भारतीय संविधान की विकास यात्रा ( The Journey of Indian Constitution )
इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से आप आप भारतीय संविधान की विकास यात्रा को निचे दिए बिन्दुओं के माध्यम से समझ सकते है -
Content :-
• संविधान क्या है?
• संविधान का महत्त्व
• संवैधानिक विकास के चरण
● रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773
● एक्ट ऑफ सेटलमेंट, 1781
● पिट्स इंडिया एक्ट 1784
● चार्टर अधिनियम, 1813
● चार्टर अधिनियम, 1833
● चार्टर अधिनियम, 1853
● भारत शासन अधिनियम, 1858
● भारतीय परिषद् अधिनियम, 1861
● भारतीय परिषद् अधिनियम, 1892
● भारतीय परिषद् अधिनियम (मॉर्ले-मिंटो सुधार), 1909
● भारत शासन अधिनियम, 1919
● भारत शासन अधिनियम, 1935
● भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947
● स्वतंत्रता पूर्व गठित अंतरिम मंत्रिमंडल (1946)
● स्वतंत्र भारत का पहला मंत्रिमंडल (1947)
● बाल्कन प्लान / डिकी बर्ड प्लान / इस्मा प्लान
● अभ्यास प्रश्न
संविधान क्या है? (What is Constitution?)
संविधान नियमों, उपनियमों का एक ऐसा लिखित दस्तावेज होता है, जिसके अनुसार सरकार का संचालन किया जाता है। यह देश की राजनीतिक व्यवस्था का बुनियादी ढाँचा निर्धारित करता है। संविधान राज्य की विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की स्थापना, उनकी शक्तियों तथा दायित्वों का सीमांकन एवं जनता तथा राज्य के मध्य संबंधों का विनियमन करता है।
प्रत्येक संविधान, उस देश के आदर्शों, उद्देश्यों व मूल्यों का दर्पण होता है। संवैधानिक विधि देश की सर्वोच्च विधि होती है, तथा सभी अन्य विधियाँ इसी पर आधारित होती हैं। संविधान एक जड़ दस्तावेज नहीं होता, बल्कि यह निरंतर पनपता रहता है। वर्षों से चली आ रही परम्परायें भी देश के शासन में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं।
संविधान का महत्त्व (Importance of Constitution)
• संविधान यह सुनिश्चित करता है कि कानून कौन बनाएगा ?
• समाज में शक्ति के मूल वितरण को स्पष्ट करता है।
• समाज में निर्णय लेने की शक्ति किसके पास होगी तथा सरकार का निर्माण कैसे होगा, निर्धारित करता है।
• यह समाज की आकांक्षाओं एवं लक्ष्यों को अभिव्यक्त करता है एवं न्यायपूर्ण समाज की स्थापना हेतु उचित परिस्थितियों के निर्माण को सुनिश्चित करता है (न्यूनतम समन्वय व आपसी विश्वास हेतु )
• यह समाज को बुनियादी पहचान प्रदान करता है।
• संविधान, राजव्यवस्था के तीन प्रमुख अंगों कार्यपालिका, विधायिका एवं न्यायपालिका की स्थापना करता है तथा उनकी शक्तियों एवं अधिकारों को परिभाषित करता है।
• यह राज्य के अंगों के अधिकार को मर्यादित कर उन्हें निरंकुश एवं तानाशाह होने से रोकता है।
• संविधान एक आइना है जिसमें उस देश के भूत, वर्तमान और भविष्य की झलक मिलती है।
संविधान और राजव्यवस्था के अनेक उपादान ब्रिटिश शासन से ग्रहण किये गए हैं, ब्रिटिशों द्वारा समय-समय पर लाए गए अधिनियमों ने भारतीय सरकार और प्रशासन की विधिक रूपरेखा / ढाँचे को तैयार किया है।
सवैधानिक विकास के चरण (Stages of Constitutional Development)
● रेग्युलेटिंग एक्ट 1773 (Regulating Act, 1773)
इस अधिनियम के द्वारा भारत में कंपनी के शासन हेतु पहली बार एक लिखित संविधान प्रस्तुत किया गया। भारतीय संवैधानिक इतिहास में इसका विशेष महत्त्व यह है कि इसके द्वारा भारत में कंपनी के प्रशासन पर ब्रिटिश संसदीय नियंत्रण की शुरुआत हुई।
इस अधिनियम के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं-
• बंबई तथा मद्रास प्रेसिडेंसी को कलकत्ता प्रेसिडेंसी के अधीन कर दिया गया।
• कलकत्ता प्रेसिडेंसी में गवर्नर जनरल व चार सदस्यों वाले परिषद् के नियंत्रण में सरकार की स्थापना की गई।
• कलकत्ता में एक सुप्रीम कोर्ट की स्थापना (1774) की गई. जिसके अंतर्गत बंगाल, बिहार, उड़ीसा शामिल थे। सर एलिजाह इम्पे को इसका प्रथम मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
● भारत के सचिव की पूर्व अनुमति पर गवर्नर जनरल तथा उसकी परिषद् (4 सदस्य) को कानून बनाने का अधिकार प्रदान किया गया।
● अब बंगाल के गवर्नर को तीनों प्रेसिडेंसियों का 'गवर्नर जनरल' कहा जाने लगा।
● इस एक्ट के तहत बनने वाले बंगाल के प्रथम गवर्नर जनरल लॉर्ड वारेन हेस्टिंग्स' थे।
● इस एक्ट के तहत कंपनी के कर्मचारियों को निजी व्यापार व भारतीय लोगों से उपहार रिश्वत लेने को प्रतिबंधित कर दिया गया।
