिया एंव अन्य सोशल मीडिया प्लेटफोर्म के माध्यम से सुना होगा | जैसे कश्मीर फाइल्स के रिलीज के बाद एंव वर्तमान में रूस - युक्रेन युद्ध के छिड़े जाने से इस शब्द ने एक बार फिर भारत समेत दुनिया भर में जिन्दा क्र दिया है |
जनसंहार क्या है?
संयुक्त राष्ट्र संघ के पूर्व महासचिव, नोबेल पीस प्राइज विजेता कोफी अन्नान ने कहा '' जनसंहार तब शुरू होता है जब किसी इंसान को मारा जाता है। उसके कुछ गलत करने पर नहीं, बल्कि केवल उसके किसी समुदाय से होने पर। ''
1944 में पोलैंड के रहने वाले वकील रेफायल लेमकिन ने जेनोसाइड शब्द का इस्तेमाल पहली बार अपनी किताब 'एक्सिस रूल इन ऑक्यूपाइड यूरोप' में किया था।
इस शब्द का इस्तेमाल हिटलर की नाजी पॉलिसीज के जरिए यहूदियों की हत्या और कुछ अन्य जाति आधारित हत्याओं पर रोशनी डालने के लिए किया गया था।
संयुक्त राष्ट्र संघ ने जनसंहार को किया परिभाषित
1946 में संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जेनोसाइड को अपराध माना था।
किसी समुदाय को खत्म करने के ये तरीके जनसंहार कहलाते हैं-
a. किसी समुदाय के लोगों को बेरहमी से मारना।
b. जानबूझकर किसी समुदाय के लोगों पर ऐसे हालात थोपना, जिससे उनकी जिंदगी पर किसी भी तरह का खतरा आए ।
c. किसी समुदाय के लोगों को शारीरिक या मानसिक क्षति पहुंचाना।
d. ऐसे नियम लाना जिससे उस समुदाय बच्चों का पैदा होना मुश्किल हो जाए।
कश्मीर में पंडितों के साथ क्या हुआ था ?
कश्मीर में सरकार
19 जनवरी को फारूक अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री पद छोड़ा। फिर राष्ट्रपति शासन लगा और राज्यपाल जगमोहन श्रीनगर पहुंचे।
केंद्र में सरकार
भारतीय जनता पार्टी के समर्थन वाली नेशनल फ्रंट की सरकार थी, प्रधानमंत्री थे वीपी सिंह |
क्या था मामला
कट्टरपंथी मुसलमानों ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI की शह पर कश्मीरी पंडितों को 3 ऑप्शन दिए- 1. धर्म परिवर्तन 2. कश्मीर छोड़ना 3. जान गंवाने का फिर अचानक हजारों की भीड़ ने पंडित समुदाय के लोगों का कत्लेआम किया।
कितनों की हत्या
जम्मू कश्मीर सरकार के मुताबिक, 1989 2004 के बीच कश्मीर में 1400 लोगों की हत्या हुई। इनमें 219 लोग पंडित समुदाय से थे। कश्मीरी पंडितों के संगठन पान कश्मीर के मुताबिक 1990 से अब तक करीब 1341 पंडितों की हत्या हुई है।
पलायन
इंटरनेशनल डिस्प्लेसमेंट मॉनिटरिंग सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक 1990 से 2010 तक घाटी छोड़ने वाले पंडितों की संख्या करीब 2.5 लाख थी।
शुरुआत में इसे समुदाय विशेष का पलायन (exodus ) कहा गया और अब इसे जनसंहार कहा जा रहा है।
होलोकॉस्ट या यहूदियों का जनसंहार
• मशहूर यहूदी पॉलिटिकल फिलॉसफर हन्ना आरेंट का मानना है कि यहूदी बेशक पूरे यूरोप में ज्यादा पैसे वाले हों, लेकिन उनके पास राजनीतिक ताकत कभी नहीं थी ।
1918 प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी की हार हुई तो उसका ठीकरा भी नेताओं ने यहूदियों के सिर फोड़ दिया।
