लोक नीति के कार्यक्षेत्र की चर्चा कीजिए।
लोक नीति का कार्यक्षेत्र
"लोक व नीति के विचार" और "लोक नीति का स्वरूप' शीर्षकों के अंतर्गत लोक नीति के कार्यक्षेत्र पर काफी चर्चा की जा चुकी है। लोक नीति अध्ययन और अभ्यास का एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है। अनुसंधान (Enquiry ) के क्षेत्र के रूप में जब से लोक नीति का उद्भव हुआ, तब से इसके सैद्धांतिक कार्यक्षेत्र और अनुप्रयोग का विस्तार हुआ है। समकालीन प्रवृत्तियों में परिदृश्यों और बर्हिवेशनों का विकास लोक नीति के अध्ययन का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। लोक क्षेत्र के कार्यक्षेत्र और वास्तविक आकार में प्रौद्योगिकी, सामाजिक संगठन, उद्योगीकरण और शहरीकरण में निरंतर बढ़ती जटिलता की अनुक्रिया के फलस्वरूप सभी विकासशील देशों में काफी वृद्धि हुई है। वर्तमान में लगभग सभी सरकारों, विशेष रूप से विकासशील देशों की सरकारों के कार्य उल्लेखनीय रूप से बढ़ गए हैं। अब ये राष्ट्र निर्माण और सामाजिक-आर्थिक प्रगति जैसे ज्यादा जटिल कार्यों से संबद्ध हैं। आज सरकार शांति बनाए रखने, विवादों की मध्यस्थ, रोज़मर्रा के सामान और सेवाओं की प्रदाता मात्र नहीं है, अब यह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रमुख नवप्रवर्तक, सामाजिक और आर्थिक कार्यक्रमों की निर्धारक, मुख्य कोषाध्यक्ष (Guarantor) तथा बड़े पैमाने के उद्यमों की मुख्य गारंटर है।
कई विकासशील देशों में, सरकारों पर राष्ट्रीय विकास में तेजी लाने, नवीनतम और संगत प्रौद्योगिकीय नवप्रवर्तनों का प्रयोग करने, अनिवार्य संस्थागत परिवर्तनों को अंगीकार करने और उन्हें बढ़ावा देने, राष्ट्रीय उत्पादन को अभिवष्द्ध करने, मानव और अन्य संसाधनों का पूर्ण प्रयोग करने का अत्यधिक दबाव है। अतः इन प्रवृत्तियों और विकास कार्यों ने लोक नीति के आकार और कार्यक्षेत्र दोनों को बढ़ावा दिया है।
माइकल टेट्ज़ (Michael Teitz, 1968) ने नागरिकों के जीवन चक्र के संदर्भ में लोक नीति फैलाव (Outreach ) का वर्णन किया है।
"आधुनिक शहरी मानव लोक वित्त सहायता प्राप्त अस्पतालों में जन्म लेता है, लोक सहायता प्राप्त विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करता है, अपने जीवन का काफी समय लोक रूप से बनाए गए परिवहन सुविधाओं में यात्रा करने पर व्यतीत करता है, अर्द्ध-लोक दूरभाष प्रणाली के डाक घर के माध्यम से संचार करता है, लोक पेय जल पीता है, लोक निष्कासन प्रणाली के माध्यम से अपने कूड़े करकट का निपटान करता है। अपने पुस्तकालयों में पुस्तकें पढ़ता है, लोक उद्यानों में पिकनिक मनाता है। लोक पुलिस, अग्नि और स्वास्थ्य • प्रणालियों द्वारा सुरक्षित रहता है। अंततः फिर अस्पताल में मरता है और हो सकता है लोक कब्रिस्तान में दफ़नाया भी जाए। अपनी रोज़मर्रा की दिनचर्या के बावजूद वैचारिक रूढ़िवादी इन और अन्य कई लोक सेवाओं पर सरकार के उल्लंघनीय फैसलों के साथ बंधे हुए हैं।"
लोक नीति जनता और उनकी समस्याओं पर केंद्रित होती है। हाइडेनहैमर (Hidemer 1990) ने कहा है, 'सरकारें कैसे, क्यों, कितने प्रभावशाली ढंग से कार्यवाही और अक्रिया की क्रियाविधियों का अनुशीलन करती हैं, लोक नीति इसी का अध्ययन है।
डाई (Dye, op. cit.) ने प्रतिपादित किया है-सरकारें क्या करती हैं, ऐसा क्यों करती है और इससे क्या फर्क पड़ता है. यह लोक नीति का अध्ययन है।"
यहीं से विवाद का मुद्दा उठा कि हम सभी अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में असंख्य लोकनीतियों से काफी प्रभावित होते हैं। लोक नीति का क्षेत्र महत्त्वपूर्ण से तुच्छ (Trivial) तक काफी व्यापक व विशाल है। आज, लोक नीतियाँ, रक्षा, पर्यावरण संरक्षण, चिकित्सा देखभाल और स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, कराधान, मुद्रास्फीति, विज्ञान और प्रौद्योगिकी इत्यादि जैसे मौलिक क्षेत्रों में दृष्टिगत होती हैं। लोक नीति का निरंतर विस्तृत होता क्षेत्र विधायी अधिनियमों और उपायों में भी देखा जा सकता है। नीतियों से सरकार कुछ गतिविधियों के संचालन पर नियंत्रण रख सकती है। सरकारी खर्च सरकार की गतिविधियों का एक सामान्य सूचक है।
