प्रस्तावना -
- 'स्वतंत्रता' की अवधारणा का विकास मध्य युग में हुआ। प्रारंभ में धर्म और समाज के खिलाफ स्वतंत्रता की मांग की गई तथा कहा गया कि समाज और धर्म व्यक्ति को पूर्णतः अपने अधीन नहीं रख सकता।
- 15वीं व 16वीं सदी में 'स्वतंत्रता' का तात्पर्य, राजतंत्र के खिलाफ स्वतंत्रता थी। अर्थात् राजा या राजसत्ता लोगों के जीवन और विचारों को पूर्णतः नियंत्रित नहीं कर सकता।
- 17वीं सदी के बाद 'स्वतंत्रता', बहुमत तथा सरकार के विरोध में प्रकट हुई। इसमें यह माना गया कि बहुमत तथा सरकार लोगों के विचारों को नियंत्रित नहीं कर सकते। विचार व तर्क करने की स्वतंत्रता लोगों में अंतर्निहित है।
स्वतंत्रता की परिभाषा
- सीले के अनुसार,- 'स्वतंत्रता,
अतिशासन का विलोम है।' मैक्कीन के अनुसार,
'स्वतंत्रता सभी प्रतिबंधों का अभाव नहीं, बल्कि
अतार्किक प्रतिबंधों का अभाव है।'
- जे. एस. मिल के अनुसार,- 'स्वतंत्रता प्रतिबंधों का अभाव है। प्रतिबंधों के रूप में हर प्रतिबंध दोष
है और लोगों को नियंत्रित करने से बेहतर उन्हें अपनी इच्छा पर छोड़ देना है।'
- स्वतंत्रता, शब्द लैटिन शब्द 'लिबर'
(Liber) से बना हुआ है, जिसका अर्थ है- 'बंधनों का अभाव।' स्वतंत्रता का विचार आधुनिक युग की
देन है। यूनानी युग और मध्यकाल में यह विचार अनुपस्थित था।
- लिओस्ट्रॉस के अनुसार, 'मानव जीवन में
ऐसा कोई संबंध नहीं है, जिसमें वह दूसरों से संबंधित न हो।
अर्थात् वह पूरी तरह से मुक्त हो। स्वतंत्रता की व्यापक भावना स्वतंत्रता पर
प्रतिबंध की मांग करती है।'
स्वतंत्रता पर लॉक का विचार
- लॉक को उदारवाद का जनक कहा जाता है। लॉक ने स्वतंत्रता के उदारवादी
पक्ष की व्याख्या की, जिसमें उन्होंने मानव के प्राकृतिक अधिकारों में
स्वतंत्रता को शामिल किया, परंतु उन्होंने स्वतंत्रता को
बहुमत के अधीन बताया।
स्वतंत्रता पर जे. एस. मिल का विचार
- जे. एस. मिल ने स्वतंत्रता पर अपना विचार अपनी रचना-"Essay on
Liberty" (1859) में दिया।
- मिल की स्वतंत्रता का आशय, विचार, अभिव्यक्ति एवं भाषण की पूर्ण स्वतंत्रता से
है।'
- प्रत्येक प्रकार का प्रतिबंध बुरा है।
- व्यक्ति अपने शरीर व मन का स्वामी है।
- मिल के अनुसार, 'स्वतंत्रता को सीमित करने
वाला सबसे बड़ा माध्यम बहुमत समाज है, राज्य या सरकार नहीं।'
- मिल के अनुसार, 'स्वतंत्रता, व्यक्ति के विकास के लिए आवश्यक है।'
- मिल के अनुसार, 'स्वतंत्रता, सभ्यता के विकास के लिए आवश्यक है।'
स्वतंत्रता पर हर्बर्ट स्पेंसर का विचार
- स्पेंसर, स्वतंत्रता के नकारात्मक सिद्धांत के सबसे प्रबल
समर्थक हैं. व राज्य को स्वतंत्रता का विरोधी मानते हैं। उनका राज्य पुलिस राज्य
है, जिसके केवल दो कार्य हैं-बाहरी आक्रमणों से सुरक्षा और
आंतरिक व्यवस्था बनाए रखना। इसके अतिरिक्त राज्य जो भी कार्य करेगा, उससे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन होगा।
स्वतंत्रता पर एडम स्मिथ और डेविड रिकार्डो का विचार
- एडम स्मिथ और डेविड रिकार्डो आर्थिक क्षेत्र में यथेच्छाचारी सिद्धांत