● कंपनी पर ब्रिटिश कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स (कंपनी की गवर्निंग बॉडी) का नियंत्रण बढ़ गया और अब भारत में इसके राजस्व, नागरिक और सैन्य मामलों की जानकारी ब्रिटिश सरकार को देना आवश्यक कर दिया गया।
● व्यापार की सभी सूचनायें क्राउन को देना सुनिश्चित किया गया।।
एक्ट ऑफ सेटलमेंट, 1781 (Act of Settlement, 1781)
• रेग्युलेटिंग एक्ट की कमियों को दूर करने के उद्देश्य से यह एक्ट लाया गया था। इसके तहत, कलकत्ता की सरकार को बंगाल, बिहार और उड़ीसा के लिये भी विधि निर्माण की शक्ति प्रदान की गई।
• इस अधिनियम का प्रमुख प्रावधान गवर्नर जनरल की परिषद् तथा सर्वोच्च न्यायालय के बीच के संबंधों का सीमांकन करना था।
• इस अधिनियम द्वारा सर्वोच्च न्यायालय पर यह रोक लगा दी गई कि वह कंपनी के कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं कर सकता है. जो उन्होंने एक सरकारी अधिकारी की हैसियत से की हो। अर्थात्. कंपनी के अधिकारी शासकीय रूप से किये गए अपने कार्य के लिये सर्वोच्च न्यायालय के कार्य क्षेत्र से बाहर हो गए।
• न्यायालय की अपनी आज्ञाएँ तथा आदेश लागू करते समय सरकार के कानून बनाने तथा उसका क्रियान्वयन करते समय भारत के सामाजिक, धार्मिक रीति-रिवाज़ों का सम्मान करने का निर्देश दिया गया।
पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 (Pitt's India Act, 1784)
• इस एक्ट को ब्रिटिश संसद में तत्कालीन प्रधानमंत्री विलियम पिट द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इस अधिनियम की मुख्य विशेषता यह थी कि 'निदेशक मंडल' (कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स) को कंपनी के व्यापारिक मामलों के अधीक्षण (monitoring) की अनुमति तो दे दी गई, लेकिन राजनीतिक मामलों के प्रबंधन के लिये 'नियंत्रण बोर्ड' (बोर्ड ऑफ कंट्रोल) नाम से एक नए निकाय का गठन किया गया। इस प्रकार, भारत में द्वैध शासन व्यवस्था की शुरुआत हुई ।
• यह अधिनियम दो प्रमुख कारणों से महत्त्वपूर्ण था - पहला, भारत में कंपनी के अधीन क्षेत्रों को सर्वप्रथम 'ब्रिटिश आधिपत्य क्षेत्र' कहा गया; दूसरा, ब्रिटिश सरकार को भारत में कंपनी तथा प्रशासन संबंधी कार्यों पर पूर्ण नियंत्रण प्रदान किया गया।
• गवर्नर जनरल की परिषद् की सदस्य संख्या 4 से घटाकर 3 कर दी गई। साथ ही, मद्रास तथा बंबई की सरकारों को पूरी तरह से बंगाल सरकार के अधीन कर दिया गया।
चार्टर अधिनियम, 1813 ( Charter Act, 1813 )
• इस एक्ट के द्वारा कंपनी के अधिकार पत्र को 20 वर्षों के लिये - बढ़ा दिया गया व कंपनी के भारत के साथ व्यापार करने के एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया।
• लेकिन कंपनी का चीन के साथ व्यापार और चाय के व्यापार पर यह एकाधिकार बरकरार रखा गया।
• कुछ सीमाओं के तहत भारत के साथ व्यापार करने हेतु सभी ब्रिटिशवासियों के लिये मुक्त व्यापार की अनुमति दे दी गई।
• ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म प्रचार की अनुमति दी गई।
• भारत में शिक्षा के लिये प्रतिवर्ष ₹ 1 लाख खर्च करने का प्रावधान भी किया गया।
• इस अधिनियम के तहत पहली बार भारत में ब्रिटिश क्षेत्र की संवैधानिक स्थिति को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया।
चार्टर अधिनियम, 1833 ( Charter Act, 1833 )
इस अधिनियम के निर्माण का प्रमुख ध्येय ब्रिटिश सरकार द्वारा 1833 में सरकार के विधि-निर्माण को तथा विधि निर्माण संबंधी कार्यों को स्पष्ट करना था। इसके तहत प्रमुख परिवर्तन किये गए, जो निम्नलिखित हैं-
• कंपनी के व्यापारिक अधिकार पूर्णतः समाप्त कर दिये गए।
• अब कंपनी का कार्य ब्रिटिश सरकार की ओर से केवल भारत पर शासन करना रह गया।
• बंगाल के गवर्नर जनरल को 'भारत का गवर्नर जनरल' कहा जाने लगा तथा गवर्नर जनरल को सभी नागरिक तथा सैन्य शक्तियाँ प्रदान की गईं। भारत का प्रथम गवर्नर जनरल 'लॉर्ड विलियम बैंटिक' बना।
• मद्रास और बंबई के गवर्नर को विधायिका शक्ति से वंचित कर दिया गया। भारत के गवर्नर जनरल को पूरे ब्रिटिश भारत में विधि निर्माण का एकाधिकार प्रदान किया गया। इसके अंतर्गत पहले बनाए गए कानूनों को 'नियामक कानून' कहा गया और नए कानून के तहत बने कानूनों को 'एक्ट या अधिनियम' कहा गया।
• अभी तक गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी में तीन सदस्य होते थे, किंतु विधिक परामर्श हेतु गवर्नर जनरल की परिषद् में 'विधि सदस्य' के रूप में चौथे सदस्य को शामिल किया गया।
• गवर्नर जनरल की परिषद् को राजस्व के संबंध में पूर्ण अधिकार प्रदान करते हुए गवर्नर जनरल को संपूर्ण देश के लिये एक ही बजट तैयार करने का अधिकार दिया गया।