• खराब अर्थव्यवस्था ने जर्मनी को कंगाल कर दिया। 1930 के बाद सत्ता में आई नाजी पार्टी ने लोगों के मन में यहूदियों के खिलाफ नफरत पैदा की।
• बच्चों से लेकर बूढ़ों के दिमाग में ये बैठा दिया कि यहूदी किसी भी तरह से इंसानियत के लायक नहीं हैं, वो सिर्फ नफरत के लिए बने हैं।
• नतीजा यह रहा कि हिटलर के हुक्म पर यूरोप में 60 लाख यहूदियों को मौत के घाट उतार दिया गया। उन्हें तरह-तरह से यातनाएं दी गईं। बच्चों से लेकर बूढ़ों तक को गैस चैंबर्स में डालकर मारा गया। हालात यह थे कि 1945 तक यूरोप में हर तीन में से दो यहूदी मारे जा चुके थे।
नानकिंग जनसंहार
'1937 के सेकेंड वर्ल्ड वॉर में जापानी सेना ने शंघाई पर हमला कर उसे जीतने के बाद नानकिंग की ओर कूच किया।
• जापान की सेना ने नानकिंग में जो तबाही मचाई, उसके बारे में पढ़कर और सुनकर आज भी लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इस घटना को रेप ऑफ नानकिंग भी कहा जाता है।
• जापान ने नानकिंग शहर में करीब 3 लाख लोगों को बेरहमी से मार दिया। बड़ी संख्या में महिलाओं से जापानी सैनिकों ने रेप किया था।
• आयरिस चैंग की किताब 'दि रेप ऑफ नानकिंग सिटी की मानें तो जापानी सैनिकों द्वारा करीब 80,000 औरतों के साथ बलात्कार किया गया।
• जापानी सैनिकों ने मानवता को शर्मसार करते हुए रेप के बाद महिलाओं के स्तन तक काट दिए थे। साथ ही उन्हें कील के सहारे दीवारों में जड़ दिया था।
• यह दुनिया के सबसे बड़े जनसंहार में से एक था। जापान पर इस जनसंहार के लिए माफी मांगने का दबाव बनाया जाता रहा है। हालांकि जापान हमेशा युद्ध कुछ एक्शंस पर खेद जताता है, लेकिन कभी माफी नहीं मांगी।
रवांडा जनसंहार
'1994 का रवांडा जनसंहार 100 दिनों तक चला इसमें करीब 8 लाख लोगों का कत्लेआम किया गया था।
• रवांडा के अल्पसंख्यक समुदाय टुत्सी और बहुसंख्यक तू के बीच आपसी लड़ाई छिड़ी। बहुसंख्यकों ने न सिर्फ टुत्सी समुदाय के लोगों की बेरहमी से हत्या की बल्कि उनकी औरतों का रेप भी किया।
• लड़ाई का मुख्य कारण देश की सत्ता पर लंबे समय तक अल्पसंख्यक टुत्सियों का राज था। जो बहुसंख्यक हुतू को पसंद नहीं था। 1959 में हुतू विद्रोहियों ने टुत्सी राजतंत्र का तख्तापलट कर दिया।
• कुछ दिनों की शांति के बाद एक बार फिर से 1990 में कत्लेआम शुरू हुआ। इस बार टुत्सी समुदाय के लोगों ने रवांडा पेट्रिएटिक फ्रंट नाम से एक लड़ाका संगठन बनाकर हुतू समुदाय के खिलाफ जंग शुरू की।
• इसी के बाद यह जंग जनसंहार में बदल गई। बाद में 1993 में सरकार के साथ टुत्सी विद्रोहियों ने समझौता कर लिया और देश में शांति की स्थापना हुई।
आर्मेनिया जनसंहार
• कभी USSR का हिस्सा रहा आर्मेनिया यूरोप और एशिया के बीच एक छोटा सा खूबसूरत देश है, लेकिन इस देश का नाम सुनते ही सबसे पहले यहां के लोगों के साथ हुई बर्बरता की कहानी याद आती है।
1915 में 24 अप्रैल के दिन आर्मेनिया में एक जनसंहार की शुरुआत हुई, जो 3 साल चला। इस जनसंहार के नेतृत्व का आरोप तुर्की की ऑटोमान सरकार पर लगा। इस सरकार ने 15 लाख लोगों की क्रूर हत्याएं करवाईं। ने