का समर्थन करते हैं। वे भूमि, श्रम और पूंजी पर निजी
स्वामित्व चाहते हैं तथा राज्य द्वारा आर्थिक क्रियाओं के परिचालन में किसी प्रकार
के हस्तक्षेप का विरोध करते हैं।
स्वतंत्रता के आयाम
1.नागरिक स्वतंत्रता (Civil Liberty)
बार्कर के अनुसार, 'नागरिक स्वतंत्रता, व्यक्ति को व्यक्ति होने के नाते प्राप्त होती है।' बार्कर
के अनुसार, नागरिक स्वतंत्रता के निम्नलिखित पक्ष हैं-
(i) अभिव्यक्ति एवं आवागमन की स्वतंत्रता।
(ii) समझौते की स्वतंत्रता।
(iii) जीवन, स्वास्थ्य और शरीर
को किसी भी बाह्य खतरे से मुक्त रखने की स्वतंत्रता।
2. राजनीतिक स्वतंत्रता (Political Liberty)
- इसका अभिप्राय, मतदान एवं राजनीतिक जीवन में
सहभागिता का अधिकार है।
- रूसो के अनुसार, 'राजनीतिक स्वतंत्रता का आशय,
जनसंप्रभुता का एक अंश होना है।'
- राजनीतिक स्वतंत्रता को उपनिवेशवाद एवं साम्राज्यवाद से मुक्ति के रूप में भी देखा जाता है।
3. सामाजिक स्वतंत्रता (Social Liberty)
- बहुमत समाज के विरुद्ध प्रत्येक व्यक्ति द्वारा अपनी इच्छानुसार कार्य करना ही सामाजिक स्वतंत्रता है।
- जाति, धर्म एवं लिंग के आधार पर भेदभाव का अभाव।
4. आर्थिक स्वतंत्रता (Economic Liberty)
- व्यक्ति को रोजगार या न्यूनतम रोजगार की सुनिश्चितता एवं समाज के अभावग्रस्त लोगों के लिए न्यूनतम आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति।
नकारात्मक स्वतंत्रता (Negative Liberty)
- प्रत्येक प्रकार का प्रतिबंध बुरा है।
- चयन की स्वतंत्रता।
- निजी क्षेत्र में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप का अभाव।
- व्यक्ति विवेकशील है तथा व्यक्ति को अकेला छोड़ दिया जाए।
- राजनीतिक वैधानिक स्वतंत्रता।
- नकारात्मक स्वतंत्रता के प्रमुख समर्थकों में बेंथम, जे. एस.म्लि, बर्लिन, फ्रीडमैन,
डी. टॉकविले, स्पेंसर, एडम
स्मिथ, रिकार्डो, हेयक एवं नॉजिक
प्रमुख हैं।
- नकारात्मक स्वतंत्रता के अन्य मान्यताकारों में हॉब्स, लॉक, लॉर्ड एक्टन, कोंस्टेंट,
एलेक्सी डी. टॉकविले, माइकल ओकशॉट
(नव-रूढ़िवादी) प्रमुख हैं।
- स्पेंसर के अनुसार, 'राज्य इसलिए विद्यमान है,
क्योंकि समाज में अपराध विद्यमान हैं। यदि समाज में अपराध नहीं होगा,
तो राज्य की आवश्यकता नहीं होगी।'
- हर्बर्ट स्पेंसर की रचना-"Man Versus State" (1884) है।
- वॉल्टेयर के अनुसार, 'मैं आपके विचारों से असहमत हो सकता हूं लेकिन मरते दम तक आपके अभिव्यक्ति के अधिकार की रक्षा करूंगा।'
- प्रत्येक व्यक्ति को खुला छोड़ देना ही स्वतंत्रता है। (अर्थात् पितृ-सत्तात्मक सत्ता का अभाव ही स्वतंत्रता है)
स्वतंत्रता पर बर्लिन (Isaiah Berlin) का विचार (नकारात्मक स्वतंत्रता)
- बर्लिन की रचना, Two Concepts of Liberty (1958) है।
- बर्लिन की रचनाओं का कालक्रम है-
- Karl Marx: His Life and Environment (1939)
- Four Essays on Liberty (1969)
- Vico and Herder (1976)
बर्लिन के अनुसार, 'सकारात्मक स्वतंत्रता को