• भारतीय कानूनों का वर्गीकरण किया गया व इस कार्य के लिये 'विधि आयोग का गठन किया गया। 'लॉर्ड मैकाले' की अध्यक्षता में प्रथम विधि आयोग का गठन किया गया।
• इस एक्ट के तहत सिविल सेवकों के चयन के लिये खुली प्रतियोगिता का आयोजन शुरू करने का प्रयास किया गया।
• इस एक्ट के द्वारा स्पष्ट कर दिया गया कि कंपनी के प्रदेशों में रहने वाले किसी भी भारतीय को केवल धर्म, जाति, वंश, रंग या जन्मस्थान के आधार पर कंपनी के किसी पद से, जिसके लिये वह योग्य हो, वंचित नहीं किया जाएगा। हालाँकि, कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स के विरोध के कारण यह प्रावधान लागू नहीं हो सका।
• भारत में दास प्रथा को गैर-कानूनी घोषित किया गया तथा गवर्नर जनरल को निर्देश दिया गया कि भारत में दास प्रथा को समाप्त करने के लिये आवश्यक कदम उठाए ।
• भारत में ब्रिटिश राज के दौरान संविधान निर्माण के प्रथम संकेत इस एक्ट में मिलते हैं।
चार्टर अधिनियम, 1853 (Charter Act, 1853)
इसका निर्माण तत्कालीन विधायिका को सशक्त बनाने के लिये तथा उसके विस्तार में सहयोग देने के लिये किया गया था। इसके प्रमुख लक्षण थे-
• इसने पहली बार गवर्नर जनरल की परिषद् (6 सदस्यीय) के विधायी एवं प्रशासनिक कार्यों को अलग कर दिया।
• इसके तहत गवर्नर जनरल की परिषद् में (जब वह विधायिका के रूप में कार्यरत हो) 6 नए सदस्यों की वृद्धि की गई, जिससे विधानपरिषद् में कुल सदस्य संख्या बढ़कर 12 हो गई।
• 6 सदस्यों में बंगाल के मुख्य न्यायाधीश, कलकत्ता उच्चतम न्यायालय का एक न्यायाधीश और बंगाल, मद्रास, बंबई और आगरा प्रांत के एक-एक प्रतिनिधि शामिल थे।
• कार्यकारिणी परिषद् के कानून सदस्य को परिषद् के पूर्ण सदस्य का दर्जा प्रदान किया गया।
• संपूर्ण भारत के लिये एक 'पृथक् विधान परिषद्' की स्थापना की गई और इसी परिषद् ने आगे चलकर 'लघु संसद' का रूप ग्रहण कर लिया।
• इसने निदेशक मंडल के सदस्यों की संख्या 24 से घटाकर 18 कर दी। • इसके द्वारा भारतीय (केंद्रीय) विधान परिषद् में सर्वप्रथम 'क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व' के सिद्धांत को प्रतिपादित किया गया।
• इस अधिनियम के द्वारा प्रमुख सरकारी सेवाओं में नामजदगी का सिद्धांत समाप्त कर कंपनी के महत्त्वपूर्ण पदों को प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से भरने की व्यवस्था की गई और पहली बार सिविल सेवाओं में भारतीयों को शामिल करने का प्रावधान किया गया।
भारत शासन अधिनियम, 1858 (Government of India Act, 1858)
1857 की क्रांति के फलस्वरूप ब्रिटिश क्राउन ने भारत का शासन कंपनी के हाथों से ले लिया। इस अधिनियम के तहत भारत की संवैधानिक व्यवस्था में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन किये गए, जो निम्नलिखित हैं-
• 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' तथा 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' को समाप्त कर उनके अधिकार ब्रिटिश मंत्रिमंडल के एक सदस्य को सौंपे गए। ब्रिटिश मंत्रिमंडल के उस सदस्य को 'भारत राज्य सचिव' (Secretary of Sate for India) का पद प्रदान किया गया।
• भारत राज्य सचिव की सहायता के लिये एक 15 सदस्यीय भारत परिषद्' का गठन किया गया, जिसके सदस्यों (भारत सचिव सहित ) को वेतन भारतीय राजस्व से दिया जाना था।
• इस अधिनियम के तहत यह भी व्यवस्था की गई थी कि इन सदस्यों में से कम-से-कम आधे ऐसे सदस्य हों, जो भारत में 10 वर्ष तक सेवा दे चुके हों और नियुक्ति के समय उन्हें भारत से आए अधिक-से-अधिक 10 वर्ष हुए हों।
● भारतीय मामलों पर ब्रिटिश संसद का सीधा नियंत्रण स्थापित हो गया और मुगल सम्राट के पद को समाप्त कर दिया गया।
● भारत का राज्य सचिव अपने कार्यों के लिये ब्रिटिश संसद के प्रति उत्तरदायी होता था ।
● भारत के गवर्नर जनरल को 'वायसराय' की उपाधि दी गई तथा वह क्राउन का सीधा प्रतिनिधि बन गया। भारत का प्रथम वायसराय लॉर्ड कैनिंग' बना।
• गवर्नर जनरल को 'द वायसराय ऑफ़ इंडिया' का पदनाम भी दिया गया। वह प्रतिवर्ष भारत की नैतिक एवं आर्थिक प्रगति की रिपोर्ट ब्रिटिश संसद के समक्ष प्रस्तुत करता था।
भारतीय परिषद् अधिनियम, 1861 (Indian Council Act, 1861)
भारतीय परिषद् अधिनियम, 1861 भारत के संवैधानिक इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण घटना है, क्योंकि इसके द्वारा भारत सरकार की मंत्रिमंडलीय व्यवस्था की नींव रखी गई थी।
इस अधिनियम के प्रमुख प्रावधान निम्न थे-