• प्रथम विश्व युद्ध में ऑटोमान सरकार जर्मनी के साथ थी। तुर्की ने आर्मेनियंस पर आरोप लगाए कि युद्ध में वो जर्मनी की बजाय दुश्मन देश रूस का साथ दे रहे हैं।
• इसके बाद 1915 में आर्मेनियाई मूल के लोगों को तुर्की से निकाला जाने लगा। इस दौरान तुर्की सरकार की सेना ने उन्हें या तो मार डाला, या तुर्की की सीमा से बाहर फेंक दिया।
• सेना ने महिलाओं, बच्चों और बूढों से गुलामी कराई और उन्हें सीरिया के रेगिस्तान में नंगे पैर 'मौत की यात्रा' यानी डेथ मार्च पर भेज दिया। तुर्की पर जब विश्व के बड़े देश जनसंहार का आरोप लगाते हैं तो वह इससे इनकार करता है।
जनसंहार के दोषियों को सजा
जनसंहार या वॉर क्राइम्स के आरोपियों को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस सजा देता है। कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्राइब्यूनल्स दोषियों को सजा देता है।
नानकिंग नरसंहार के दोषियों का टोक्यो ट्रायल
जनरल हिंसाओ तानी को नानकिंग जनसंहार के लिए की गई। जबकि उस समय जापानी मिलिट्री के प्रमुखों का ट्रायल ही नहीं हुआ। कहा जाता है कि प्रिंस असाका को जापान के शाही परिवार का हिस्सा होने के कारण सजा से बचा लिया गया।
यहूदियों के दोषियों को न्यूरेमबर्ग ट्रायल
• सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद दुश्मन देश की सेना के पहुंचने से पहले ही हिटलर ने आत्महत्या कर ली थी। वहीं, न्यूरेमबर्ग ट्रायल के नाम से मशहूर 13 मिलिट्री ट्राइब्यूनल 1945 से 1949 के बीच बनाए गए, जिसमें पकड़े गए बड़े रैंक के कई नाजी अफसरों को सजा दी गई थी।
• जर्मनी पर आरोप लगा कि 6 से 7 हजार आरोपियों में से केवल 50 को ही सजा के अंजाम तक पहुंचाया गया।
• इजराइल के बनने के बाद वहां की खुफिया एजेंसी 11 मई 1960 को एडोल्फ आईकमैन नाम के एक नाजी को अर्जेंटीना से पकड़ कर लाई, जिसे 1962 में मौत की सजा दी गई।
जब अमेरिका ने खून से रंगे अपने हाथ
• सद्दाम हुसैन की सरकार के दौरान इराक में अबू गरीब शहर में एक जेल बनाई गई थी । अबू गरीब सबसे कुख्यात जेलों में से एक थी।
• इस जेल का इस्तेमाल लगभग 50,000 पुरुषों और महिलाओं को खराब हालात में रखने के लिए किया जाता था। यह जेल बगदाद से 32 किलोमीटर पश्चिम में 280 एकड़ भूमि पर स्थित थी।
• सद्दाम हुसैन की सरकार के पतन के बाद जेल नष्ट हो गई। हालांकि अमेरिकी सेना ने इसे फिर से बनाया और एक सैन्य जेल में बदल दिया।
• 2003 में शुरू हुए इराक वॉर के दौरान यूएस आर्मी और सीआईए के ऑफिसर्स ने इराक की अबू गरीब जेल में कैदियों को काफी टॉर्चर किया।
• कैदियों को बिना कपड़ों के बॉक्स पर खड़ा करने के बाद उनके सिर को ढंक दिया जाता था। इसके बाद उनके हाथ-पैर के अंगूठों और प्राइवेट पार्ट्स पर इलेक्ट्रिक शॉक दिया जाता था।
• टॉर्चर स्कैंडल के दौरान जेल में 3,800 कैदी थे। स्कैंडल में 11 यूएस सोल्जर्स दोषी पाए गए थे।