आत्म उपलब्धि, आत्मनियंत्रण या आत्मसाक्षात्कार के रूप में
देखा जाता है, जो कि त्रुटिपूर्ण है।'
- सकारात्मक स्वतंत्रता को मानने के परिणामस्वरूप पितृ-सत्तात्मक व्यवस्था का जन्म होता है।
- सकारात्मक स्वतंत्रता की संकल्पना में सामाजिक आत्मनियंत्रण (Social
self control) का विस्तार हो जाता है। जिसके अनुसार राज्य का
हस्तक्षेप व्यक्ति की स्वतंत्रता में सहायक होता है।
- बर्लिन के अनुसार, 'सकारात्मक स्वतंत्रता के
अंतर्गत् व्यक्ति राज्य का दास बन जाता है या उसके जीवन के प्रत्येक भाग पर राज्य
का नियंत्रण स्थापित हो जाता है।'
- जिसे हम स्वतंत्रता कहते हैं, वह स्वतंत्रता की
परिस्थितियां हैं, स्वतंत्रता नहीं।
- स्वतंत्रता का आशय, 'प्रतिबंधों के अभाव से है।'
स्वतंत्रता पर हेयक का विचार (नव-उदारवादी)
- नोबेल पुरस्कार विजेता हेयक की प्रसिद्ध रचना का नाम-"The
Constitution of Liberty" (1960) तथा इनकी अन्य रचना-"Law,
Legislation and Liberty" (1973) है।
- हेयक लॉक के विचारों से प्रभावित थे।
- स्वतंत्रता का आशय, 'दूसरे की स्वेच्छाचारी इच्छा
से स्वतंत्रता है।'
- हेयक के अनुसार, 'स्वतंत्रता का आशय, बाध्यकारी कार्यों को प्रतिबंधित करना है।'
- हेयक ने स्वतंत्रता का मूल अर्थ नकारात्मक माना।
व्यक्तिगत
स्वतंत्रता, स्वतंत्रता के निम्नलिखित रूपों से भिन्न होती है-
(i) राजनीतिक स्वतंत्रता ।
(ii) आंतरिक स्वतंत्रता (उच्चतर विचार)।
(iii) स्वतंत्रता, शक्ति के रूप
में।
स्वतंत्रता पर मिल्टन फ्रीडमैन (नव-उदारवादी)
- मिल्टन फ्रीडमैन ने अपनी पुस्तक-"Capitalism
and संकल्पना का प्रतिपादन किया। Freedom" (1962) में 'नकारात्मक स्वतंत्रता' की
- स्वतंत्रता का आशय, 'एक व्यक्ति पर उसके सहयोगी
व्यक्ति द्वारा बाध्यता या बल प्रयोग का अभाव है।'
सकारात्मक स्वतंत्रता
- सकारात्मक स्वतंत्रता के प्रमुख समर्थकों में रूसो, कांट, हीगल, ग्रीन, बोसांके, बार्कर, लास्की,
लियोस्ट्रॉस, मैकफर्सन आदि विचारकों के नाम
उल्लेखनीय हैं।
- रूसो ने सकारात्मक स्वतंत्रता का समर्थन किया, क्योंकि उनके अनुसार, 'अपनी तात्विक इच्छा (Real
Will) के अनुसार कार्य करना ही स्वतंत्रता है।'
हैरॉल्ड जोसेफ लास्की के अनुसार, स्वतंत्रता के
निम्नलिखित प्रकार हैं-
(i) व्यक्तिगत स्वतंत्रता।
(ii) राजनीतिक स्वतंत्रता।
(iii) आर्थिक स्वतंत्रता।
- हैरॉल्ड जोसेफ लास्की की रचना-"A Grammar of
Politics" (1925) है।
- लास्की के अनुसार, 'स्वतंत्रता का अर्थ ऐसी
दशाओं की उपलब्धता से है, जिसमें मनुष्य के विकास का
सर्वोत्तम अवसर उपलब्ध हो।' अतः इसलिए स्वतंत्रता अधिकारों
से उत्पन्न होती है।
- लास्की के अनुसार, 'बिना अधिकारों के स्वतंत्रता
नहीं हो सकते हैं, क्योंकि बिना अधिकारों के मनुष्य कानूनों
को मानने के लिए बाध्य नहीं हो सकता, जो कि उसके व्यक्तित्व
की आवश्यकताओं से संबंधित हों।'
- लास्की के अनुसार, अधिकार, अवसर व उत्तरदायी सरकार स्वतंत्रता के लिए आवश्यक हैं।
- आमर्त्य सेन ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक- "Development