• इस अधिनियम द्वारा कार्यकारी परिषद् के सदस्यों की संख्या 4 से बढ़ाकर 5 कर दी गई। (इसमें तीन सदस्य प्रशासनिक सेवा के होते थे, जिनको भारत में रहने का 10 वर्ष का अनुभव होना आवश्यक था। शेष 2 सदस्यों में एक को 5 वर्ष विधि संबंधी अनुभव प्राप्त होना आवश्यक था। )
● वायसराय की विधान परिषद् में न्यूनतम 6 और अधिकतम 12 अतिरिक्त मनोनीत सदस्यों का प्रावधान किया गया था। उनमें कम-से-कम आधे सदस्यों का गैर-सरकारी होना आवश्यक था, किंतु इनकी शक्तियाँ विधि-निर्माण तक ही सीमित होती थीं।
• 1862 में लॉर्ड कैनिंग ने तीन भारतीयों बनारस के राजा, पटियाला के महाराजा और सर दिनकर राव को विधान परिषद् में मनोनीत किया।
• वायसराय को विधान सभा में भारतीयों के नाम निर्दिष्ट करने की शक्ति प्रदान की गई। यह राज्य सचिव के नियंत्रण तथा निरीक्षण में कार्य करती थी।
• वायसराय को विशेषाधिकार व आपात स्थिति में अध्यादेश जारी करने का अधिकार दिया गया।
• वायसराय को आवश्यक नियम एवं आदेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गई, जिसके तहत लॉर्ड कैनिंग ने भारतीय शासन में पहली बार 'संविभागीय प्रणाली' (Portfolio System) की शुरुआत की।
• इस अधिनियम ने बंबई और मद्रास प्रेसिडेंसियों को कानून बनाने की शक्ति वापस देकर विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत की।
भारतीय परिषद् अधिनियम, 1892 (Indian Council Act, 1892)
• इस अधिनियम का उद्देश्य विधान परिषदों का विस्तार करना व अधिक शक्तिशाली बनाना था।
• केंद्रीय एवं प्रांतीय विधान परिषदों का विस्तार किया गया तथा नए सदस्य भी शामिल किये गए, जिनमें 40 प्रतिशत गैर-सरकारी सदस्य होने थे।
• केंद्रीय एवं प्रांतीय विधान परिषदों में गैर-सरकारी सदस्यों की नियुक्ति के अप्रत्यक्ष एवं सीमित चुनावी प्रावधान किये गए ( हालाँकि, 1892 के अधिनियम में 'चुनाव' शब्द का प्रयोग नहीं हुआ था )
• वायसराय को सपरिषद् विधान परिषदों में वित्तीय विषयों की विवेचना ( राजस्व, व्यय एवं बजट) करने, प्रश्न पूछने बहस करने का अधिकार दिया गया। परंतु ऐसे विषयों पर नियम बनाने पर सपरिषद् राज्य सचिव की सहमति अनिवार्य थी।
नोट: ■ भारतीय परिषद् अधिनियम, 1892, भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस के 1889 से 1891 तक के अधिवेशनों में स्वीकार किये गए प्रस्तावों से प्रभावित होकर पारित किया गया था।
भारतीय परिषद् अधिनियम (मॉर्ले-मिंटो सुधार), 1909 (Indian Council Act, 1909)
इस अधिनियम द्वारा परिषदों व उनके कार्यक्षेत्रों का अधिक विस्तार किया गया और उन्हें प्रतिनिधिक एवं प्रभावी बनाने के लिये उपाय किये गए। इस अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं-
• केंद्रीय विधान परिषद् में सरकारी सदस्यों के बहुमत की व्यवस्था रखी गई, तो प्रांतीय विधान परिषदों में गैर-सरकारी सदस्यों के बहुमत की व्यवस्था थी।
• सत्येन्द्र प्रसाद सिन्हा वायसराय की कार्यकारिणी परिषद् में नियुक्त होने वाले प्रथम भारतीय थे। (विधि सदस्य)
• विधान परिषद् के सदस्यों को बजट अंतिम रूप से स्वीकार करने से पूर्व बजट पर वाद-विवाद करने तथा प्रस्ताव पारित करने का अधिकार दिया गया।
• सदस्यों को सार्वजनिक हित से संबंधित विषयों की विवेचना करने. प्रस्ताव पारित करने का अधिकार प्रदान किया गया।
• इसके तहत जाति, वर्ग, धर्म आदि के आधार पर पृथक् निर्वाचन प्रणाली अपनाई गई, जिसमें प्रेसिडेंसी कॉर्पोरेशन, चेम्बर ऑफ कॉमर्स तथा जमींदारों को पृथक् प्रतिनिधित्व दिया गया।
• पहली बार केंद्रीय विधान परिषद् हेतु मुस्लिम वर्ग के लिये भी पृथक् निर्वाचन की व्यवस्था की गई।
नोट: ■ लॉर्ड मिंटो भारत के वायसराय तथा जॉन मॉर्ले इग्लैंड में भारत के राज्य सचिव थे।
● लॉर्ड मिंटो को 'सांप्रदायिक निर्वाचन के जनक' के रूप में जाना जाता है।
भारत शासन अधिनियम, 1919 (Government of India Act, 1919)
इसे 'मॉण्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार' के नाम से भी जाना जाता है। उल्लेखनीय है कि मॉण्टेग्यू भारत के राज्य सचिव व चेम्सफोर्ड भारत के वायसराय थे।
प्रमुख प्रावधान
• केंद्र में द्विसदनात्मक विधायिका की स्थापना की गई- प्रथम , राज्य परिषद् तथा दूसरी, केंद्रीय विधान सभा ।
• देश में प्रत्यक्ष निर्वाचन व्यवस्था तथा प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली प्रारंभ की गई।
• प्रांतीय विषयों को पुनः दो भागों में बाँटा गया- हस्तांतरित और आरक्षित ।
हस्तांतरित विषय (Transferred Subjects)