निष्कर्ष
यह देखा जा सकता है कि समाज की निरंतर बढ़ रही जटिलता की अनुक्रिया में लोक नीति के क्षेत्र को काफी महत्त्व प्राप्त हुआ है। यह केवल सरकारी गतिविधि के कारणों व परिणामों के विवरण और स्पष्टीकरण से संबद्धित नहीं है, बल्कि लोक नीति को आकार देने वाले बलों के वैज्ञानिक ज्ञान के विकास से भी सरोकार रखती है। लोक नीति का अध्ययन अध्ययनगत विषय की सामाजिक बुराइयों को समझने में हमारी मदद करता है। लोक पद्धति के भूत से भविष्य में बढ़ने के लिए लोक नीति महत्त्वपूर्ण कार्य प्रणाली है।
उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण के वर्तमान दौर में सरकार की भूमिका बदल गई है। अब सरकार की योग्यता नीतियों को तैयार करने और उन्हें कार्यान्वित कर पाने के सामर्थ्य अतीत में, लोकनीति सम्बन्धी अध्ययन पर राजनीति विज्ञान के शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों का प्रभाव था जो मुख्य रूप से सरकार की संस्थागत संरचना और दार्शनिक औचित्य पर ध्या केन्द्रित करते थे। नीतियों पर शायद ही ठीक से गौर किया जाता था। राजनीति विज्ञान कुछ हद तक विभिन्न राजनीतिक संस्थाओं और समूहों की राजनीतिक शक्ति हासिल करने में सफलता से सम्बन्धित गतिविधियों पर आधारित होता था। उन संगठनों द्वारा मुख्य उद्देश्य के रूप में नीति-निर्माण के क्षेत्र में निभाई गई भूमिका पर शायद ही गौर किया जाता था। अभी भी नीति राजनीतिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण तत्व है।
नीति विश्लेषण के एक अग्रणी विद्वान थॉमस गई का कहना है कि “परम्परागत (राजनीति विज्ञान) अध्ययन उन संस्थाओं की व्याख्या करते हैं, जिनमें लोकनीति संघटित हुई है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि महत्वपूर्ण संस्थागत व्यवस्थाओं और लोकनीति के सार के बीच संपर्कों की खोज नहीं की गई है।" वे बाद में उम्मीद जाहिर करते हैं। आज राजनीति विज्ञान का रूझान लोकनीति की तरफ बढ़ रहा है, सरकारी गतिविधि के कारणों और परिणामों के विवरण और परिभाषा की तरफ। जिन प्रक्रियाओं के जरिए लोकनीति निर्धारित हुई, उनके प्रति राजनीति विज्ञान का रूझान जहाँ बढ़ा है, वहीं लोक प्रशासन के ज्यादातर विद्यार्थी स्वीकार करेंगे कि लोक सेवक स्वयं नीतियों को आकार देने में गहराई के साथ जुड़े रहे हैं। लोक प्रशासन का अध्ययन अब नीतियों के क्रियान्वयन की मशीनरी पर ध्यान केन्द्रित करने लगा है। इसमें लोक प्राधिकरणों के संगठन, लोक सेवकों के व्यवहार और अधिक से अधिक संसाधन आवंटन की विधि, प्रशासन तथा समीक्षा को सम्मिलित किया जा रहा है। एक ऐसी अभिवृत्ति के साथ नीति के संघटन के तरीकों का निर्धारण कर पाना काफी कठिन है, हालांकि सामान्यता माना जाता है कि नीति- क्रियान्वयन का अनुभव नीति-निर्धारण की प्रक्रिया के लिए उपयोगी होता है। लेकिन लोकनीति लोक प्रशासन की तुलना में अधिक 'राजनीति' होती है। यह राजनीति विज्ञान का जनता के मामलों में प्रयोग का प्रयत्न है, लेकिन लोक प्रशासन के क्षेत्र में विभिन्न प्रक्रियाओं के साथ जिसका सरोकार जुड़ा होता है।
संक्षेप में, लोकनीति सम्बन्धी अतीत के अध्ययन पर राजनीति विज्ञान एवं लोक प्रशासन के विद्वानों का प्रभाव रहा है जो नीति की विषय वस्तु, संघटन की प्रक्रिया और उसके क्रियान्वयन पर अधिक केन्द्रित रहा है। लोकनीति के अध्ययन का विकास सामाजिक विज्ञान की एक नई शाखा; तथाकथित नीति विज्ञान के रूप में हुआ। नीति विज्ञान की इस अवधारणा को पहली बार हेराल्ड लासवेल ने 1951 में संघटित किया। आज सामाजिक रूप से प्रांसगिक ज्ञान की नई तथा सहज आकांक्षाओं की तुलना में नीति विज्ञान काफी दूर रह गया है।