as Freedom" (1999) में स्वतंत्रता का आशय, 'व्यक्ति की क्षमताओं का विकास माना।'
- समुदायवादी विचारक चार्ल्स टेलर ने नकारात्मक स्वतंत्रता को 'अवसरवादी संकल्पना' (Opportunist concept) कहा। जबकि
सकारात्मक स्वतंत्रता को 'अभ्यास की संकल्पना'
(Exercise concept) कहा।
- मैकफर्सन के अनुसार भी स्वतंत्रता सकारात्मक है। इन्होंने स्वतंत्रता को 'रचनात्मक स्वतंत्रता' (Creative Freedom) कहा।
- स्वतंत्रता का दार्शनिक या नैतिक अर्थ विद्यमान है। रूसो हीगल व ग्रीन के विचारों में भी सकारात्मक स्वतंत्रता की संकल्पना विद्यमान है। इनके विचारों में सकारात्मक
- स्वतंत्रता है।' हीगल के अनुसार, 'राज्य की आज्ञा का पालन करना ही
- ग्रीन के अनुसार, 'स्वतंत्रता उन कार्यों को
करने और भोगने का नाम है, जो करने और भोगने योग्य हों और
जिसका समाज में अन्य व्यक्तियों के साथ साझा उपयोग किया जा सके।'
- मैकफर्सन के अनुसार, 'सकारात्मक स्वतंत्रता एक
पूर्ण मानव के रूप में कार्य करने की स्वतंत्रता है। यह मानव की अपने विकास करने
की शक्ति है।' मैकफर्सन ने बर्लिन के स्वतंत्रता सिद्धांत की
आलोचना की और कहा कि स्वतंत्रता की उदारवादी अवधारणा ने स्वतंत्रता के महत्व को ही
खत्म कर दिया है।
अर्नेस्ट बार्कर के अनुसार, स्वतंत्रता के
निम्नलिखित तीन रूप हैं, जो एक-दूसरे के पूरक हैं-
(i) नागरिक स्वतंत्रता।
(ii) राजनीतिक स्वतंत्रता ।
(iii) आर्थिक स्वतंत्रता।
अटलांटिक चार्टर में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने निम्न चार
प्रकार की स्वतंत्रताओं का वर्णन किया-
(i) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
(ii) उपासना की स्वतंत्रता।
(iii) भय से स्वतंत्रता।
(iv) अभाव की स्वतंत्रता ।
- बांग्लादेश के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री महबूब अल हक ने संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट में मानव विकास की संकल्पना का निर्माण किया और मानवीय सुरक्षा की संकल्पना का विचार दिया। इनके अनुसार भी स्वतंत्रता सकारात्मक है।
स्वतंत्रता की इकहरी संकल्पना
- रॉल्स व मैकलॉवेन जैसे विचारकों ने स्वतंत्रता के नकारात्मक व सकारात्मक विभाजन को अस्वीकार कर दिया।
मार्क्सवादियों के अनुसार, स्वतंत्रता
1. मार्क्स
- मार्क्सवादी स्वतंत्रता को 'मुक्ति'
(Liberation) के रूप में वर्णित करते हैं।
- मार्क्स के अनुसार, स्वतंत्रता का आशय, 'विवशताओं का अभाव (End of necessity) है।'
(1844 की पेरिस पांडुलिपियों में मार्क्स ने यह विचार दिया।)
- व्यक्ति की स्वतंत्रता पर सबसे बड़ा प्रतिबंध आर्थिक कारणों से लगता है।
- पूंजीवादी समाज में व्यक्ति दोहरा जीवन जीने को विवश है।
राजनीतिक/नागरिक रूप में वहां समानता दिखाई देती है, लेकिन
उत्पादन के साधनों पर तथा आर्थिक संसाधनों पर मुट्ठीभर लोगों का अधिकार होता है।
- सकारात्मक एवं नकारात्मक स्वतंत्रता में विभाजन नहीं, लेकिन यदि एक चुनना हो, तो सकारात्मक स्वतंत्रता ।