• इसमें शिक्षा, पुस्तकालय, स्थानीय स्वायत्त शासन, चिकित्सा सहायता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, उद्योग, सार्वजनिक मनोरंजन पर नियंत्रण आदि शामिल थे।
• इन विषयों का संचालन गवर्नर तथा विधान परिषद् के प्रति उत्तरदायी मंत्रियों की सहायता से होता था ।
आरक्षित विषय ( Reserved Subjects)
• रक्षा, विदेश मामले, वित्त, भूमि, कर, अकाल सहायता, न्याय, पुलिस, पेंशन, छापाखाना, समाचारपत्र, सिंचाई, जलमार्ग, कारखाना, बिजली, गैस, श्रमिक कल्याण, औद्योगिक विवाद, मोटरगाड़ियाँ, छोटे बंदरगाह एवं सार्वजनिक सेवाएँ आदि।
आरक्षित विषयों का संचालन गवर्नर और उसकी कार्यकारी परिषद् के माध्यम से किया जाता था।
• विधान परिषद् में तीन प्रकार के सदस्यों की व्यवस्था
(i) निर्वाचित (Elected)
(ii) मनोनीत सरकारी (Nominated Governmental)
(iii) मनोनीत गैर सरकारी (Nominated Non Governmental)
• निर्वाचित सदस्यों की संख्या लगभग 71 प्रतिशत मनोनीत सरकारी सदस्यों की संख्या लगभग 18 प्रतिशत तथा मनोनीत गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या 11 प्रतिशत रखी गई थी।
• सीमित मताधिकार तथा सांप्रदायिक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था की गई।
• इसके तहत लोक सेवा आयोग का गठन किया गया।
• निर्वाचक क्षेत्रों को दो भागों में विभाजित किया गया सामान्य तथा विशिष्ट सामान्य वर्ग में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, आंग्ल-भारतीय सिख आदि जबकि विशिष्ट वर्ग में भू-स्वामियों, विश्वविद्यालयों, व्यापार मंडलों आदि का प्रतिनिधित्व निर्धारित किया गया।
• इसने सांप्रदायिक आधार पर सिखों, ईसाइयों, आंग्ल-भारतीयों तथा यूरोपियों के लिये भी पृथक् निर्वाचन के सिद्धांत को विस्तारित किया ।
• इसमें पहली बार केंद्रीय बजट को राज्य बजट से अलग कर दिया गया।
• इसके अंतर्गत एक वैधानिक आयोग का भी गठन किया गया, जिसे 10 वर्ष बाद जाँच करने के पश्चात् अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी।
• केंद्रीय विधानमंडल को केंद्रीय सूची में उल्लेखित विषयों के संबंध में विधि निर्माण का अधिकार प्राप्त था, परंतु अंतिम निर्णय का अधिकार गवर्नर जनरल को प्राप्त था।
• प्रांतीय विधानमंडल को प्रांतीय विषयों के संबंध में विधि निर्माण का अधिकार प्राप्त था, परंतु ये अधिकार गवर्नरों के अधिकारों के कारण अत्यधिक सीमित थे।
नोट: ■ इस अधिनियम द्वारा पहली बार भारत में महिलाओं को मत देने का अधिकार प्रदान किया गया।
● प्रांतों में द्वैध शासन के जनक 'लियोनेल कर्टिस' माने जाते हैं।
● यह अधिनियिम भारतीयों की आकांक्षाओं की पूर्ति करने में असफल रहा। यह वास्तव में भारत के आर्थिक शोषण करने और उसे लंबे समय तक गुलाम बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया था।
साइमन आयोगः
सर जॉन साइमन के नेतृत्व में सात सदस्यीय आयोग का गठन 1919 के एक्ट के सुधारों की समीक्षा के लिये किया गया था। इस आयोग में सभी सदस्यों के अंग्रेज़ होने के कारण भारतीयों द्वारा विरोध किया गया। इसी संदर्भ में 'साइमन गो बैक' का नारा प्रचलित है (1927 में गठित, 1930 में रिपोर्ट सौंपी)कुछ स्रोतों में यह भी पढ़ने को मिलता है कि सुधार की लगातार मांग और असहयोग आंदोलन से उत्पन्न स्थिति के कारण ब्रिटिश सरकार द्वारा 1928 में एक कानूनी आयोग (साइमन आयोग) नियुक्त किया गया, जिसने 1930 में अपनी रिपोर्ट सौंपी।
भारत शासन अधिनियम, 1935 (Government of India Act, 1935)
1930-32 में लंदन में हुए तीन गोलमेज सम्मेलनों में संवैधानिक सुधारों से संबंधित संस्तुतियों के फलस्वरूप इस अधिनियम का निर्माण किया गया।
इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं-
● भारत में सर्वप्रथम संघीय शासन प्रणाली की नींव रखी गई। संघ की दो इकाइयाँ थीं- ब्रिटिश भारतीय प्रांत तथा देशी रियासतें ।
• केंद्र में द्वैध शासन की स्थापना अर्थात् केंद्र तथा राज्य इकाइयों के मध्य शक्तियों का विभाजन किया गया (तीन सूचियों के अंतर्गत) - संघ सूची, प्रांत सूची तथा समवर्ती सूची।
• संघ सूची में 59 विषय प्रांत सूची में 54 विषय तथा समवर्ती सूची में 36 विषय शामिल किये गए तथा अवशिष्ट शक्तियाँ गवर्नर जनरल में निहित थीं (संघीय सूची में विदेशी कार्य, मुद्रा, नौसेना, थल सेना, वायुसेना, जनगणना जैसे विषय थे। प्रांतीय सूची में पुलिस, प्रांतीय लोक सेवा और शिक्षा । समवर्ती सूची में दंड विधि और प्रक्रिया, सिविल प्रक्रिया, विवाह एवं विवाह विच्छेद आदि सम्मिलित थे।)
• प्रांतों में द्वैध शासन को समाप्त कर दिया गया तथा प्रांतीय स्वायत्तता का प्रावधान किया गया।.