2. हर्बर्ट मॉर्फ्यूज (नव-मार्क्सवादी)
- व्यक्ति द्वारा तार्किक लक्ष्यों को पूरा करना ही स्वतंत्रता है।
पूंजीवाद में व्यक्ति को, केवल उपभोक्ता के रूप में चित्रित किया जाता है
व्यक्ति की कृत्रिम आवश्यकताएं पैदा की जाती हैं।
- हर्बर्ट मॉर्फ्यूज ने स्पष्ट कहा, कि आधुनिक
पूंजीवादी युग में पूंजीवादी व्यवस्था के द्वारा वास्तविक स्वतंत्रता का जोड़-तोड़
(Manipulate) किया गया है।
- पूंजीवादी व्यवस्था में औपचारिक स्वतंत्रता इसलिए प्रदान की जाती है, क्योंकि यह पूंजीवादी प्रभुत्व के लिए कोई प्रत्यक्ष खतरा उत्पन्न नहीं
करती।
3. एरिक फ्रॉम
- मानव जीवन, भौतिक प्रबंध का दास बन गया है।
- उदारवाद ने मानव जीवन को मशीनीकृत/कंप्यूटरीकृत कर दिया है।
- स्वतंत्रता की एकीकृत संकल्पना नकारात्मक एवं सकारात्मक का भेद खत्म कर देती है।
- इकहरी संकल्पना 'जॉन रॉल्स' ने दी है।
- जोसेफ राज (Joseph Raz) ने स्वतंत्रता को 'स्वायत्तता'
के रूप में परिभाषित किया।
- स्किनर (Skinner) ने 'स्वतंत्रता की
गणतंत्रीय संकल्पना' का विचार दिया।
- एरिक फ्रॉम की रचना-"Escape From Freedom" (1941)
एवं "Fear of Freedom" (1942) है।
उद्देश्यात्मक स्वतंत्रता (Purposive Liberty) समुदायवादियों के अनुसार, स्वतंत्रता
- चार्ल्स टेलर के अनुसार, कुछ स्वतंत्रताएं
ज्यादा महत्वपूर्ण होती हैं।
- उन्होंने उद्देश्यात्मक स्वतंत्रता का समर्थन किया।
- उनके अनुसार, उपासना की स्वतंत्रता, आवागमन
की स्वतंत्रता से ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि उपासना की
स्वतंत्रता का उद्देश्य ज्यादा व्यापक है।
स्वतंत्रता एवं विधि में संबंध
- स्वतंत्रता का आशय, विधि के अंतर्गत् स्वतंत्रता
है।
- अतः स्वतंत्रता और विधि एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।
- मैक्कीन के अनुसार, 'स्वतंत्रता का आशय, विधि के अंतर्गत स्वतंत्रता है। लेकिन यह विधि तार्किक या औचित्यपूर्ण
होनी चाहिए।'
- जॉन लॉक के अनुसार, विधि के अभाव में स्वतंत्रता
नहीं हो सकती।
स्वतंत्रता से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
विचारक
नेल्सन मंडेला Long Walk to Freedom (1995)
आंग सांग सू की Freedom from Fear (1990)
आमर्त्य सेन Developement as Freedom (1999)
मिल्टन फ्रीडमैन Capitalism and Freedom (1962)
जोसेफ रॉज Morality of Freedom (1986)
- रूसो की स्वतंत्रता की संकल्पना को 'बाध्यकारी स्वतंत्रता' (Freedom of Paradox) भी कहा जाता है।
- Liberty की जगह Liberation शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग करने का श्रेय ब्राजील के गुस्तावो क्यूरेज को जाता है।
- जॉन रॉल्स की स्वतंत्रता की संकल्पना को 'परिवार की स्वतंत्रता' भी कहा जाता है।
- हेनरी बेंजामिन कॉन्सटेंट ने स्वतंत्रता को प्राचीन स्वतंत्रता व आधुनिक स्वतंत्रता दो रूपों में विभाजित किया।
- कैरोल पैटमैन ने आधुनिक राज्य में मिलने वाली स्वतंत्रता को 'पुरुषवादी स्वतंत्रता' कहा है।