• इसके तहत 1937 में संघीय न्यायालय की स्थापना हुई।
• इस अधिनियमं द्वारा भारत परिषद्' को समाप्त कर दिया गया एवं 4 विवादों के निपटारे के लिये संघीय न्यायालय अंतिम न्यायालय नहीं था, अंतिम अपीलीय न्यायालय 'प्रिवी काउंसिल' था।
• वर्मा (वर्तमान म्यांमार) को भारत से अलग कर दिया गया। (1937 में)
• प्रांतीय विधानमंडलों का विस्तार किया गया। प्रांतों में 11 में से 6 विधानमंडलों में दो सदनों की व्यवस्था की गई (6 प्रांत असम, बंगाल, बिहार, बंबई, मद्रास एवं संयुक्त प्रांत ) ।
• इसके अंतर्गत मुद्रा और साख पर नियंत्रण के लिये भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना की गई।
• इसने दलित जातियों, महिलाओं और मजदूर वर्ग के लिये अलग से निर्वाचन की व्यवस्था की।
• मताधिकार का विस्तार हुआ। लगभग 10 प्रतिशत जनसंख्या को मत का अधिकार प्राप्त हुआ।
• इसने न केवल फेडरल लोक सेवा आयोग की स्थापना की, बल्कि प्रांतीय सेवा आयोग और दो या दो से अधिक राज्यों के लिये संयुक्त सेवा आयोग की भी स्थापना की।
कैबिनेट मिशन, 1946 (Cabinet Mission, 1946)
भारत की राजनैतिक समस्या के समाधान के लिये बिटिश सरकार एक कैबिनेट मिशन भारत भेजा। इस मिशन में ब्रिटिश मंत्रिमंडल ने के तीन सदस्य थे- लॉर्ड पेथिक लॉरेंस, सर स्टैफोर्ड क्रिप्स और ए.वी. अलेक्जेंडर | मिशन की मुख्य बातें निम्नलिखित थीं-
• ब्रिटिश भारत और देशी रियासतों को मिलाकर एक भारतीय संघ का गठन किया जाएगा।
• विदेश, रक्षा और संचार विभाग संघ के अधीन होंगे और संघ को इनके लिये धन एकत्र करने का अधिकार होगा।
• संघ की अपनी कार्यपालिका और विधायिका होगी जिसमें ब्रिटिश भारत तथा देशी रियासतों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
• कुछ प्रांत मिलकर अपने अलग-अलग समूह बना सकते हैं तथा प्रांतीय कार्यपालिका और विधायिका के अतिरिक्त अपनी सामूहिक कार्यपालिका और विधायिका का निर्माण कर सकते हैं।
• भारत पर ब्रिटिश सरकार की प्रभुसत्ता को समाप्त कर दिया जाएगा।
• भारतीय रियासतों को यह छूट होगी कि वे संघ में सम्मिलित हों या स्वतंत्र रहें।
• एक अंतरिम सरकार की तत्काल स्थापना की जाएगी, जिसे भारत के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त हो ।
• संविधान बनाने के लिये संविधान सभा का निर्वाचन शीघ्र होना चाहिए।
• प्रारंभ में कॉन्ग्रेस और मुस्लिम लीग, दोनों ने ही कैबिनेट मिशन प्लान को स्वीकार किया, किंतु बाद में मुस्लिम लीग ने इसे अस्वीकार कर दिया और पाकिस्तान के निर्माण के लिये 16 अगस्त, 1946 से 'प्रत्यक्ष कार्रवाई' (Direct Action) आरंभ कर दी।
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 (Indian Independence Act, 1947)
इस अधिनियम द्वारा माउंटबेटन योजना को वैधानिक रूप दिया गया। इसके अंतर्गत की गई प्रमुख बातें निम्नलिखित थीं-
• 15 अगस्त, 1947 ई. को भारत एवं पाकिस्तान नामक दो अधिराज्य बना दिये जाएंगे और ब्रिटिश सरकार उनको सत्ता सौंप देगी। सत्ता का उत्तरदायित्व दोनों अधिराज्यों की संविधान सभा को सौंपा जाएगा।
• प्रत्येक अधिराज्य में गवर्नर जनरल होगा, जिसकी नियुक्ति इंग्लैंड का सम्राट करेगा।
• नए संविधान का निर्माण होने तक दोनों राज्यों का प्रशासन भारत सरकार अधिनियम, 1935 के अनुसार चलाया जाएगा।
● भारत सचिव का पद समाप्त करके उसके स्थान पर राष्ट्रमंडल के सचिव की नियुक्ति की जाएगी।
• देशी रियासतों पर ब्रिटेन की संप्रभुता का अंत कर दिया गया। उनको भारत या पाकिस्तान किसी भी अधिराज्य में सम्मिलित होने और अपने भावी संबंधों का निश्चय करने की स्वतंत्रता प्रदान की गई।
बाल्कन प्लान / डिकी बर्ड प्लान / इस्मा प्लान (1947) [(Balkan Plan/Dickie Bird Plan / Ismay Plan (1947) ]
• माउंटबेटन ने भारत की आज़ादी के लिये 'डिकी बर्ड प्लान' तैयार किया। यह योजना जनरल सर हेस्टिंग्स इस्मा, सर जॉर्ज एबेल एवं लॉर्ड माउंटबेटन की एक समिति द्वारा तैयार की गई थी। यह योजना दिल्ली में प्रांतीय गवर्नरों की असेम्बली के सम्मुख हेस्टिंग्स इस्मा द्वारा प्रस्तुत की गई, इसलिये इसे 'इस्मा योजना' (Ismay Plan) भी कहा जाता है।
• इस योजना में यह प्रावधान था कि सत्ता का हस्तांतरण पृथक् पृथक् प्रांतों को किया जाए या सत्ता हस्तांतरण से पहले यदि परिसंघ का गठन हो जाए तो उसके साथ ही इसमें यह प्रावधान भी था कि बंगाल एवं पंजाब को यह विकल्प दिया जाए कि वे अपने बँटवारे के लिये जनमत संग्रह का सहारा ले सकते हैं। इस प्रकार देशी रियासतों के साथ विभिन्न समूहों को यह छूट होगी कि वे भारत में सम्मिलित होना चाहते हैं या पाकिस्तान में या फिर अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखना चाहते हैं।
• इस योजना का विवरण माउंटबेटन ने जवाहरलाल नेहरू के सामने रखा था, जिसे उन्होंने तुरंत अस्वीकार कर दिया और बताया कि यह योजना भारत के 'बाल्कनीकरण' को आमंत्रित करेगी और संघर्ष एवं हिंसा को भड़काएगी। अतः इस योजना को 'बाल्कन प्लान' (Balkan Plan) भी कहा जाता है।
अन्य तथ्य
• रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773 के द्वारा सन् 1774 में कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की गई। इसके प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलिजाह इम्पे (Elijah Impey) थे।
• भारतीय परिषद् अधिनियम, 1909 द्वारा मुस्लिम समुदाय के लिये पृथक् निर्वाचक मंडल अथवा निर्वाचन क्षेत्र का गठन किया गया।
• भारत शासन अधिनियम, 1919 मॉण्टेग्यू- चेम्सफोर्ड रिपोर्ट पर आधारित था।
• भारत शासन अधिनियम, 1919 द्वारा प्रांतों में 'द्वैध शासन प्रणाली' की स्थापना की गई।
• भारत शासन अधिनियम, 1919 द्वारा लोक सेवा आयोग का गठन किया गया।
• भारत शासन अधिनियम, 1935 द्वारा भारत में संघीय शासन प्रणाली प्रारंभ की गई।
• भारत शासन अधिनियम, 1935 द्वारा केंद्र में 'द्वैध शासन प्रणाली' की स्थापना हुई।
• लॉर्ड मिंटो को 'सांप्रदायिक निर्वाचन के जनक' के रूप में जाना जाता है।
• 1926 में सिविल सेवकों की भर्ती (ली आयोग की सिफारिश पर ) के लिये केंद्रीय लोक सेवा आयोग का गठन किया गया।
● भारत में संघीय न्यायालय की स्थापना 1937 में भारत शासन अधिनियम, 1935 के तहत की गई थी।
• वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत के सभी राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श के पश्चात् 3 जून, 1947 को भारत के विभाजन की योजना प्रस्तुत की, जिसे 'माउंटबेटन योजना' कहा जाता है।
• 18 जुलाई, 1947 को ब्रिटिश संसद द्वारा भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम पारित किया गया।
• 1927 की साइमन कमीशन की रिपोर्ट और 1928 की नेहरू समिति की रिपोर्ट ने भारत शासन अधिनियम, 1935 की पृष्ठभूमि तैयार की थी।
• 14-15 अगस्त, 1947 की मध्यरात्रि को भारत में ब्रिटिश शासन की समाप्ति हुई और समस्त शक्तियाँ दो नए स्वतंत्र डोमिनियनों भारत और पाकिस्तान को हस्तांतरित कर दी गईं।
• लॉर्ड माउंटबेटन नए डोमिनियन- भारत के प्रथम गवर्नर जनरल बने । (15 अगस्त, 1947-21 जून, 1948)
• लॉर्ड माउंटबेटन ने जवाहरलाल नेहरू को भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई।
• 1946 में बनी संविधान सभा को स्वतंत्र भारतीय डोमिनियन की संसद के रूप में स्वीकार कर लिया गया।
• स्वतंत्र भारत के प्रथम व अंतिम भारतीय गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी थे। (21 जून, 1948 – 26 जनवरी, 1950)
◆ अभ्यास प्रश्न ◆
1. किस वर्ष रेग्युलेटिंग एक्ट 1773 के तहत कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना की गई थी ?
(a) 1773
(b) 1774
(c) 1775
(d) 1784.
2. किन अधिनियमों द्वारा कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को अंशत: व पूर्णतः समाप्त कर दिया गया?
(a) 1813 व 1833 का चार्टर अधिनियम
(b) 1833 व 1853 का चार्टर अधिनियम
(c) 1858 व 1919 का भारत शासन अधिनियम
(d) 1861 व 1892 का भारतीय परिषद् अधिनियम
3. किसकी अध्यक्षता में प्रथम विधि आयोग का गठन किया गया?
(a) हेस्टिंग
(b) कॉर्नवालिस
(c) लॉर्ड मिंटो
(d) लॉर्ड मैकाले
4. निम्नलिखित में से किस अधिनियम से राष्ट्रपति के अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रेरित है?
(a) भारत शासन अधिनियम, 1935
(b) भारत शासन अधिनियम, 1919
(c) भारतीय परिषद् अधिनियम, 1909
(d) भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947
5. सरकारी सेवाओं में नामजदगी का सिद्धांत समाप्त कर कंपनी के महत्त्वपूर्ण पदों को प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से भरने की प्रक्रिया किस अधिनियम द्वारा शुरू की गई ?
(a) रेग्युलेटिंग एक्ट 1773
(b) 1813 का चार्टर अधिनियम
(c) 1853 का चार्टर अधिनियम
(d) 1833 का चार्टर अधिनियम
6. अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली का प्रारंभ किस अधिनियम से माना जाता है?
(a) 1813 का चार्टर अधिनियम
(b) 1833 का चार्टर अधिनियम
(c) 1853 का चार्टर अधिनियम
(d) 1892 का भारतीय परिषद् अधिनियम
7. भारतीय विधायिका प्रथम बार द्वि-सदनीय बनाई गई ?
(a) 1909 के भारतीय परिषद् अधिनियम द्वारा
(b) 1919 के भारत शासन अधिनियम द्वारा
(c) 1935 के भारत शासन अधिनियम द्वारा
(d) 1853 के चार्टर अधिनियम द्वारा.
8. गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी में नियुक्त होने वाले प्रथम विधि सदस्य थे-
(a) वी. एन. राव
(c) सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा
(b) बी. आर. अंबेडकर
(d) तेज बहादुर सप्रू
9. किस अधिनियम द्वारा केंद्रीय विधान परिषद् में मुस्लिम वर्ग के लिये पृथक् निर्वाचन की व्यवस्था की गई?
(a) 1919 के भारतीय शासन अधिनियम द्वारा
(b) 1909 के भारतीय परिषद् अधिनियम द्वारा
(c) 1892 के भारतीय परिषद् अधिनियम द्वारा
(d) 1853 के चार्टर अधिनियम द्वारा
10. प्रांतों में द्वैध शासन के जनक कहलाते हैं-
(a) मैकाले
(b) हेस्टिंग
(c) लॉर्ड मिंटो
(d) लियोनेल कर्टिस
11. सुमेलित कीजिये:
सूची -I सूची-I I
A. नियंत्रक परिषद् की स्थापना 1. रेग्युलेटिंग अधिनियम, 1773
B. सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 2. पिट्स इंडिया अधिनियम,1784
C. इंग्लिश मिशनरियों को भारत में
कार्य करने की शक्ति 3. चार्टर अधिनियम, 1813
D. गवर्नर जनरल की परिषद् में
कानूनी सदस्य की नियुक्ति 4. चार्टर अधिनियम, 1833
कूट:
A B C D
a) 2. 1. 4. 3
b) 2. 1. 3. 4
c) 4. 3. 1. 2
d) 4. 1. 2. 3
12. बाल्कन प्लान किस अधिनियम से संबंधित है?
(a) 1919 के भारत शासन अधिनियम
(b) 1909 के मॉर्ले मिंटो सुधार अधिनियम
(c) 1935 के भारत शासन अधिनियम
(d) 1947 के भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम
13. सीमा आयोग की अध्यक्षता किसने की?
(a) सर स्टेफोर्ड क्रिप्स
(b) रेडक्लिफ
(c) लॉरेंस
(d) माउंटबेटन
14. निम्नलिखित में से किस अधिनियम द्वारा भारतीयों को विधान परिषदों में बजट पर बहस करने की शक्ति प्राप्त हुई ?
(a) भारत शासन अधिनियम, 1919
(b) भारतीय परिषद् अधिनियम, 1909
(c) भारतीय परिषद् अधिनियम, 1861
(d) भारतीय परिषद् अधिनियम, 1892
15. स्वतंत्र भारत के प्रथम व अंतिम गवर्नर जनरल कौन थे?
(a) लॉर्ड माउंटबेटन
(b) सी. राजगोपालाचारी
(c) जवाहरलाल नेहरू
(d) सरदार वल्लभभाई पटेल
16. भारत के संविधान में केंद्र और राज्यों के बीच किया गया शक्तियों का विभाजन इनमें से किसमें उल्लिखित योजना पर आधारित है?
(a) मॉर्ले-मिंटो सुधार, 1909
(b) मॉण्टेग्यू-चेम्सफोर्ड अधिनियम,1919
(c) भारत शासन अधिनियम, 1935
(d) भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947
17. निम्नलिखित में से किस एक अधिनियम द्वारा भारत में संघीय न्यायालय की स्थापना की गई थी ?
(a) भारतीय परिषद् अधिनियम, 1861
(b) भारतीय परिषद् अधिनियम, 1909
(c) भारत शासन अधिनियम, 1919
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
18. 1935 के अधिनियम द्वारा स्थापित संघ में अवशिष्ट शक्तियाँ किसको दी गई थी ?
(a) संघीय विधानपालिका को
(b) प्रांतीय विधानपालिका को
(c) गवर्नर जनरल को
(d) प्रांतीय गवर्नरों को
19. किस अधिनियम ने भारतीयों को अपने देश के प्रशासन में कुछ हिस्सा लेना संभव बनाया?
(a) चार्टर एक्ट 1833
(b) चार्टर एक्ट 1853
(c) गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1858
(d) इंडियन काउंसिल एक्ट, 1861
20. किस अधिनियम द्वारा कंपनी का चीन तथा पूर्वी देशों के साथ चाय के व्यापार का एकाधिकार 20 वर्षों के लिये बढ़ाया गया?
(a) 1813 का चार्टर अधिनियम
(b) 1858 का भारत शासन अधिनियम
(c) 1833 का चार्टर अधिनियम
(d) इनमें से कोई नहीं
21. निम्नलिखित अधिनियमों में से किस अधिनियम के फलस्वरूप बर्मा भारत से अलग हुआ?
(a) गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1858
(b) गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1919
(c) गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935
(d) इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट 1947
22. निम्नलिखित में से कौन अगस्त 1946 ई. में गठित प्रथम अंतरिम राष्ट्रीय सरकार का सदस्य नहीं था?
(a) सी. राजगोपालाचारी
(b) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
(c) डॉ. एस. राधाकृष्णन
(d) जगजीवन राम
23. निम्नलिखित में से किस वर्ष भारत में ब्रिटिशकाल में बजट की व्यवस्था का शुभारंभ किया गया?
(a) 1860
(b) 1857
(c) 1846
(d) 1866
24. 1935 का गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट क्यों महत्त्वपूर्ण है?
(a) यह भारतीय संविधान का प्रमुख स्रोत है
(b) इसके द्वारा भारत को स्वतंत्रता मिली
(c) इसमें भारत विभाजन उल्लिखित है
(d) इसके द्वारा रियासतें समाप्त हुईं
25. 1919 के भारत शासन अधिनियम की निम्नलिखित में से कौन सी प्रमुख विशेषताएँ हैं?
1. प्रांतों की कार्यकारिणी सरकार में द्वैध शासन की व्यवस्था ।
2. मुसलमानों के लिये पृथक् सांप्रदायिक निर्वाचक मंडलों की व्यवस्था ।
3. केंद्र द्वारा प्रांतों को विधायी शक्तियों का हस्तांतरण । निम्नलिखित कूटों के आधार पर सही उत्तर चुनियेः
(a) केवल 1
(c) केवल 1 और 3
(b) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
26. निम्नलिखित में से कौन सा एक भारत शासन अधिनियम, 1935 में स्वीकार किया हुआ महत्त्वपूर्ण और स्थायी अवयव नहीं है?
(a) देश के लिये लिखित संविधान
(b) विधानमंडल के लिये निर्वाचित एवं जबावदेह प्रतिनिधि
(c) एक संघ की योजना पर विचार
(d) विधानमंडल के लिये सरकारी सदस्यों का समवाचित किया जाना
27. निम्नलिखित में से किस अधिनियम की कमियों को दूर करने के उद्देश्य से एक्ट ऑफ सेटलमेंट लाया गया था ?
(a) 1813 का चार्टर अधिनियम
(b) 1833 का चार्टर अधिनियम
(c) 1773 का रेग्युलेटिंग एक्ट
(d) 1909 का भारतीय परिषद् अधिनियम
28. 1946 के कैबिनेट मिशन में प्रमुख तीन सदस्य कौन-कौन थे?
(a) सर जॉन, लॉर्ड पेथिक लॉरेंस, स्टैफोर्ड क्रिप्स
(b) अलेक्जेंडर, लॉर्ड पेथिक लॉरेंस, लॉर्ड मैकाले
(c) स्टैफौर्ड क्रिप्स, लॉर्ड मैकाले, अलेक्जेंडर
(d) लॉर्ड पेथिक लॉरेंस, स्टैफोर्ड क्रिप्स, ए. वी. अलेक्जेंडर
29. अंतरिम सरकार (1946) में मुस्लिम लीग के सदस्य भी सम्मिलित थे। निम्नलिखित में से कौन सदस्य मुस्लिम लीग से संबंधित नहीं था ?
(a) जोगेंद्र नाथ मंडल
(b) लियाकत अली खाँ
(c) गज़ाँफर अली खान
(d) रफी अहमद किदवई
30. निम्नलिखित में से किसे स्वतंत्र भारत के प्रथम मंत्रिमंडल में शिक्षा विभाग सौंपा गया था ?
(a) राजेंद्र प्रसाद
(b) मौलाना अबुल कलाम आज़ाद
(c) डॉ. जॉन मथाई
(d) सरदार पटेल